Monthly Archives: July 2022

कारगिल दिवस

आज याद आये हैं उन्हें,
सजाये हैं फूल वंदन यहाँ पर ।
कारगिल युद्ध के उन बलिदानियों के लिये,
दीये भी जलाये हैं यहाँ पर ।
उन अमर शहीदों के लिये,
गज़ल भी गुनगुनाये हैं यहाँ पर ।
भूल जायेंगे वो इनको यहाँ से जाने पर ।
शहीदों को याद भले ही करते हैं,
पर जगह भी नहीं देते बैठने को।
सफर करते समय रेल के डिब्बों पर।
फौजियों का दुःख दर्द इन्हें दिखायी नहीं देता है ,
कैन्टीन की सुविधा और पेंशन नज़र आती हैं इन्हें ।
जीवन बीमा भी फौजी अपना खुद ही भरता है ।
और शहीद होने के लिए भी सबसे आगे ही रहता है।
ये सरकार भी अंधी है और कानून भी काला है ।
फौजियों के लिए सब जगह अंधेरा ही अंधेरा है ।
फौजियों के लिए सब जगह अंधेरा ही अंधेरा है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

हम अपने वतन को लौट चलें

आ लौट चलें आ लौट चलें
हम अपने वतन को लौट चलें ।
जिस माटी पर हम जनम लिये,
जिस पर हमने चलना सीखा ।
वह माटी हमें पुकार रही,
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
स्कूल कालेज जहाँ पढ़े लिखे,
हम पढ़ लिखकर इनसान बने।
वो स्कूल हमें पुकार रहा,
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
यहाँ उँचे पद को पा करके,
हम फर्ज निभाना भूल गये ।
क्यों अपने वतन को भूल गये ।
आ लौट चलें आ लौट चलें ,
हम अपने वतन को लौट चलें ।
गाँव की वो सूनी गलियाँ ,
वो बाग बगीचे के पंछी ।
पक्के कुएँ रेहट वाली ,
पगडंडी तुम्हें पुकार रही ।
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
मैया की बनी सौधी रोटी,
वो तोरी अरबी की सब्जी ।
छौकी दाल कढ़ाई की,
वो खीर दही मलाई की।
हम सबको याद वो दिला रही ।
वो बचपन हमें पुकार रही ।
आ लौट चलें आ लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
हम अपने वतन को लौट चलें ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

बुढ़ापा कट जायेगा

पत्नी को साथ में बिठाकर,
दो निवाला उसे खिलाकर तो देखें ।
उनके बनाये भोजन का,
हंसकर तारीफ कर के तो देखें ।
उनके हाथों को पकड़ कर,
कुछ कदम साथ चल कर तो देखें ।
उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें,
अपनी बाहों में छुपा कर तो देखें ।
बच्चों की तरह ही कभी,
उन्हें सता कर के तो देखें ।
कभी एकांत में उन्हें ,
प्यार से सहला कर के तो देखें ।
कभी रात में सोते समय ,
उनकी आँखों को चूम कर के तो देखें ।
कभी कभार उनसे दूर रहकर भी तो देखें ।
कभी आँखों में आँखें डाल कर ,
प्यार का इज़हार कर के तो देखें ।
यों ही जवानी की तरह ,
उनका ख्याल रख कर के तो देखें ।
सूखी डाली भी पत्तियों से लद जायेंगी ।
बुढ़ापे में भी जवानी में आ जायेंगी ,
हजार दुखों को भूला कर ,
जिंदगी खुशियों से भर जायेंगी ।
हँसते हँसाते ये बुढ़ापा भी,
यो ही कट जायेंगा ।
हँसते हँसाते ये बुढ़ापा भी,
यो ही कट जायेंगा ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।