Monthly Archives: June 2018

बारिश की फुहार

सच कह रही हो सखी तुम , मौसम बारिश का बड़ा छलिया होता है।
मन में गुदगुदी दिल में उमंग होती है, पिया मिलन की आस होती है।
जब दूर होते हैं परदेशी पिया, पापी मन मेरा भी तड़पता है।
रिमझिम रिमझिम बारिश की फुहार, बदन में लगाती हैं आग।
सजना जब साथ साथ होते हैं, आग लग जाती है बदन में।
सुनकर उनकी फ़रमाइश, गरमा गरम खाने को।
बनाने कहते जब चटपटी चटनी,
तलने को मजबूर करते हैं पकौड़ी।
मजे लेते हैं खुद बारिश का, डाल कुर्सी बालकनी में।
खाते रहते हैं पकौड़ी चटनी के साथ,
और हम तलते रहते अंदर कीचन में।
वही पकौड़ी उनके लिये, तब कोफ्त और घुटन होती है मुझे।
इस निगोड़ी बारिश से, क्यों बरसती है झमाझम।
सखी हम नारियों की यही व्यथा है, हमारी मन की कोई नहीं सुनता है।
चाहे ये निगोड़ी बारिश हो , या हमारा प्यारा बलमा।
मन कुढ़ता जलता है सखी, बारिश में मन मेरा भी मचलता है सखी ।
बचपन में भींगा करते थे, कागज की कश्ती से खेला करते थे।
गीले कपड़ो में जब घर आते थे, माँ की डांट और पिता की घुड़की।
आज भी याद आती है, बारिश में मचलना धूम माचना।
सखी सहेलियों के संग, धक्का मुक्की कर पानी में फिसलना।
आज अपनी बिटिया को देखती हूँ, बारिश में उछलते कूदते।
अपना भी बचपन याद आता है,
बारिश में उछल कूद करना, सखी याद आता है।
निगोड़ी बारिश में मन मेरा भी मचलता है। मन मेरा भी मचलता है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

YOGA

Yoga means jods (plus), it combinines and connects our external health , internal organs and mind to keep them fit and healthy to prevent and protect from being deased.

Yoga has three parts,

Yog , Pranayam and meditation.

Yog is an exercise to give flexibility to our all the joints, by moving these joints regularly and systematically, it improves and keeps them healthy and fit.

It is for all ages and gender. Specifically aged and weak. After 40yrs most of our organs start deteriorating. So it is must for aged people. It is very simple to do the movement of our joints to keep them healthy and flexible , first under the guidance of Yoga teacher then practicing our self at our home and offices as per our convenient time. Minimum 5 to 10 times moving each joints regularly, one can avoid many deases. It is always correct to have prevention better than cure.

Pranayam is the means to improve the internal organs of our body. Pranayam is a breathing exercise , we inhale and exhale air in a simple way systematically to get more Oxygen. Regularly doing this breathing exercise for 30mts we can be sure to keep fit and healthy our Heart, Kidneys, Lungs, attack, stones in kidneys and gallbladder, migrens, ulser and many more deases.

Meditation is the exercise of mind to keep our mind calm, patients and cheerful. It is the state to sit in Dhyana mudra for 20 to 30 minutes daily and regularly and concentrate on our Diety/ God of our faith. Yoga does not relate to any religion and sect. It is a science of body developed by Yoga Rishi PATANJALLY thousands yrs ago for the whole world and mankind.

Thus we can practice Yoga and keep our self fit and healthy. It improves our efficiency to work harder and earn more, it saves lot of money and time spend on curing deases and relieves us from the agony of those deases which no one can share but you only have to bear, So we must practice Yoga for our self and incurrage others to practice.

Jaihind jaibharat vendamatram.

पैसा अवगुण की खान

पैसा है भगवान यहाँ पर,पैसा है भगवान।
पैसे पर बिकता है भैया, यहाँ आम इनसान।
पैसा माई बाप यहाँ पर, पैसा अवगुण की खान।
पैसे से है मोह सभी को, पैसे ही है जान।
सास ससुर नन्दी देवर जी, सैयां मेहरबान।
पैसा माई बाप यहाँ पर, पैसा है भगवान।
पीछे पीछे घूमता ससुरा, भीख मांगते सभधी से।
नाम दिया है उसको भैया, दान दहेज है लड़की के।
लाखों का ले दान दहेज भी, और कमाई जोरू की।
फिर भी ताना देते भैया, ये ससुराली बन्दे जी।
जभी बहुरियि बोल पड़े तो, मिलकर तोड़े उनको जी।
किस किस घर की बात कहें हम, घर घर देखा ऐसे जी।
खड़े एकजुट हो जाओ तुम, घर घर की ओ लक्ष्मी जी।
मिलकर इनको सबक सिखाओ।
और जीओ न घुट घुट कर जी।
और जीओ न घुट घुट कर जी।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

माँ बाप की सेवा

एक बालक अपने माँ-बाप की खूब सेवा किया करता था। उसके दोस्त उससे कहते कि अगर इतनी सेवा तुमने भगवान की होती तो तुम्हें
भगवान मिल जाते ! लेकिन इन सब चीजों से अनजान वो अपने माता पिता की सेव करता रहा ! एक दिन उसकी माँ बाप की सेवा-भक्ति से खुश होकर भगवान धरती पर आ गये !
उस वक्त वो बालक अपनी माँ के पाँव दबा रहा था ! भगवान दरवाजे के बाहर से बोले- दरवाजा खोलो, बेटा मैं तुम्हारी माता-पिता की सेवा से प्रसन्न होकर तुम्हें वरदान देने आया हूँ ! बालक ने कहा – इंतजार करो प्रभु मैं माँ की सेवा में लगा हूँ ! भगवान बोले – देखो मैं वापस चला जाऊँगा! बालक ने कहा – आप जा सकते है, भगवान मैं सेवा बीच में नहीं छोड़ सकता ! कुछ देर बाद उसने दरवाजा खोला तो क्या देखता है भगवान बाहर खड़े थे !
भगवान बोले – लोग मुझे पाने के लिये कठोर तपस्या करते हैं। पर मैं तुम्हे सहज ही में मिल गया, पर तुमने मुझसे प्रतीक्षा करवाई ! बालक ने जवाब दिया – हे ईश्वर जिस माँ बाप की सेवा ने आपको मेरे पास आने को मजबूर कर दिया उन माँ बाप की सेवा बीच में छोड़कर मैं दरवाजा खोलने कैसे आता !
यही इस जिंदगी का सार है !
जिंदगी में हमारे माँ-बाप से बढ़कर कुछ नहीं है ! हमारे माँ-बाप ही हमें ये जिंदगी देते हैं ! यही माँ-बाप अपना पेट काटकर बच्चों के लिये अपना भविष्य खराब कर लेते हैं। इसके बदले हमारा भी ये फर्ज बनता है कि हम कभी उन्हें दुःख ना दें ! उनकी आँखो में आँसू कभी ना आये, चाहे परिस्थिति जो भी हो।
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रूपया है भगवान

मम्मी पापा भाई बहन और नाते रिस्तेदार सब बौना हो जाते हैं रूपये के सामने।

रूपया है भगवान यहाँ पर, रूपया है ईमान।
इन रूपयों के आगे भैया, दुनिया नहीं जहान।
इसीलिये कहता हूँ भैया, सुन लो मेरी बात।
हाय रूपया हाय रूपया, तू ही मेरा बाप।
भुला गया मैं सारी दुनिया,जब से मिल गये आप।
मम्मी पापा आप हमारे, आप मेरे भगवान।
आपे से ही दुनिया मेरी, आप मेरे मेहमान।
तेरी आरती पहले करता, दूजा तब भगवान।
तू दाता जब पास हमारे, मिलता तब सम्मान।
जय हो जय हो रूपया मैया, जय मेरे भगवान।
जय मेरे भगवान। जय मेरे भगवान।

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

Yours Duties

Past is the root of the trees which one can’t be seen but the trees can’t survive without roots.
Present is the branches and leaves of trees and the Future is the flowers are fruits.
So is our life, stand on the solid past , build your present strongly to have your better future with your family and friends in the society.
Mind it only the present is in your hands, Be honest to your Duties.
Wishing you all Good morning, good day , good health and prosperity in your life.

Jaihind jaibharat vendamatram.

बहूरानी

घर की प्यारी बहूरानी तू,
बिटिया की प्यारी अम्मा।
स्कूल की प्यारी टीचर तू,
है समाज की चेतना तू।
गर्व तुम्हें पाकर माता को,
और गर्वीली सास तुम्हारी ।
गर्व से तेरा देवर बोले,
लाखों में है मेरी भाभी।
युग युग सुख से जीओ सुरभी,
प्रियतम और बच्चों के संग तुम ।
यही अशीष सुरेश जी देते,
जुगनू बन रौशन तू करना।
अंधियारों को दूर हटना।
अंधियारों को दूर हटना।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

चलते जाना चलते जाना

चिड़ी चिडैया नन्हीं नन्हीं।
बाज बटेर मोर मोरनी।
जंगल के राजा हैं शेर,
हिरन चौकरी करती फिरती।
जंगल के ये फूल निराले,
मधुमक्खी के छत्ते प्यारे।
सन सन सन सन हवा बही है,
पुरवैया की सोर है प्यारे।
रिमझिम रिमझिम बरसा बरसे,
धरती धानी चुनरी ओढ़े।
सतरंगी है मौसम प्यारा,
फागुन मास की है फगुनाई।
चैत मास क्या आया चलकर,
फूलों से भरमाया जंगल।
बात निराली है इस पल की,
प्रकृति का है खेल निराला।
आज का पल फिर कभी न लौटा,
जीवन का संदेश यही है।
चलते जाना चलते जाना,
कभी न रुकना कभी न थकना।
रूक जाना ही मौत तुम्हारी,
चलते जाना चलते जाना ।
जीवन पथ पर चलते जाना,
कभी न रुकना चलते जाना।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

झाँकना

सच ही तो कह रही सखी तुम ,
झाँकना है तो अंदर झाँक।
आस पड़ोस झाँकन ते मिलना,
जिल्लत और जहालत।
अंदर झाँक मिलेगा बन्दे,
अपने रब का दर्शन।
देख कबीरा अंदर झाँका,
कबीरा हुए महान।
तुलसी तुलसीदास बन गये।
मीरा बन गयी दासी।
शहर बनारस शिवशंकर के,
बन गये तीरथ काशी।
अपने अंदर झाँक रे बन्दे,
मिले घट घट के वासी।
मिले घट घट के वासी।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।