Monthly Archives: November 2019

सफर

राजधानी की सफर हो, हमसफर का साथहो।

टेबल पर खाना हो, ऐ सी में सोना हो।

दोस्तों से दूर रहना हो, वाट्सएप साथ में हो।

दिन रात रेल में रहना हो, वही सोना जागना हो।

न आफिस का चक्कर हो, न कोई खटपट हो।

सफर में साथी साथ हो, फिर क्या बात हो।

सुहाने सफर की बस मीठी मीठी याद हो।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

जाति गौरव चौरसिया उपनाम

चौत्रृषि संतान हैं हम हब, कुल वंश से ब्राह्मण हैं ।

हुआ कालान्तर में कुछ ऐसा, ब्राह्मण हो गया वैश्य हमेशा।

करम धरम सब अभी वही है, पूजा विधि विधान वही है ।

खानपान और पहरावा भी, पूर्वज वाली शान वही है ।

गर्व हमें अपने पूर्वज पर, कर्मकांड भिक्षाटन छोड़ ।

अपनाकर स्वेच्छा से श्रम, चौत्रृषि चौरसिया बनकर ।

वैश्य धर्म अपना कर श्रीमन्, कर्म प्रधान श्रमशील जीवन ।

फैले चहुँ दिशा में श्रीमन्, नवजीवन जीने को जीवन ।

दिया दान मंदिर द्वारे हम, बहुत किया उनका सम्मान ।

बदलें उस नियम बंधन को, दान करें अपने समाज को।

मदद करें हम लाचारों को, मेधावी कर्मठ बालक को ।

धनाभाव में छोड़ पढ़ाई, करते खेती मजदूरी वो।

दिशा हीन हो भटके बालक, शिक्षित बेरोजगारी में ।

सही दिशा देकर हम उनको, जीवन पथ पर बढ़ने में ।

शादी व्याह में दान दहेज का, खुलकर आप विरोध करें ।

स्वेच्छा से गर दान मिले तो, खुशी खुशी घर ले जायें ।

हमें हमारा भी हो अपना, राज्य राष्ट्र के स्तर पर ।

एक संगठन एक सहारा, एक नेता के संबल पर।

सिक्ख जैनियों के भांति ही, योग्य सत्यनिष्ठ कर्मयोगी ।

कर्णधार महामानव वह, जाति समाज के सहयोगी।

अंशदान प्रतिमाह हमारा, बूंद बूंद सागर बनकर ।

लाखों जन का संबल बनकर, चौत्रृषि समाज का हितकर।

हो कल्याण इस गिरे समाज का, राज्य राष्ट्र के स्तर पर ।

बने पहचान हमारी अपनी, नाम चौरसिया से जुड़कर ।

आगे पीछे नाम में जोड़े, चौरसिया उपनाम अपनाकर ।

बिन बदले ही नाम को अपना, जोड़े चौरसिया उपनाम ।

एका होगी हममें अपनी, मिलेगी हर हाथों से हाथ ।

राष्ट्र स्तर पर अपनी होगी, चौरसिया अपनी पहचान ।

अभी नहीं पहचान हमारी, अलग-अलग अपना उपनाम ।

नहीं हैं संख्या में हम कमतर, नहीं और लोगों से अनपढ़ ।

एका नहीं हमारी अपनी, नाम और उपनाम से हटकर ।

आयें मिलकर सपथ धरें हम, चौरसिया हम सब मिलकर ।

पशु पक्षी फल फूल समेत,चंदा के संग तारे रहकर।

चौत्रृषि संतान हैं हम सब , बंटकर क्यों कर रहते हम।

अलग अलग उपनामों में, क्यों टुकड़े टुकड़े रहते हम।

करे सुरेश विनती सब जन से, बच्चे युवक बृद्ध सज्जन से।

बढ़ आगे हम कदम उठायें, चौरसिया की ध्वज लहरायें ।

चौरसिया का मान बढ़ायें, चौरसिया का मान बढ़ायें।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सात सात पुरस्कार

मोदी है तो मुमकिन है

अभी तो खेला शुरू हुआ है ।

साथ निभायें आगे देखें ।

जगत को शांति देने वाले ।

मोदी जी का चाल तो देखें ।

जगत गुरू भारत बन सकता ।

जग में भारत माँ की शान ।

मोदी रहा तो हो भी सकता ।

सुख शांति का दूत है मोदी ।

सबके लिए सपूत है मोदी ।

भारत का लाड़ला बेटा यह।

सारे विश्व का नेता है।

मोदी है तो मुमकिन है ।

विश्व में शांति स्थिरता भी।

मोदी है तो मुमकिन है ।
मोदी है तो मुमकिन है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

पत्नी है तो घर उजियारा

पत्नी है तो घर उजियारा।

बिन घरनी घर भूत का डेरा।

बिन पत्नी पुरुष पथिक बावरा ।

बिन अंखियन यह जग अंधेरा ।

पत्नी संग यह घर उजियारा ।

पत्नी पति दो जान नहीं यारा।

दोनों मिल यह जग संवारा ।

बिन पत्नी यह घर अंधियारा।

बिन बाती के दीप नकारा ।

तेल बाती मिल करे उजाला ।

पत्नी संग यह घर उजियारा ।

पत्नी संग यह घर उजियारा ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

बिहार भारत का गौरव है

बिहार भारत का गौरव है

गर्व है बिहार को पूरे बिहारियों पर।
गर्व है पूरे हिन्दुस्तान को बिहारियों पर ।
बिहारी पत्थरों में कोहिनूर हीरा है ।
बिहारी पूरी दुनियाँ में अद्भुत व निराला है ।
बिहार कोयला लोहा अबरख की खान है ।
यहाँ पर राखामाइन्स में यूरेनियम का भंडार है ।
यहाँ बड़े बड़े कारखानों की भरमार है ।
बिहार बुद्ध महावीर की जन्मभूमि है ।
बिहार चाणक्य व चन्द्रगुप्त की कर्मभूमि है ।
भारत को एक सूत्र में बांधने की भूमि है ।
बिहार गुरू गोविन्द सिंह की गोदी है ।
बिहार सोने की खान व ग्यान का भंडार है ।
विक्रमशिला जहाँ आज भी विद्यमान है ।
बिहार वो है जहाँ जीनियस पैदा होते हैं ।
प्रथम राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू बिहारी हैं ।
विशिष्ट नारायण सिंह मैथ के जीनियस हैं ।
तभी तो बिहारी सबों के दिलों में बसते हैं ।
बिहारी कोई बाहरी नहीं भारत के दिल हैं ।
बिहार भारत के मस्तक का भाल है ।
बिहार भारत का लाड़ला अनोखा लाल है ।
यही तो बिहारियों का कमाल है ।
भारत में हजारों आईएस बिहारी हैं ।
सन संतावन के रणबांकुरे कुवँर सिंह बिहारी हैं ।
वे जहाँ भी रहते हैं वहीं बिहार बस जाता है ।
बिहार की भूमी की खुशबू फैला देते है।
सबों में घुल-मिल कर बस जाते हैं ।
देश के बाहर भी बिहारी देश बना लेते हैं ।
सूरी व सूर्यनाम देश बिहारियों का भारत है ।
यह बिहारियों का जीता जागता भारत है ।
हम बिहारी हैं हमें बिहारी होने पर गर्व है ।
हम बिहारी हैं हमें बिहारी होने पर गर्व है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

हमें हमारे जान से भी प्यारा हैं मोदी

नन्हें नन्हें बच्चों की जिन्दगानी हैं मोदी ।

ग़रीब मजदूर किसानों के मसीहा हैं मोदी ।

माँ बहनों के अरमानों की उम्मीदें हैं मोदी ।

ये नये भारत की नयी कहानी हैं मोदी ।

सोये हुए देश के युवाओं की रवानी हैं मोदी ।

भारत माँ की लाज बचाने वाले सपूत हैं मोदी ।

भारत के भाल को उँचा करने वाले हैं मोदी ।

ये हमारे देश की शान बढ़ाने वाले हैं मोदी ।

दुनिया में शांति का संदेश देने वाले हैं मोदी ।

अपनी माँ के दूध का कर्ज चुकाने वाले हैं मोदी ।

ये हमारे देश के नेता नहीं भाग्य विधाता हैं मोदी ।

हमें हमारे जान से भी प्यारे हैं मोदी ।

हमें हमारे जान से भी प्यारे हैं मोदी ।

हमें हमारे जान से भी प्यारे हैं मोदी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

कलम बिकती नहीं है

बेच रही वो अपना लाज, अपने पेट के खातिर ।

बिक गया वह बेईमान, चन्द रुपयों के खातिर ।

देश को बना गया गुलाम, वो अपना जमीर बेच के।

बेच दी अपनी बहन बेटियों को, अपनी ऐयाशी के लिए ।

पर न बिका कबीर न बिका रहीम, निराला रहा अमीर।

दिनकर मैथली शरण गुप्त, बेच न पाये अपना जमीर ।

तलवार बिकती है बाजारों में, पर न बिकते हैं कवि ।

हमें गर्व है उन कवियों पर, तोड़ देते हैं अपनी कलम ।

पर बेचने का सौदा नहीं करते, ईमानदारी से लिखते हैं ।

बेवाक सच्चाई को हमराह बनाकर, चलते रहते हैं ।

कलम गुलाम है उन कवियों की, वो गुलामी नहीं करते हैं ।
सुरेश कलम का सौदागर नहीं, जिसे वह बेच दे बाज़ारों में ।
कलम कलम है कवियों की, तलवार की धार से भी तेज है ।
सत्ता और शासन भी यहाँ, कलम के बिना निस्तेज है ।

तलवार से जीती हुई सत्ता भी, कलम की ही देन है ।

कलम बेचने वाले कलम नहीं अपना जमीर बेचते हैं ।

कलम तो सुरेश यों ही बदनाम है, कलम कवियों की पहचान है ।
कलम कवियों की पहचान है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

भारत माँ के सच्चे सपूत

शत-शत नमन है तुम्हें हमारा, माँ के सपूत तुम मोदी जी।

धन्य हो गयी माता आपकी, तुम्हें जनम दे मोदी जी ।

भारत माँ की लाज बचाने, जनम लिये हो मोदी जी।

सबका साथ सबका विकास, ये नारा तेरा मोदी जी।

युग युग तक ये नाम तुम्हारा, अमर रहेगा मोदी जी।

शदियों से वनवासी बनकर, रामलला थे पड़े हुए ।

वनवासी को घर में लाकर, आज आपने हमें दिये।

नाम अमर इतिहासो में अब, होगा तेरा मोदी जी ।

तूने ऐसा काम कर दिया, नफ़रतों को दूर कर दिया।

भारत को तुम स्वर्ग बनाया, भारतीयों का नाम बढ़ाया ।

हिन्दू मुस्लिम भेद मिटाया, शान्ति का संदेश सुनाया ।

भाई चारा सदभावना से, सबको रहना साथ सिखाया।

धन्य हो गया भारत वासी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया।

भेद-भाव को दूर भगाकर, सबको तुमने गले लगाया ।

देश द्रोही को सबक सिखाया, सबको रहना साथ सिखाया।
माँ के दूध की लाज बचाकर, हम सबको जीना सिखलाया।

भारत माँ की शान बढ़ाकर , दुनिया भर में नाम कमाया ।

शत-शत नमन है तुम्हें हमारा, जीवन जीना हमें सिखाया।

जीवन जीना हमें सिखाया, जीवन जीना हमें सिखाया ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मानवता का रक्षक मोदी, धन्य

हमारी कामवाली

ऐ कामवाली, तू आज फिर क्यों नहीं आयी ।
कसम से मेरे दिल की धड़कन थम गयी ।
आज तो मेरी सांस ही रुक गयी ।
ऐ कामवाली, तू आज फिर क्यों नहीं आयी?
चाय पीते पीते चौंक गयी थी मैं,
काहे की चाय, अब तो बरतन है मांजना।
खाना बनाया किसी तरह मैंने ,
पति को रवानगी की ।
कस ली कमर, उठाया झाड़ू मैंने।
एक हाय निकल आयी ,
ऐ कामवाली, तू आज फिर क्यों नहीं आयी ।
मैं ही नहीं पूछ रही हूँ केवल,

घर का कोना-कोना भी ढूंढ रहा है तुम्हें ।
ये भींगे हुए कपड़े, ये फ़ैला हुआ घर।
सब तो पूछ रहे हैं तुम्हें,
ऐ कामवाली तू आज फिर क्यों नहीं आयी?
रेडियो पर ये गाना बज रहा है ,
ये तेरा घर, ये मेरा घर ।
पर ये तो है , मेरा बिखरा हुआ घर।
किसी ने देखा है अगर,
मेरे कामवाली का घर।
तो जाकर उससे पूछ,
तू आज फिर, काम कर क्यों नहीं आयी ।
ऐ कामवाली, तू आज फिर क्यों नहीं आयी ।
ऐ कामवाली, तू आज फिर क्यों नहीं आयी ।