Monthly Archives: May 2022

हम बिक रहे हैं


बिक चुके हैं हम, हर रोज बिक रहे हैं ।
यहाँ जमीं बिक रही है, आसमान बिक रहा है ।
घर बिक रहा है, खलिहान बिक रहा है ।
हम बिक रहे हैं, ईमान बिक रहा है ।
देश बिक रहा है, देश गद्दार बिक रहा है ।
पैसों के लिये बिचौलियों की माँ बहन बिक रही है ।
कुछ लेखक और कवि भी आसानी से बिक रहे हैं ।
इस देश का दुर्भाग्य है कि यहाँ हर कोई बिक रहा है ।
और जो नहीं बिक रहे हैं, अपमानित हो रहे हैं ।
और बिकने वाले नोबेल पुरस्कार पा रहे हैं ।
कोयले तो चारों तरफ बिखरे पड़े हैं ।
पर हीरे बहुत ही मुश्किल से मिल रहे हैं ।
कोयले सब जगह जलाये जा रहे हैं ।
और हीरे तिजोरियों में संजोये जा रहे हैं ।
हीरे तिजोरियों में संजोये जा रहे हैं ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

चिंता नहीं चिन्तन करें

चिंता नहीं चिन्तन करें, धन जोड़े या घर जोड़े ।
माता-पिता के साथ रहें या उनको छोड़ अकेले रहें ।
बच्चों को कामयाब बनायें या उनको अपने पास रक्खें ।
पढ़ाना है गर उनको दूर तब उनसे रहें ।
अच्छी कमाई वाली नौकरी करानी है तो अकेले रहें ।
जमाना चला गया जो बापदादो की खेती थी।
बड़े बड़े बाग बगीचे और सैकड़ों बीघे जमीन थी।
आज पुस्तैनी खेती बंटकर टुकड़ों में बिखर गया है ।
बाबा के कुनबे अब बीस कुनबो में बंट गया है ।
घर से बाहर नहीं निकले तो खायेंगे क्या ।
पढेंगे लिखेंगे नौकरी करने बाहर जाना ही होगा।
परिवार माता-पिता और नौकरी में तालमेल बैठाना ही होगा।
बच्चों को घर से बाहर रहकर परिवार चलाना ही होगा ।
बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करनी ही होगी ।
बुढ़ापे में उन्हें साथ रखकर सेवा करनी ही होगी ।
समय की मांग है समय के साथ चलनी ही होगी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सबला तू तो है सदा

नारी तू है नारायणी,अधिकार तुमको है सदा ।
समाज व परिवार से, आशीर्वाद ईश्वर का सदा ।
तुम सदा संपूर्ण थी और रहोगी ही सदा ।
पुरुष भी पलते तुम्हारे, आँचलो में ही सदा ।
मर्म समझा है नहीं, नारायणी का वो सदा ।
दुर्भाग्य है समाज का, जो अपमान करता है सदा।
हे नारी तू है नारायणी, सबला तू तो है सदा ।
धिक्कार उस परिवार को, जो छल रहा तूझको सदा ।
पर पूजते संसार में हैं, देवियों को वो सदा ।
शक्ति रूपा है तू दुर्गा, विद्या रूपा सरोस्वती काल रात्रि कालिका तू, लक्ष्मी तू धन की देवी ।
तीनों देव हैं साथ तुम्हारे, तेरे बिन वो सदा अधूरे ।
नर से बढ़कर नारायणी तू, हम तो हैं बस बालक तेरे ।
नारी तू है नारायणी, नमः नमो हे मातेश्वरी ।
नमः नमो हे मातेश्वरी, नमः नमो हे मातेश्वरी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

मिट्टी के खिलौने

ये जिंदगी फूल और पत्थर की है कहानी ।
बचपन हमारा फूल है पत्थर है जवानी ।
बचपन का खिला फ़ूल बिखरकर जवानी बनी।
घिस घिस कर जवानी एक कहानी बनी।
फूल थे कभी समय के हिलोरे से पत्थर बने ।
जीवन के अंतिम समय में न फूल रहे न पत्थर रहे ।
हम तो मिट्टी के खिलौने थे मिट्टी से मिले ।
मिट्टी के खिलौने थे मिट्टी से मिले ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो

मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो,
री मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ।
भोर भयो गैयन के पाछे मधुवन मोही पठायो।
कानन में दिन खेल बितायो, साँझ भये घर आयो।
री मैया मोरी मैं कब माखन खायो ।
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको कछु विधि पायो।
री मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ।
ग्वाल बाल सब बैर परों हैं, बरबस मुख लपटाओ।
री मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ।
सब गोपियन मोहे बहुत सतयो,
नहीं यशोदा के  लाल तू जायो। कही कही मोहे चिढ़ायो।
मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ।
बलदाऊ हैं गोरे गोरे, कारो शाम तू गोद लिवायो। 
नहीं यशोदा के लाल तू जायो।

अब न रहूँ मैं साथ ये तोरो।
ले लो अपनी लकुटी कमलिया, बहुत ही नाच नचायो।
मैया मोरी मैं कब माखन खायो ।
री मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो ।
सूरदास तब बिहूसी यशोदा ले उर कंठ लगायो,
कन्हैया तू मैया के जायो, तू मैया के जायो ।

ललना तू नहीं माखन खायो । ललना तू नहीं माखन खायो ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मैं खेलाउ तेरा बेटा

बेटा बेटा मत कर सासु, अब तेरा बेटा मेरा है।
बेटा जब तक रहा कुँवारा, तबतक बेटा तेरा है।
व्याह भया मैं तेरी दुलहन , बेटा अब तो मेरा है।
सोच समझकर बोली सासु, हाँ अब बेटा तेरा है।
मेरी आँचल हुई पुरानी, तेरी आँचल नयी नयी ।
तू इस घर की रानी बिटिया, अब हम तेरी अम्मा हैं ।
ले संभाल तू इस बेटे को, और झुलाओ झूलो में ।
राग रागनी उसे सुनाओ और सुलाओ गोदी में ।
भूल न जाना इस अम्मा को, पाल पोस कर दिया है बेटा।
रखना साथ साथ ही हमको , मैं खेलाउ तेरा बेटा ।
मैं खेलाउ तेरा बेटा ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम