Monthly Archives: March 2020

दोस्ती अनमोल है

दोस्ती अनमोल है

मिलना बिछुड़ना सब किस्मत का खेल है ।
जिन्दगी में कभी नफ़रत तो कभी मेल है ।
बिकाऊ है यहाँ हर रिश्ता,पर दोस्ती अनमोल है ।
दोस्ती कृष्ण सुदामा की, सुयोधन और कर्ण की ।
केवट और श्री राम की, सुग्रीव व हनुमान की।
कागज और कलम की, ऑख से काजल की।काँटे और गुलाब की, काज से बटन की ।
मीरा से कृष्ण की, ब्रज से ब्रजवासियों की ।दोस्ती चंदबरदायी से पृथ्वीराज चौहान की । दोस्त दोस्ती चेतक से महाराणा प्रताप की।
हमारी दोस्ती है आपसे कसम है श्री राम की।हमारी दोस्ती है आपसे कसम है श्री राम की।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

भजन

भज मन नारायण नारायण नारायण ।

भज मन नारायण नारायण नारायण ।

गज और ग्राह लड़े जल भीतर।

लड़त लड़त गज हारायण ।

श्री मन नारायण नारायण नारायण ।

सरयुग तीर अयोध्या नगरी।

दशरथ कुल अवतारायण ।

श्री मन नारायण नारायण नारायण ।

दर्शन पाये अहिल्या तर गयी।

सबरी के बेर पारायण ।

श्री मन नारायण नारायण नारायण ।

सूरदास और मीरा तर गयी ।

भक्त जटायु रावण तर गये ।

केवट पार लगायायण।

श्री मन नारायण नारायण नारायण।

कहे सुरेश भज तुलसी तर गये।

संत कबीर रैदासा तर गये।

आपन पार लगायायण।

श्री मन नारायण नारायण नारायण।

श्री मन नारायण नारायण नारायण ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

करोना तुमने हमें मिलाया

हाय करोना हाय करोना, घर में बंद तुम किया करोना ।

नाते रिश्ते नौकर चाकर, सबको अलग कर दिया करोना ।

सूखा राशन चावल दाल, घी तेल और नमक मशाला ।

घर घर में सबको रखवाया, सबको रहना साथ सिखाया ।

दूध सब्जी का किया अकाल, घर बैठे सब हुए बेहाल।

हाय करोना हाय करोना, तुमने ऐसा किया कमाल ।

घर में रहकर देखा हमने, पत्नी करती कितने काम ।

बच्चों के संग रहकर सीखा, बच्चे होते हैं शैतान ।

माँ उनकी नादानी से, दिन भर रहती है परेशान ।

हँसना सीखा हमने भैया, पत्नी बच्चों के हम साथ ।

समय कहाँ मिलता था हमको, दिन भर करते थे हम काम ।

देर शाम जब घर आते थे, चैन नहीं था फिर भी काम ।

लैपटॉप पर करते रहते, घर में आफिस का ही काम ।

करोना तुमने बहुत सताया, फिर भी सबको दिया आराम ।

साफ सफाई हमें सिखलाया,मिलजुलकर करने को काम ।

मंदिर घर को बना दिया तुम, जीवन जीना सिखा दिया ।

पोल्यूशन को दूर भगाकर, सारी दुनियाँ को हर्षाया ।

एक हो गयी सारी दुनियाँ, ऐसा मंत्र तुम हमें दिया ।

भाई चारा देश प्रेम का, सबको ये संदेश दिया ।

करोना तुमको युगों युगों तक, याद करेगी सारी दुनियाँ ।

रूला रूला कर हमें हँसाया, सबको मिल रहना सिखलाया ।

कुछ खोकर तब हमने पाया, सारी दुनियाँ एक हो पाया ।

करोना तुमने हमें रूलाया, जाते जाते हमें मिलाया ।

जीवन जीना हमें सिखाया, जीवन जीना हमें सिखाया ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

करोना ने कहा

करोना ने कहा मुझसे तुम डरोगे,
तभी तो तुम सही सलामत रहोगे ।
अगर तुम मुझसे दोस्ती करोगे,
तब तुम सचमुच ही मरोगे ।
इसी लिये कहता हूँ तुमसे,
अपने अपने घर में ही रहोगे ।
फिर भी अगर नहीं समझते हो,
तो तुम सचमुच ही मरोगे ।
मुझसे बच कर और छुपकर रहना,
सामने आओगे तो जरूर ही मरोगे ।
सामने आओगे तो जरूर ही मरोगे ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

ये घर पर ही अब रहना है

ये खुशी खुशी का बंधन है।
यह जीवन सबको प्यारी है ।
करोना का कोई नहीं इलाज है ।
बचने का बस यही उपाय है ।
खुद बचें परिवार बचायें ।
समाज और फिर देश बचायें।
घर में कैद नहीं सुरक्षित हैं ।
ये खुशीखुशी का बंधन है।
करोना से बचने का साधन है ।
खुशी खुशी घर रहना है ।
इस बंधन से बंध रहना है ।
इस बंधन से बंध रहना है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सबक सिखाया करोना

करोना ने है हमें सिखाया,
मिलकर सब परिवार में रहना ।
साफ सफाई करते रहना,
घर बाहर और अंगना ।
मिलजुल कर रहना समाज में,
धीरज कभी न खोना ।
सुख दुःख सब मिल साथ निभाना,
न बैर किसी से बढ़ाना ।
ताकत होती है संख्या में,
आपसी मेल मिलाप से रहना ।
देशभक्त नेताओं का सब,
मिलकर साथ निभाना ।
देश धर्म के खातिर अपना,
जीवन धरम निभाना ।
सब मिलकर साथ निभाना ।
सब मिलकर साथ निभाना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

एक शौहर की जुबानी

एक दूजे का साथ है

अकेला था, मदमस्त था, मस्ती में जीता था।
जवानी आयी, इश्क का भूत सवार हो गया।

चाँद सी गोरी दुल्हन,वो परियों की रानी,

किस्मत सवारने, आ गयी घर में घरवाली ।
पहले माँ बाप से किया जुदा, फिर परिवार से कहा अलविदा ।
बच्चों की हसीन दुनिया में, हमने सबको भुला दिया ।
हम भी कभी दुलारे थे, अपने माँ बाप के ।
बीबी ने हमें अपने ही घर में, रोबोट बना दिया ।
आफिस में हम भले ही बास थे, घरवाली तो हमें नौकर बना दिया।

कमा कमा हर महीना, पगार तो पत्नी को ही दिया ।
चाय पानी का खर्चा, बस भाड़े की रकम ।
हर रोज पत्नी से मांगने पर ही मिला ।

कल तक जो हमारी राह देखा करती थी, आज हमें आँखें दिखाती है ।
गर समय पर घर नहीं आया, डांट आज उसकी खानी पड़ती है ।
जवानी के इश्क की सज़ा, जीवन भर काटता ही रहा ।
रोज रोज की कीच कीच, हर रोज ही झगड़ना ।
मियां बीबी की ये कहानी, हम सभी को है भुगतना।

न हम बड़े, न तूम बड़े, दोनों का रिश्ता है पुराना।

न बेटा, न बेटी, न भाई, न बहना ,
कटेगी ये उमरिया, है साथ साथ ही रहना ।

ये न शिकवा है न शिकायत, न एक दूसरे का रोना।
ये तो फलसफा है जिंदगी का,मियां बीबी का तराना।

एक दूजे का साथ, है अंत तक निभाना ।

एक दूजे का साथ, है अंत तक निभाना

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो अपने माता-पिता को भगवान की तरह पूजा करते थे और बड़े भाई भाभी को माता-पिता ही समझते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो सुबह शाम लोटे लेकर खेतों पर जाया करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो स्लेट पेनसिल, तख्ती और कलम दवात से लिखते थे।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो स्कूल में जूट के अपने अपने टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो दतवन से सुबह सुबह दाँत साफ करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो खेतों की रखवाली करने रात में अपने खेतों पर ही सोया करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो छूआ छूत के भेदभाव को अपने आँखो से देखे हैं ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो चने चवेने बड़ी ही चाव से खाते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो सुबह शाम गैया की थन से निकले गरमा गरम दूध ग्लास भर भर के पीते थे ।
हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो दीपक और कुप्पी की रोशनी में पढ़ाई कर, अनपढ़ किसान के बेटे से क्लास वन सर्विस तक पहुंचते थे।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो अपने चाचा चाची, मामा मामी, फूफा फूफी ,मौसा मौसी और आस पड़ोस के घरों को भी अपना ही घर समझते थे।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो फूस की मरैया, मिट्टी के खपरैल घर से निकल कर आलीशान ऐ सी वाले बंगले में आशियाना बना पाये हैं ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो गाँव की कच्ची सड़कों पर कभी-कभी ट्रक के आने पर उसके पीछे लटकने के लिये दौड़ लगाया करते थे और हमारे आखों मुँह धूलो से ढक जाया करते थे, पर क्या मस्ती होती थी , आज की पीढ़ी अनुमान भी नहीं लगा सकती है ।

ऐसे बहुत कुछ और यादें हैं जो हमारी इस आखिरी पीढ़ी के साथ ही चली जायेगी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।