Monthly Archives: January 2020

ये हमारा प्यारा घर

स्नेह से ओत-प्रोत ये घर,

वट-वृक्ष के नीचे पूरा परिवार ।

प्यार और दुलार से सराबोर,

हमारे सपनों का यह संसार ।

घनी घनी डालियों के बीच,

छोटे बड़े रसीले मीठे फल।

कुदरत से दुआ है हमारी,

हॅसते मुस्कुराते रहें हर पल।

सुरेश की आशा है अपनों से,

कभी मिलते भी रहें पल दो पल।

बागों के बीच खिलती ये कलियाँ,

चमन में बहार सी लायी है।

मंडराते हैं भौरे व तितलियाँ ।

फूलों से भरी इन बागों में ,

अठखेलियां करती ये तितलियाँ ।

आसमां में उड़ती ये झुण्डो में,

चिड़ियों की अलग-अलग टोलियाँ ।

इस बूढ़े बरगद पर आराम करती हैं ,

हमें हमारे होने की एहसास दिलाती है ।

ये चमन, चिड़ियां व तितलियाँ,

इन बागों की बहारे हैं ।

हमारे बच्चे हमारा परिवार,

हमारे जीवन के सहारे हैं ।

हमारे जीवन के सहारे हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

ना छुट्टी न थकती हैं

जनम जनम से बिटिया रानी,
माँ, मासी, मामी, चाची ।
दादी, नानी, सखी, सहेली,
हर पल अपनों को सुख देती।
बिन नागा बिन छुट्टी के वो,
कभी न उफ तक करती हैं ।
न शिकवा न गिला किसी से,
जीवन भर वो खटती हैं ।
किस माटी की बनी है नारी ,
सब पर प्यार लुटाती हैं ।
क्षण भर भी न थकती नारी।
सेवा करती रहती हैं ।
वो सेवा करती रहती हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सेना दिवस

देखा है मैंने नजदीक से ये जिंदगी ।
जिया है मैंने अपना जीवन यहीं ।
गर्मी सर्दी बरसात की करते हैं बात।
माइनस बीस डिग्री या पल्स पचास ।
सब घड़ी हर हाल में थे तैनात।
न पता होता था कि ये दिन है या रात।
घर की जब कभी आती थी याद ।
माँ बाप की तीमारदारी क्या होती है ।
बुढ़ापे में कैसे उनकी मदद होती है ।
यह सपना ही रहा हम जवानों का।
हम तो वतन की सेवा ही करते रहे ।
बच्चे कैसे पढ़े लिखे और बड़े हुए ।
माँ बाप के गुजरने पर ही घर जाना हुआ ।
सरहद ही सदा हमारा आशियाना रहा ।
चाँदनी रात और तपती धूप का ।
चोली दामन सा वो साथी अपना रहा ।
हम फिर भी खुशकिस्मत हैं यारो।
तैतीस साल गुजार कर भी जिन्दा रहा ।
पर कितने वे हमारे भाई लौट न पाये ।
वहीं सरहद पर शहीद हो गये ।
वे तिरंगा में ही लिपट कर घर आये ।
सुरेश सलाम करता है उन शहीदों को।
माँ के लाल उन सच्चे वीरों को।
सेना दिवस के इस महान अवसर पर ।
बलिदानियों के बलिदानो को ।
माँ भारती के दीवानों को ।
माँ भारती के दीवानों को ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

ये सुबह तुम ऐसे ही आना

ये सुबह तुम ऐसे ही आना,
अपनों से तुम हमें मिलना ।
खुशियाँ लेकर हर दिन आना,
सब अपनों को रोज हँसाना ।
हिम्मत हम सबको तुम देना,
एक दूजे से प्रेम बढाना।
नहीं कभी तुम हमें रूलाना,
सबके सब को संबल देना।
उगते सूरज सी गर्मी देना,
फूलों से तुम हमें मिलना ।
बच्चों जैसा हमें तू रखना,
मन को कभी न मैला करना ।
ये सुबह तुम ऐसे ही आना ।
ये सुबह तुम ऐसे ही आना ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

भारत माँ को मुक्त करायें

जाति देश का गौरव हमने,
बरसों पहले खोया है ।
पास पड़ोसी से बेहतर हमने,
औरों को ही समझा है।
विदेशी विधर्मी को भी,
अपनों से बेहतर समझा है ।
आपस के हम मेल जोल को,
कभी न हमने समझा है ।
आग पडोसी घर में लगती ,
अपना घर भी जलता है ।
इतनी बात समझ नहीं आती ,
दुश्मन नहीं पड़ोसी होता,
आपस की ये बैर हमारी,
हमें गुलामी में है जकड़ा।
शदियो से गुलाम रहे हैं,
फिर भी चेत नहीं आया ।
आज अगर हम चूक गये तो,
हिन्दू वीहीन भारत होगा ।
भाई हिन्दू वीहीन भारत होगा ।
आओ मिलकर कसम उठायें,
मोदी जी का साथ निभायें।
टुकड़े टुकड़े गैंग को भैया,
और विदेशी वंशज को।
अपने देश से इसे भगाये,
भारत माँ को मुक्त करायें ।
भारत माँ को मुक्त करायें ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

बचपन वाला गाँव वो अपना

कहाँ गया वो बचपन अपना,

कहाँ गयी वो गलियाँ ।

बचपन का वो साथी अपना,

हँसना गाना रोज झगड़ना ।

कहाँ गुम हुए बाग बगीचे ,

अमिया वाली बगिया ।

आस पास के खेतों का वो,

चना मटर की फलिया।

चाचा चाची,ताया का वो,

हमें साथ ले घुमना ।

आंगन की चारपाई उपर,

दादा दादी का बैठे रहना,

स्कूल का वो साथी अपना,

मटरगश्ती करते रहना ।

छूट गया वो गाँव हमरा,

शहरों में पढ़ने आना ।

पढ़ लिखकर शहरों में रहना,

अपने गाँव को भूल जाना ।

आज बुढ़ापे में जब अपना,

बेटों का परदेश में जाना ।

याद बहुत अब आती हमको,

बचपन वाला गाँव वो अपना ।

बचपन वाला गाँव वो अपना ।

बचपन वाला गाँव वो अपना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।