Monthly Archives: July 2016

गठरी 

गठरी गयली भुलाय सखी री, कहाँ मोरी गठरी भुलाय गयली री। 

बाबा मोरी गठरी दीन्ही सखी री,गठरी में बाबा के पियार सखी री। 

गठरी में बाबा की दुलार सखी री,करत बिदा बाबा दीन्ही गठरी। 

गठरी में उनकर सीख सखी री,वही सखी गठरी भुलाय गयी री। 

बिन गठरी नहीं भावे मोहे अँगना,कैसे कटी दिन रैन सखी री। 

गठरी में नाही सखी सोना री चांदी,नाही रहली मोतियन माल सखी री।

सुखबा की रहली गठरिया सखी री,वही सखी गठरी भुलाय गयली री।

कौन ठैयांगठरी हेराय गयली रीसखी,कौन ठैयां गठरी हेराय गयली री।

 कामिनी कंचन मोहे मोरी सखियाँ,मनमा गयली भरमाय सखी री। 

गठरी गयली मोर भुलाय सखी री,कौन ठैयां गठरी हेराय गयली री।

 सखी कौन ठैयां गठरी हेराय गयली री। 

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बाढ़ 

बाढ़ का पानी बहता है, और बिहार डूब जाता है।

गंगा गंडक कोशी सोन, उफन बागमती जाता है।

घर डूबा डूबे सब खेत, डूबी बकरी डूबी गैया।

डूबा गया वो जोड़ी बैल,खाट खटोला डूबी नैया।

कहाँ रहा वो ताल तलैया, हम सब सारे मर गये भैया।

नेता आये बाबू आये, कुछ पैकेट कुछ खाना लाये।

लिखा पढी कर बाबू साहब, हमरे हाथ अंगूठा लेकर।

चले गये आश्वासन देकर, मिला नहीं पाई भी हमका।

लूट ले गये सबके हक को,और दिखावे आँखें हमका।

जय जय सीता राम कहो जी ,यही भाग्य है हम गरीबन का।

जय हो जय हो इस शासन का। जय हो जय हो इस शासन का।

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

बूझो तो जाने 

हम सब के वो साथ में रहता,  उसके बिन हम रहें अधूरा। 

बहुत ही प्यारा है वह छैला, जन्म जन्म का नाता मेरा। 

नहीं वह खाता नहीं वो पीता, नहीं पहनता कपड़ा वह। 

नहीं कभी वह सामने आता,उसका है बचपन से नाता। 

माँ बाबा ने उसको हमसे, साथ जन्म से है जोड़ा। 

मरते दम तक साथ हमारा, फिर भी ओझल रहता वह। 

नहीं कभी वह सामने आता, जीवन साथ निभाता वह। 

जहाँ कहीं भी जाना होता, साथ साथ ही चलता वह। 

धूप ताप सर्दी गर्मी भी, नहीं रुलाता है उसको। 

ये जग ये संसार अधूरा, उस साथी का इतना मोल। 

मैया हमें बुलाये जब भी, साथ हमारे जाये वो।

बहना, भैया, साथी संगी, साथ साथ ही पाये वो।

नाम बताना साथी इसका, नाम तो इसका है अनमोल। 

नाम तो इसका है अनमोल, नाम तो इसका है अनमोल। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

शहीद अमर होते हैं———–शहीद कभी मरते नहीं, वे अमर होते हैं। शहीदों की बीबी कभी बेवा नहीं होती हैं। शहीदों के मजारों पर हर बरस मेला लगतािा है। उसे भुलाया नहीं जाता उसे याद किया जाता है। जीते जी शहीद देश की सुरक्षा में लड़ा है। कब्र में पड़ा भी वो हम सबसे बड़ा है।शहीद की बीबी बेवा व विधवा नहीं होती है।देश की वह बेटी पूरे देश की बेटी होती है। वह पूरे देश की बेटी होती है। जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

मित्र और रिश्तेदार ————मित्र और रिश्तेदार  मित्र और रिश्तेदार की तुलना हम फुलवारी के पौधों और गमलों में लगे पौधों से कर सकते हैं। फुलवारी के पौधों को रोजाना सींचने की जरूरत नहीं होती है, फिर भी वह सदा लहलहाते ही रहता है, पर गमलों में लगे पौधों को समय समय पर सींचना जरूरी होता है, अन्यथा वह नमी के अभाव में सूख जाता है। अतः रिश्तेदारी को बनाए रखने के लिए समय समय पर हमें एक दूसरे से बात चीत करते रहने, उनके सुख दुख का हाल चाल की जानकारी लेते रहना चाहिए, तथा उनकी समय पर सहायता भी करते रहना चाहिए। मित्र तो एक अटूट विश्वास के साथ आप के साथ हमेशा आपके सुख दुख में खड़ा ही रहता है, उन्हें अगाह करने की जरूरत नहीं होती है। सच्चे मित्र सदैव आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

बदलाव 

रहीम एक नेक दिल, रहमदिल और दानशील बंदा था। खुदा ने उसे वो सब कुछ दिया था, जो एक इनसान की जिंदगी की दिली तमन्ना होती है। गाँव भर के लोग उसे समय का कर्ण मानते थे। गाँव में किसी गरीब की बेटी का व्याह गरीब की तरह नहीं होती थी, कोई किसान अपना बैल इसलिए नहीं बेचा था कि उसे साहुकार का कर्ज चुकाना है।ऐसा कभी नहीं हुआ कि गाँव का कोई होनहार लड़का, पैसों के अभाव में आगे न पढ़ पाया हो।और मजदूर बन कर रह गया हो।तभी तो रहीम को गाँव भर के लोग अपने से बढ़कर चाहते थे। रहीम को भी कभी किसी से शिकायत नहीं थी कि लड़के उनके बागों से फल चोरी करते या बरबाद करते। वे तो खुद गरीब बच्चों को बुलाकर उन्हें भरपूर आम अमरूद दे दिया करते थे। खुदा भी उनपर मेहरबान थे, उनके घर के आगे एक एक विशाल बरगद का पेड़ था,जिसके नीचे उसने चबूतरा बनवा रक्खा था। बड़े बूढ़े इसकी छाँव में बैठकर आराम किया करते थे और बच्चे धुम मचाया करते थे। ऊपर चिड़ियों का बसेरा था जो हर समय कलरव किया करते थे। रातों में किसान अपनी अपनी दुख सुख की बातें इसी पेड़ के नीचे एक दूसरे को सुनाया करते थे। पास ही रहीम का बनाया एक पक्का कुँआ था, जिसके मीठे पानी की चर्चा आसपास के गांवों तक थी। कुएं पर हर समय रस्सी लगी बालटी रक्खी रहती थी। पूरा गाँव इसी कुएँ से मीठा पानी ले जाया करता था, राहगीर भी पानी पीकर बरगद की छाँव में आराम करता और रहीम को दुआएं देता था। 

दूसरी ओर रहीम का चचेरा भाई अशरफ था। गाँव के दूसरी तरफ उसके पक्के मकान थे। रहीम से उसकी खेती भी ज्यादा थी। उसके पास ट्रैक्टर और पंपिंग सेट था। उसकी खेतों में उपज भी रहीम से ज्यादा होती थी। पर पूरे गाँव में उनका वो मान सम्मान नहीं था जो रहीम का था। कारण कि वह एक नंबर का स्वार्थी था, उसे सिर्फ अपने फायदे से ही मतलब था। अगर किसी को वक्त वेवक्त कुछ उधार दे भी दिया तो दोगुना बसूला करता था। किसी की करम फूटी तभी वह अशरफ से उधार लिया। अगली फसल पर आधी फसल जब्त या भैंस के बच्चा देते ही भैंस अशरफ का। इस तरह वह गाँव का सबसे अमीर होते हुए भी पूरे गाँव का सिरदर्द था। गाँव वाले हर समय खुदा से यही दुआ करते रहते थे कि हे खुदा हमें इस शैतान से बचाये रखना।खुदा ने भी उसे अच्छी सजा दी थी, उसके घर के सामने के कुँए का पानी खारा था, अतः कोई भी व्यक्ति उधर पानी पीने नहीं जाता था। अशरफ ने बहुत कोशिश की कि उसके घर के सामने भी छायादार वृक्ष हो, पर वह असफल ही रहा। पेड़ लगाए जाते, दो तीन साल तक बढते और फिर सूख जाते। वह सिर्फ इसी से परेशान नहीं थे, सबसे ज्यादे दुख उसे इस बात से थी कि उसके बाद उसके संपत्ति का बारिस कौन होगा? क्योंकि चालीस साल होने पर भी वे बेऔलाद ही थे। वह चार चार शादियां कर चुका था, फिर भी अब्बा बनना उसे अभी तक नसीब नहीं हुआ था। वह इसी से सदा गमगीन रहा करता था, पर पैसों के मामले में वह बिलकुल बेदर्द था। 

एक दोपहर अशरफ खाना खा कर आराम फरमा रहे था, तभी एक फकीर ने दस्तक दी। वैसे तो वह फकीरों की कद्र नहीं किया करता था, पर उस दिन उसने उस फकीर की खूब सेवा की।फकीर उसकी सेवा से खुश हो गया। उसने अशरफ के चेहरे को देखकर कहा, बेटा लगता है तुम्हें कोई घुन अंदर ही अंदर खायें जा रहा है, मुझे बताओ।अशरफ उनके पैरों पर गिर पड़ा और अपनी रामकहानी उन्हें सुना दी। फकीर ने उसकी दास्तान गौर से सुनी और आह भरते हुए कहा, हे खुदा के बंदे तुम सिर्फ खुदा की बंदगी करते हो,पर खुदा के बंदों को तकलीफ पहुँचाते हो, उन पर दया नहीं करते हो। खुदा के बंदों से प्यार करो,उनकी सेवा करो,उनके बनाए हर जीव पर दया कर, गरीबों और मुलजिमों की सेवा कर,उसे कभी कहर मत दे।यह गुनाह है और तेरे घर के आगे खारे पानी का कुआं और ये ठूठ पेड़ इस बात की गवाही देता है कि तुम एक जालिम और खुदगर्ज इनसान है। तुम्हें बस सेवा से ही निजात मिल सकती है। सेवा कर मेवा मिलेगा। रहीम को देखकर कुछ सीख ले,खुदा तुम पर भी मेहरबान होगा। आमीन, कहकर फकीर चला गया। 

अशरफ सोचने पर मजबूर हो गया, वह अपने किये गुनाहों के लिए खुदा से माफी मांगी और आगे से कभी गुनाह नहीं करने की और सदा नेक काम करने की कसम खाई। अगले ही दिन से वह रहीम के घर आना जाना शुरू कर दिया। वहाँ वह गरीबों और जरूरत मंदों की मदद की पेशकश की। फिर क्या था रहीम की सलाह पर उसने गांव वालों की खूब सेवा की। गाँव में हाईस्कूल और अस्पताल बनाने के लिए अपनी जमीन ही नहीं दी, बल्कि रूपए पैसों से भी भरपूर मदद की। लोग उसके इस बदलाव से चकित थे। पर वास्तव में वह बदल चुका था। गाँव वाले की दुआ के असर और खुदा में उनका विश्वास से अगले ही वर्ष उनके घर एक नन्हा मुन्ना और एक नन्ही कली का जन्म हुआ। ठूठे पेड़ में कोपल फूट पड़ा, पास ही दूसरे कुएं खुदवाने पर मीठा पानी का चश्मा निकल गया। फकीर की दुआ और खुदा की मेहरबानी को याद करते हुए वह जिन्दगी भर खुदा की इबादत और इनसानों की खिदमत में गुजार दिया। आज अशरफ और रहीम इस दुनिया में नहीं हैं, पर उस गाँव में अभी भी उनके बसाये कितने ही परिवार सुख से रह रहे हैं। गाँव वाले उनकी आत्मा को दुआएं देते हैं। हर वर्ष उनकी मजारों पर चादर चढायी जाती है, फूल और बताशे चढाते हैं और दीपक जलाकर उनके नेक कामों को याद किया जाता है तथा गाँव की उन्नति और सलामती की दुआ मांगी जाती हैं। 

औरत के लिए सोच बदलें

अपना सोच बदलें, औरत को औरत की निगाहों से देखें। 

वो सिर्फ एक औरत ही नहीं है, माँ, बहन, बेटी, बहू, भी है। 

नानी, दादी, बुआ,व चाची , प्रेयसी और पत्नी भी है। 

मामी, मासी, ननदी, जेठानी, सखी सहेली रानी भी है। 

अगर आप उसे सिर्फ पत्नी ही समझ रहे हैं तो ये भूल है। 

वह आपके बच्चों की माँ भी है, और घर की मालकिन भी। 

आप दिन भर धूप में तपकर, घर लौट आते हैं थककर। 

मुस्काकर स्वागत करती है,  ठंडा पानी प्यार से देती है वह। 

गरम गरम खाना खिलाती है, दिन भर की थकान मिटाती है। 

अपने प्यार दुलार से सजाकर, सूने घर को स्वर्ग बनाती है वह। 

आप महीनों लाखों कमाते हैं, उसे संयोग कर रखती है वह। 

आप बहककर कुछ गलत करते हैं, वो बहकने से रोकती हैं। 

कभी प्रेमिका बनकर कभी माँ बनकर, तुम्हें संभालती है वो।

तुम्हारे कुलबंश को आगे बढ़ाती है, जगत की जननी है वो।

कभी भी अपना वो मोल नहीं माँगती , क्योंकि वह अनमोल है। 

पर तुम जैसे घटिया इनसान, उनका मोल भी लगाते हो।

धन और मद के गरूर में, सब कुछ ही भूल जाते हो।

 माँ बेटी बहन के अनमोल रिश्तों को, बाजार में बिठाते हो।

लानत है तुम जैसे इनसान पर, डूब मरो चुल्लू भर पानी में, 

जो औरत को औरत नहीं समझते, बेचने की चीज समझते हैं। 

माँ बहन बेटी का आदर नहीं करते, वो हैवान ही तो है। 

अरे भाई इनसान बनो,औरत को औरत समझो, उसका मान करो।

औरत को औरत की निगाहों से देखो,उनका सम्मान करो। 

क्योंकि वह है तो हम सब हैं, उसके बिना संसार सूना है। 

औरत जननी है, जीवन देती है, जीवन देने वाली माँ का मान करो। 

जीवन सुखी होगा, दुनिया खुशहाल होगी। औरत का सम्मान करो। 

दुनिया खुशहाल होगी। औरत का सम्मान करो। 

जन्नत है इश्क 

​इश्क सिखा देता है जीना, मरने वालों को भी। 

इश्क करके तो देखो यारो, इश्क चीज ही वो बला है। 

धरती पर ही जन्नत बसा देता है इश्क। 

हर हसीना हूर लगती है, जो हमारे दिल में बस जाती है।

दिन दिन नहीं रहती, रात रात नहीं रहती। 

हर लहमा तो इश्क में महबूबा की याद रहती है। 

सुरेश करे फरियाद उस इश्क के दीवानों से।

इश्क की दरिया में डूब जाओ यारो,

जन्नत यहीं है, जाने नसीन की बाँहों में। 

छुपा लो एक दूसरे को, दुनिया की निगाहों से। 

बस इश्क किये जाओ,जिन्दगी जीने के लिए। 

कहीं ये लम्हा निकल न जाये,तेरी मुट्ठी से। 

समेट लो इसे अपनी बाँहों में, 

भूल जाओ दुनिया को,इश्क ही तो है दुनिया में। 

जो हमसबों को इस दुनिया में लाया है। 

इसी से दुनिया है और ये जन्नत है। 

आओ हम इस जन्नत में खो जाए। 

महबूबा की हसीन बाँहों में, 

महबूबा की हसीन बाँहों में।

जनम दिन मुबारक 

बहुत बधाई बिटिया रानी ,जन्म दिवस पर हँसना तुम।

हंसती गाती सदा रहो तुम, फूलों सी मुस्काओ तुम। 

साथ साथ रहकर अपनों के, सदा हंसाओ उनको तुम। 

सुख के दुख के साथी बनना, साथ निभाते रहना तुम। 

जीवन सदा सुखी हो तेरा,मिलकर कदम बढ़ाना तुम। 

आने वाला जीवन तेरा, नयी नयी अरमानों का।

घर में गूँजे किलकारी भी, ऐसे कदम उठाना तुम। 

दोनों घर की लाज तुम्हीं हो,इसको नहीं भुलाना तुम। 

माँ बाबा की लाडली बेटी, उनकी यहाँ अमानत तुम। 

सास ससुर की बहुरानी तुम, बेटी बनकर रहना तुम। 

दुआ हमारी तुमको बिटिया, सुख से जीवन जीना तुम। 

सुख से जीवन जीना तुम। सुख से जीवन जीना तुम। 

नेता जी 

​मौका परस्त, चापलूस और बेईमान लोगों के बीच में भी इमानदार, साहसी, कर्मठ और तेजस्वी लोग दुनिया तथा जनता को राह दिखाने के लिए जिन्दा है, तभी तो देश और दुनिया चल रही है,। भाटी साहब जैसे इनसान को शत शत नमन। देश को सच्चे मार्ग दर्शक की जरूरत है, अगर एेसे दो चार नेता हर प्रदेश में हों जायें तो देश का कल्याण हो सकता है।हम सभी उनके सुखद भविष्य तथा स्वास्थ्य जीवन की कामना करते हैं, जंगल में शेर तो अब बचा नहीं है, पर समाज  और देश के इस शेर सपूत को कोटि कोटि वन्दन।