Monthly Archives: January 2017

हृद्य रोग का ईलाज

पान का रस, लहसुन का रस ,अदरख का रस ,मधु
एक एक चम्मच ।सुबह शाम ईक्कीस दिन तक व्यवहार करें।ब्लोकेज कीलीयर हो जायेगा।
अजमाया हुआ नुक्सा है।आपेरेशन करवाने की जरूरत नहीं है।

नींबू, अदरख, लहसुन, ऐप्पल का सिरका एक एक कप रस लेकर धीमी आंच फर गरम करें।जब तीन कप रह जाय तो ठंढा होने दें।तीन कप मधु मिलायें।
कांच के बरतन में बंदकर रख लें।रोज सवेरे खाली पेट तीन चम्मच पान करें। बड़े बड़े डाकटर अचंभे हो जायेंगे।

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Murphy, materiamedica.

दारुबंदी

​भैया बापू को समझाना, 

बिटिया रानी आगे बढ़ना। 

दारू पीनी बुरी बात है, 

रोग बुलाता साथ साथ है।

गाँठ का पैसा लूटा जाता, 

घर घर में है आग लगाता। 

रोटी कपड़ा जुटा न पाता,

कुल्हड़ रोज चढाता है। 

दारू पीकर मस्त रहेला, 

जल्दी ही मर जावत है।

बिन ब्याहे बिटिया रह जाती, 

बाप जो दारू पीबत है। 

सोच तू भैया, सोच रे बापू, 

काहे उमर गमाबत है। 

छोड़ दे दारू भैया मोरी, 

बापू पैंया परू में तोरी। 

खुश रहबे सब मिलकर घर में, 

बिन दारू के सभी शहर में। 

प्यारा होइहें अपन बिहार,

नीतिश बाबू किये कमाल, 

दारू बंदी करके यार।

हम सब पर उनका उपकार। 

चलो मनायें हम त्योहार, 

चलो मनायें हम त्योहार। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

गौरवशाली भारत 

गोरों को अपनी गोरी चमड़ी पर गरूर है,

हम भारतीयों को अपनी सभ्यता पर नाज है।

गोरे घमंड में हमें नीचा दिखाना चाहते हैं,

हम उस नीच को भी सभ्य बनाना चाहते हैं।

गोरे हमें गुलाम बनाया था अनीति अत्याचार से,

हम उसे इनसान बनाना चाहते हैं प्यार से।

चमड़ी गोरी हो या काली मन साफ होना चाहिए।,

इनसान को हर इनसान से प्यार होना चाहिए।

ये गोरे वतन के लोगो याद करो तुम अपने को,

चुतड़ पानी से साफ करना तुम्हें आजतक नहीं आया है।

क्योंकि हमारे पूर्वजों ने तुम्हें चुतड़ धोना नहीं सिखाया है।

हमारे ही वेद और पुरानों ने तुम्हें ग्यान सिखाया है,

जिसे तुम्हारे पूर्वजों ने हमारे देश से चुराया है।

विश्व को भारत ने जीरो दिया है,

तभी तुम आज चंद्रमा पर जा सके हो।

कम्प्यूटर, राकेट, पनडुब्बी, जलयान,

फ्रिज, एयर कन्डीशनर सब बना सके हो।

हमारे ॠषि मुनियों की ये सब देन है,

हमें नीचा दिखाने की हिमाकत न करो।

तुम सब कायर,लुटेरे और चोर हो,

हम भारतीय सच्चे दिल वाले शेर हैं।

सच्चे दिल वाले शेर हैं।
जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

सत्तरवां साल 

सालगिरह तो एक बहाना था,आप सबों को घर बुलाना था।

साथ मिल कर हँसना गुनगुना था,आप को गीत सुनाना था।

साथ बैठ कुछ खाना पीना था, अपनों को खाश बनाना था।

आप सब आये हैं, घर में खुशी और दिल भर आया है।

अपने जीवन की कुछ खास बातें ,आपको अभी सुनाना है।

सत्तर साल की उमर बीत गयी, पता नहीं घर बारी में।

आज समझ में आयी मुझको, बीती है खुशहाली में।

बचपन अपना गाँव में बीता,पाटम गांव की बारी में।

गली गली में खेला खाया,गरमी समय अमरायी में।
नहीं कभी कोई गम रहता था, खेलन और पढाई में।

कालेज जाना हुआ नसीब, अठरह साल की बारी में।

छब्बीस साल में हो गयी शादी,घर में आयी घरवाली।

चार साल तक मौज मनाया, तब आयी बिटिया रीनी।

घर में गूंजी किलकारी थी, दो दो बिटिया रानी की।

खूब हंसाया बहुत सताया, दोनों बिटिया रानी ने।

घरवाली की बुरी दशा थी, दोनों को खुश रखने में।

हार न मानी प्यार लुटायी, दोनों को ले बांहों में।

बेटा जनम लिया था मेरा, चार साल बेटी के बाद।

घर पूरा हो गया था अपना , बेटा बेटी से आबाद।

समय गुजरता चला गया है, बीत गया ये सत्तर साल।

बिटिया सुखी वो अपने घर में, बेटा रहता है परदेश।

हम दोनों खुशहाल रहत हैं, तनिक नहीं है हमें कलेश।

कैसे बीती उमर हमारी, कैसे ये दिन बीत गए।
लगती है सब कल की बातें, बचपन और जवानी की।

याद कभी जब पल वो आवे, बचपन और जवानी की।

तन बूढा हो चुका हमारा, मन में है जीने की चाह।

हंसते गाते रहे ये बच्चे ,यही हमारी अपनी चाह।

जैसे हमने पाला उनको, और दिखाया उनको राह।

हमको भी वह गले लगाये, रक्खे वो अब मेरा ख्याल।

खूब कमाया खूब लुटाया, धन दौलत और अपना प्यार।

और नहीं कुछ पास हमारे, दिल में है फिर भी ये प्यार।

तुम भी बच्चों प्यार लुटाना, खुशी रहे तेरा संसार।

मां बाबा का प्यार तुम्हें है, खुशी भरा हो ये संसार।

खुशी भरा हो ये संसार, खुशी भरा हो ये संसार।

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

माँ का कर्ज


जिसे तुम देने की बात कहते हो,

वह कभी लेने वाली नहीं है भाई।

माँ तो भगवान को भी देती आयी है,

भगवान भी उसको न दे पाये भाई।

दुनियाँ जिसके आँचल में समा जाती है,

उसे तुम क्या दे पाओगे मेरे भाई।

अगर तुम कुछ देना ही चाहते हो।

उसे अपना प्यार दे दो बचपन वाली।

उसके सीने से लग पैरों से लिपट कर,

बुढ़ापे का सहारा, देदो उसे वो खुशहाली।

बचपन में उसके आँचल में छिपा करते थे,

आज उसे अपने बाहों में उठा लो भाई।

रखना न कभी अलग उसे अपने से,

खोना न उसे कभी अलग रहकर।

हाथों से निवाला खिलाया है तुम्हें,

रखना उन्हें आँखों पर बिठा कर।

तभी तुम अपना कर्ज उतार पाओगे,

अंतिम समय अपना फर्ज निभा पाओगे।

दूध का कर्ज उतार पाओगे,

दूध का कर्ज उतार पाओगे।

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

घर की बहू 

​बेटी रोती है सासर में, खटती रहती है दिन रात। 

सास ननद की ताना सुनती, और सिसकती है दिन रात। 

घर घर की है यही कहानी, सास ननद की ये नादानी। 

रानी तेरी यही कहानी,घर घर देखा यही कहानी। 

अबसे तुम रखना ये ख्याल, नहीं बहू का हो ये हाल।

साथ समय के बदलो तुम,पढी लिखी हो समझो तुम। 

बन बहुरिया आयी घर में, सास बनी है आज तू घर में। 

बहू नहीं तेरे इस घर में, नहीं परायी बेटी घर में। 

न ये तेरी अपनी जायी, पर बेटी है माँ की जायी। 

सुखी सदा संसार रहेगा, घर में तेरा प्यार रहेगा। 

मरते दम तक बहू तुम्हारी, बनी रहेगी बिटिया प्यारी। 

बहू नहीं है बिटिया है ये, ऐसे ही संस्कार सजाना। 

घर में गूजेंगी किलकारी, बहू बनेगी अम्मा प्यारी। 

कल को जब वह सास बनेगी, सबसे प्यारी सास बनेगी। 

नहीं परायी बहू वह होगी, वह तो घर की बिटिया होगी। 

घर घर में तब खुशियाँ होगी, और नहीं तब वह रोएगी। 

ह तो  घर की रानी होगी ,वह तो  घर की रानी होगी। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम

चिकनगुनिया के दर्द से राहत

सामग्री :-

50 ग्राम सरसों का तेल

50 ग्राम सफेद तिल का तेल

15 लौंग

1 टुकडा दालचीनी

2 टेबल स्पून अजवायन

1 टेबल स्पून मेथी दाना

15 लहसुन की कली बारिक कटी हुई

1 छोटा टुकडा अदरक पिसा हुआ

1 टी स्पून हल्दी

2 बडे पीस कपूर

1 टेबल स्पून एलोवेरा जैल

विधि :-

कढाई मे दोनो तेल डाल कर तेज गैस पर गर्म करो फिर गैस को धीमी करके हल्दी और कपूर को छोड कर  सारी चीजो को डाल दो , जब तक सारी चीजे जल न जाए और उन का सत तेल मे ना आ जाऐ , करीब 20-25 मिन्ट लगेंगे इन्हें जलने मे जब ये भून जाएगें तब तेल का रंग गहरा हो जाएगा फिर गैस बंद कर दे और उसमे हल्दी ,कपूर मिला दे जब तक कपूर घुल ना जाए तब तक तेल को ठंडा होने दे फिर तेल को छान कर एक शीशी मे भर कर रखो , कैसा भी बुरा ;दर्द हो इससे मालिश से गायब हो जाएगा

चिकनगुनिया मे पैरो मे और जोइंट पेन ज्यादा होता है यह तेल 100% फायदेमंद है लगाते ही आराम आना शुरू हो जाएगा पहले दिन से . दिन मे 3 बार मालिश करें |

Stroke indicator 

Stroke has a new indicator, the Tongue
STROKE: Remember the 1st Three Letters…..
S. T. R. 

STROKE IDENTIFICATION:

Thank God for the sense to remember the ‘3’ steps, STR. Read and Learn!Sometimes symptoms of a stroke are difficult to identify. Unfortunately, the lack of awareness spells disaster. The stroke victim may suffer severe brain damage when people nearby fail to recognize the symptoms of a stroke.Now doctors say a bystander can recognize a stroke by asking three (3) simple questions:

S *Ask the individual to SMILE.

T *Ask the person to TALK and SPEAK A SIMPLE SENTENCE (Coherently)

(i.e. Chicken Soup)

R *Ask him or her to RAISE BOTH ARMS.

If he or she has trouble with ANY ONE of these tasks, call emergency number immediately and describe the symptoms to the dispatcher.
New Sign of a Stroke ——– Stick out Your Tongue!

NOTE: Another ‘sign’ of a stroke is this: Ask the person to ‘stick’ out his tongue. If the tongue is
‘crooked’, if it goes to one side or the other that is also an indication of a stroke.

A cardiologist says if everyone who gets this e-mail sends it to 10 people; you can bet that at least one life will be saved .

A painter 

​A man was asked to paint a boat.He brought with him paint and brushes and began to paint the boat a bright red, as the owner asked him.While painting, he noticed that there was a small hole in the hull, and quietly repaired it.When finished painting, he received his money and left.

The next day, the owner of the boat came to the painter and presented him with a nice cheque, much higher than the payment for painting.The painter was surprised and said “You’ve already paid me for painting the boat Sir!” “But this is not for the paint job. It’s for having repaired the hole in the boat.”

“Ah! But it was such a small service… certainly it’s not worth paying me such a high amount for something so insignificant.”“My dear friend, you do not understand. Let me tell you what happened.When I asked you to paint the boat, I forgot to mention about the hole.When the boat dried, my kids took the boat and went on a fishing trip.They did not know that there was a hole. I was not at home at that time.When I returned and noticed they had taken the boat, I was desperate because I remembered that the boat had a hole.Imagine my relief and joy when I saw them returning from fishing.Then, I examined the boat and found that you had repaired the hole! You see, now, what you did? You saved the life of my children! I do not have enough money to pay your ‘small’ good deed.”

So, no matter who, when or how. Just continue to help, sustain, wipe tears, listen attentively and carefully repair all the ‘leaks’ you find, because you never know when one is in need of us or when God holds a pleasant surprise for us to be helpful and important to someone_.You may have repaired numerous ‘boat holes’ along the way… of several people without realizing how many lives you’ve saved_.

So Keep up Good work. 

Courtesy from a unknown friend.