हम अपने वतन को लौट चलें

आ लौट चलें आ लौट चलें
हम अपने वतन को लौट चलें ।
जिस माटी पर हम जनम लिये,
जिस पर हमने चलना सीखा ।
वह माटी हमें पुकार रही,
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
स्कूल कालेज जहाँ पढ़े लिखे,
हम पढ़ लिखकर इनसान बने।
वो स्कूल हमें पुकार रहा,
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
यहाँ उँचे पद को पा करके,
हम फर्ज निभाना भूल गये ।
क्यों अपने वतन को भूल गये ।
आ लौट चलें आ लौट चलें ,
हम अपने वतन को लौट चलें ।
गाँव की वो सूनी गलियाँ ,
वो बाग बगीचे के पंछी ।
पक्के कुएँ रेहट वाली ,
पगडंडी तुम्हें पुकार रही ।
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
मैया की बनी सौधी रोटी,
वो तोरी अरबी की सब्जी ।
छौकी दाल कढ़ाई की,
वो खीर दही मलाई की।
हम सबको याद वो दिला रही ।
वो बचपन हमें पुकार रही ।
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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