Monthly Archives: July 2021

आज की शकुन्तला


कोमल और मयंक आस पास ही रहते थे और साथ साथ एक ही स्कूल में पढ़ते हुए बड़े हुए थे। दोनों अच्छे खाते पीते शिक्षित परिवारों से थे। ग्रेजुएट होते ही दोनों को अच्छी नौकरी मिल गयी थी। दोनों एक ही शहर के अलग-अलग संस्थान में नौकरी करते थे। आधुनिक और खुले विचार, वे दोनों अक्सर महीने में एक दो दिन शाम किसी महंगे होटल में खाना खाते, मौज मस्ती करते और देर रात घर लौटते थे। दोनों एक दूसरे को प्यार करते थे पर शादी तक बात नहीं पहुँची थी । ऐसे ही एक दिन होटल की टेबल पर दोनों कालीदास की शकुन्तलम पर चर्चा करते हुए एक दूसरे में वही चरित्र को अनुभव करने लगे । चर्चा कुछ अधिक देर तक चली और उस रात वो दोनों सचमुच के ही दुष्यन्त शकुन्तला बनकर एक दूसरे में खो गये । जीवन की पहली मिलन का दोनों ने भरपूर आनंद लिया ।
उसके बाद फिर सभी सामान्य रूप से चलता रहा, पर महीने के बाद कोमल को अनुभव हुआ कि वो माँ बनने वाली हैं। उसने मयंक से बात की पर मयंक उसे हँसी में टाल दिया और गर्भपात कराने की सलाह दी। कोमल का हृदय टूट गया और भरत दुनियाँ नहीं देख पाया ।
सुरेश मंडल
बंगलौर
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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राखी का नेग


सोहनी और सुभाष दोनों भाई बहन में खूब प्यार था।बचपन से ही दोनों एक दूसरे को अपने अपने हिस्से का फल, मिठाई, चॉकलेट आदि सभी चीजें देकर खुश होते थे। बड़े हुए शादी व्याह हो गयी । दोनों अपने अपने परिवार के साथ खुशी खुशी जीवन जी रहे थे। सोहनी प्रतिवर्ष अपने भाई को राखी बांधती और उसके सुखी जीवन व लम्बी उम्र की दुआ करती । भाभी उसे उसकी पसंद की भोजन बना कर प्रेम से खिलाती । भाई भी उसे सुखी जीवन का आशीर्वाद देते और प्रेम से विदा करते थे, पर आजतक उसने न राखी पर अपनी बहन को कोई नेग दिया और न बहन उससे कुछ माँगा ।
आज सोहनी की पच्चीस साल की बेटी की शादी थी। भाई भाभी परिवार सहित शादी में आये थे, उसने भगिनी के लिये एक सुन्दर बनारसी साड़ी का सेट और गले का दो तोले का हार लेकर आये थे, और उसके साथ एक लिफाफा भी। ये सब बहन को देते हुए भाई ने सिर्फ़ इतना कहा- बहन ये तुम्हारे वर्षों से सहेजा हुआ राखी का नेग है । उम्मीद करता हूँ तुम्हें खुशी होगी । थोड़े थोड़े धन प्रतिवर्ष नेग देता तो आज भगिनी के व्याह पर शायद इतना न दे पाता और वो छोटी छोटी रकम तुम ऐसे ही खर्च कर दी होती । आज तुम्हें रुपयों की जरूरत है शायद कुछ कमी पूरी हो जायेगी । बहन ने भाई की दूरदर्शिता पर उसे बाहों में भर कर खूब प्यार किया ।
शायद इस कहानी से हमें भी एक दूसरे को वक़्त वे वक़्त नेग देते रहने के असली महत्व को समझने की जरूरत है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

बरखा रानी

तपती धरती जलता सूरज, शुष्क हवाये सूखी नदियाँ ।
सूखी बाबरी, सूखे कुएँ, सूखी सारी ताल तलैया ।
जेठ बैसाख का तपता महीना, पछिया हवा व बहता पसीना ।
सनसन चलती लू हवा में, झुलसे पेड़ पानी बिन सूना।
जेठ बैसाख का यही महीना, बिन बरखा सब सूना सूना ।
हाथ जोड़ सब पूजे इनदर , करत सभी जन विनती तोरा।
आओ बरसो मेघा रानी, सबको पार लगाओ रानी।
झम झम झम झम बरखा बरसे, नदियाँ ताल तलैया हरषे।
कूप भर गये पानी से सब, पेड़ पौधे सब हरे हो गये ।
खेतों में हरियाली छाई, झम झम बरसे बरखा रानी ।
धरती का जीवन है पानी, बरखा रानी बरखा रानी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

नदी

नदी बनो और धीर बनो तुम, नदियों वाला नीर बनो तुम ।

शीतल धारा नदियों वाली, धीर और गंभीर बनो तुम ।

नदियाँ बहती ही रहती हैं, अपने पथ बढ़ती रहती हैं ।

कहीं न रूकती कभी न थकती, आगे ही बढ़ती रहती हैं ।

कहीं पहाड़ और कहीं पे रोड़े, तोड़ उसे बढ़ती जाती है ।

आसपास के दोनों तट को, हरियाली करती जाती हैं ।

गाँव गाँव और वीराने को, पानी से भरती जाती हैं ।

पानी ही जीवन है सबका, पानी उन्हें देती रहती हैं ।

तुम भी ऐसे जीवन जीकर, सबको प्यार लुटाते रहना ।

नदियों जैसा जीवन जीकर, जगवालो को खुशियाँ देना।

जीवन का संदेश यही है, ठोकर से तुम मत घबराना ।

यही संदेशा देना सबको, सुरेश भाई का यही है कहना ।

नदियों जैसा जीवन जीकर, सबको मीठा नीर पिलाना ।

खुद तो आगे बढ़ते जाना, औरों को भी नहीं भूलना ।

कर संघर्ष सदा जीवन में, आगे ही तुम बढ़ते जाना ।

आगे ही तुम बढ़ते जाना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम