Monthly Archives: April 2017

शादी की तैतालिसवीं वर्षगांठ

साल तैतालिस बीत गयी है, साथ साथ मिल रहने का।

पाँच मई सन चौहत्तर को, साथ मिला था साथी का।

सताईस साल थी उमर हमारी, सतरह की वो आयी थी।

रूप रंग की गोरी छोरी, नयन नक्श क्या पायी थी।

पायल की संगीत सदा ही, घर में गूंजा करती थी।

बात बात में जोर जोर से, हँसी बिखेरा करती थी।

हँसते गाते चार साल यों,  बीत गया कैसे दिन वो।

एक साथ सौगात ले आयी, दो परियों को रानी वो।

प्यार हमारा और बढ़ गया, तीन बरस ऐसे ही चल गया।

घर को रौशन करने आया, बहना का भाई जो आया।

हो गया था पूरा परिवार, बेटा बेटी घर संसार।

बच्चों की दुनियां में खो गये, उनकी ही सेवा में रह गये।

भूल गया था अपने को भी, पढ़ लिख कर वो बड़े हो गये।

आज न उनकी चिंता हमको, वे सब रहते अपने घर में।

 हम भी अब आजाद पंछी हैं,  रहते हम अपने इस घर में।

बेटा बेटी नाती नातिन से, भरा हुआ है घर अपना।

 खुशियाँ ही खुशियाँ है घर में, महफिल भी है याराना।

आज आप सब आये मिलने, घर में देवों का आना।

स्वागत है सब यारों का, आप सबों का घर आना।

मिले आप सब की शुभकामना, और नहीं कुछ है कहना।

और नहीं  कुछ है कहना।

जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

कविवर दीनकर

नमन तुझे है हे कविवर,

नमन तुझे है हे मान्यवर।

दीनकर नाम नहीं है केवल ,

तू सचमुच ही हो दीनकर।

किया उजाला हिंदी भाषा ,

प्राण फूक कर अमर किया।

सदियों तक ये याद रहेगी,

देश को जो ये तूने दिया।

हिंदी को सौभाग्य मिला था,

दीनकर जैसा लाल मिला था।

अमर क्रीति सब काव्य तुम्हारा,

हिंदी का सरताज ये प्यारा।

धन्य धन्य हम भारत वासी,

धन्य धन्य हैं हिंदी भाषी।

धन्य धन्य हैं हिंदी भाषी।

जयहिंद।

Believe in God

An eight-year-old child heard her parents talking about her little brother. All she knew was that he was very sick and they had no money left. They were moving to a smaller house because they could not afford to stay in the present house after paying the doctor’s bills. Only a very costly surgery could save him now and there was no one to loan them the money. 
When she heard her daddy say to her tearful mother with whispered desperation, *Only a miracle can save him* now’, the little girl went to her bedroom and pulled her piggy bank from its hiding place in the closet. She poured all the change out on the floor and counted it carefully. 
Clutching the precious piggy bank tightly, she slipped out the back door and made her way six blocks to the local drugstore. She took a quarter from her bank and placed it on the glass counter. 
“And what do you want?” asked the pharmacist. 
“It’s for my little brother,” the girl answered back. “He’s really very sick and I want to buy a *miracle* 
“I beg your pardon?” said the pharmacist. 
“His name is Andrew and he has something bad growing inside his head and my daddy says only a miracle can save him. So how much does a miracle cost?” 
“We don’t sell miracles here, child. I’m sorry,” the pharmacist said, smiling sadly at the little girl. 
“Listen, I have the money to pay for it. If it isn’t enough, I can try and get some more. Just tell me how much it costs.” 
In the shop was a well-dressed customer. He stooped down and asked the little girl, “What kind of a miracle does you brother need?” 
“I don’t know,” she replied with her eyes welling up. “He’s really sick and mommy says he needs an operation. But my daddy can’t pay for it, so I have brought my savings”. 
“How much do you have?” asked the man. 
*One dollar and eleven cents*but I can try and get some more”, she answered barely audibly. 
“Well, what a coincidence,” smiled the man, “A dollar and eleven cents – the exact price of a miracle for little brothers.” 
He took her money in one hand and held her hand with the other. He said, “Take me to where you live. I want to see your brother and meet your parents. Let’s see if I have the kind of miracle you need.” 
That well-dressed man was Dr Carlton Armstrong, a *neurosurgeon*. The operation was completed without charge and it wasn’t long before Andrew was home again and doing well. 
“That surgery,” her mom whispered, “was a real miracle. I wonder how much it would have cost.” 
The little girl smiled. She knew exactly how much the *miracle cost*…. *one dollar and eleven cents … plus the faith of a little child*
Perseverance can make miracles happen! Miracle can come in various forms – as a doctor, as a lawyer, as a teacher, as a police ,as a friend, as a stranger and many others..
A river cuts the rock not because of its power, but because of its consistency.
Never lose your hope & keep walking towards your vision.
Somewhere I felt it has closely touched my life…… there’s a message for us all…..This kind of message has to be shared and please share this beautiful one. …👏

(As received from a friend)

The way to enjoy the life

If you want to enjoy your whole life ,

 you have to  follow the routine in life.

From the day you born till the last days.

This routine is made by the Almighty.

You are just to adopt it in your life.

Early to bed and early to rise.

Makes a man healthy wealthy and wise.

Drinking enough water on rising.

Brushing your teeth after every meal.

Walking in morning before sunrise.

Two to four miles with smiling.

Taking fresh vegetable and fruits.

Sproted cereals and hot milks.

Rich and heavy breakfast daily.

Normal lunch and light dinner.

A full glass of hot milk or water.

Before going to bed in night.

Doing yoga ,pranayama, regularly.

Thinking always positive in life.

Never quarrel with neighbors and friends.

Be polite with your family and friends.

Help the needy , poors and helpless.

Do your duties faithfully and honestly.

Don’t cheat others for your gains.

Remember always you are under watch.

 God is there every where to watch.

Pray to God every day for his kindness.

He has blessed us with knowledge.

He has blessed us with all comfort.

We are here to play our assigned role.

This very world is a big stage to act.

The day our assigned duties are over.

We will return to our eternal home.

We will be awarded with the great prize.

As per our performance in this world.

May be heaven or may born again.

Let us not born again and again.

To avoid it let us follow the routine.

Set up by  Almighty before we born.

Keep following and keep enjoying.

Every day every time in your life time.

It is never late, let us start today.

Come and join me in this very game.

Follow the routine of the God every day.

Follow the routine of the God every day.

Jaihind jaibhatat vandematram.

आप धीरे धीरे मरने लगते हैं

नोबेल पुरस्कार विजेता स्पेनिश कवि पाब्लो नेरुदा की कविता  “You  Start  Dying  Slowly” का हिन्दी अनुवाद…
1) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :

– करते नहीं कोई यात्रा,

– पढ़ते नहीं कोई किताब,

– सुनते नहीं जीवन की ध्वनियाँ,

– करते नहीं किसी की तारीफ़।
2) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, जब आप :

– मार डालते हैं अपना स्वाभिमान,

– नहीं करने देते मदद अपनी और न ही करते हैं मदद दूसरों की।
3) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :

– बन जाते हैं गुलाम अपनी आदतों के, 

– चलते हैं रोज़ उन्हीं रोज़ वाले रास्तों पे,

– नहीं बदलते हैं अपना दैनिक नियम व्यवहार,

– नहीं पहनते हैं अलग-अलग रंग, या

– आप नहीं बात करते उनसे जो हैं अजनबी अनजान।
4) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :

– नहीं महसूस करना चाहते आवेगों को, और उनसे जुड़ी अशांत भावनाओं को, वे जिनसे नम होती हों आपकी आँखें, और करती हों तेज़ आपकी धड़कनों को।
5) आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, अगर आप :

– नहीं बदल सकते हों अपनी ज़िन्दगी को, जब हों आप असंतुष्ट अपने काम और परिणाम से,

– अग़र आप अनिश्चित के लिए नहीं छोड़ सकते हों निश्चित को,

– अगर आप नहीं करते हों पीछा किसी स्वप्न का,

– अगर आप नहीं देते हों इजाज़त खुद को, अपने जीवन में कम से कम एक बार, किसी समझदार सलाह से दूर भाग जाने की…।

*तब आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं…!!!*
इस सुन्दर कविता के लिए नोबेल पुरस्कार विजेता, स्पेनिश कवि, पाब्लो नेरुदा का, बहुत-बहुत धन्यवाद

बिटिया रानी

गाँव की हो या शहर की,

 बेटी हो तुम हर घर की।

हँसती मुस्काती कली हो तुम,

स्वर्ग से टपकी परी हो तुम।

बाबूल के अंगना की तुलसी हो तुम,

कान्हा की प्यारी वो राधा हो तुम।

हँसती खिलखिलाती वो तितली हो तुम,

बांसुरी सी बजती  संगीत हो तुम।

सबके दिलों पर राज करती हो तुम,

ईश्वर की अनमोल ज्योति हो तुम।

बाबुल के घर को सजायी हो तुम,

बन लक्ष्मी घर आयी हो तुम।
हँसती फुदकती चिड़िया हो तुम,

भैया की सोन चिड़ैया हो तुम।

मैया  की गोदी की गुड़िया हो तुम,

बहना की प्यारी बहिनिया हो तुम।

सजना की अखियों की पुतली हो तुम।

दुनियाँ की अनमोल मोती हो तुम।

दुनियाँ की अनमोल मोती हो तुम।
जयहिंद, जयभारत ,वन्देमातरम।

माँ के लिए बेटे का दर्द

पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गया,

बुढ़ापे में अपनी गलतियों का एहसास हो गया।

दूध पिलाया जिसने छाती से निचोड़कर,

मैं निकम्मा कभी एक ग्लास पानी न पिला सका।

बुढापे का सहारा हूँ मैं , एहसास दिला न सका,

पेट पर सुलाने वाली को, मखमल पर सुला न सका ।

भूखी सो गई वह, बहू के डर से एकबार मांगकर,

मैं सुकुन के दो निवाले उसे खिला न सका ।

नजरें उन बूढी आंखों से कभी मिला न सका ।

वो दर्द सहती रही ,मैं खटिया पर तिलमिलाता रहा।

जो जीवनभर ‘ममता, के रंग पहनाती रही मुझे,

उसे दिवाली पर दो जोड़ी, कपड़े सिला न सका ।

बीमार बिस्तर से उसे ‘शिफा, दिला न सका ।

खर्च के डर से उसे बड़े अस्पताल, ले जा न सका ।

माँ के बेटा कहकर दम तोड़ने वक्त,

गंगा जल के दो बूंद भी पिला न सका।

उनके मरने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,

दवाई इतनी महंगी भी न थी, कि मैं ला ना सका ।

डर इतना था कि माँ के मरने पर भी,

उसे बाहों में भर, फूट फूट कर रो न सका।

मैं कैसे इतना नालायक हो गया था,

उसकी अर्थी को खुद कंधा दे न सका।

पर उसके मरने के बाद ,पूरी बिरादरी को,

चार चार मिठाईयाँ हँस हँस के खिला सका।

गाँव मुहल्ले में अब राजा बेटा कहलाता हूँ,

माँ की आत्मा आज भी हमें धिक्कारती है।

न दिन में चैन है ,न मन में शकून है मुझे,

हर वक्त माँ की रोती आँखें दीखती है मुझे।

सपने में भी माँ का गमगीन चेहरा दीखता है

तरप के ऊठ बैठता हूँ, पर माँ नजर नहीं आती है।

पश्चाताप से हर दिन जल रहा हूँ मैं ,

दुख से निजात पाने की हर कोशिश कर रहा हूँ मैं।

अपने ही गुनाहों की सजा भुगत रहा हूँ मैं,

नरक से भी बदतर जीवन जी रहा हूँ मैं।

आज हमारे अपने ही बच्चे दुतकारते हैं हमें,

वो भी तो वही कर रहा है हमारे साथ।

जो हमने किया था इन बच्चों के खातिर,

अपनी प्यारी अम्मा और बाबा के साथ।

उसने तो वही सब सीखा है बचपन से,

जो जो हमने उसे सिखाया है उसे जीवन में।

अभी भी देर नहीं हुई है, मेरे बच्चो,

कदर करो अपने माँ बाप की इस बुढ़ापे में।

मान सम्मान करो, सेवा करो उनकी,

दुख सुख में साथ रहकर दुआएं लो उनकी।

माँ बाप तो माँ बाप होते हैं भाईयो,

वे अगर कभी गुस्से मेंं गाली भी दे दे।

तो उसे उसकी दुआ समझ कर भुला देना ।

उसे दुआ समझकर भुला देना।

जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

रिश्ता

रिश्ता जो भी हो, मजबूत होना चाहिए ,

रिश्ता दिलों से हो, पर मजबूर नहीं हो।

रिश्ते भी वेल्डिंग की तरह हैं,

खूब जलना पड़ता है जुड़े रहने के लिए ।

खुदा ने सब को खूबसूरत बनाया है,

किसी को अच्छी सूरत देकर, किसी को अच्छा दिल देकर।

क़ायनात की सबसे महंगी चीज एहसास है,

जो दुनिया के हर इंसान के पास नहीं होता।

इंसान की आर्थिक स्थिति कितनी भी अच्छी हो,
लेकिन जीवन का सही आनंद लेने के लिए ।

उसकी मानसिक स्थिति अच्छी होनी चाहिए।

फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में,

फर्क होता है किस्मत और लकीर में।

अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना,

कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में।

कुछ चीज़े हम पुरानी छोड़ आए हैं,

आते आते उसकी आँखो मेंं पानी छोड़ आए हैं।

ये ऐसा दर्द है जो बया हो ही नहींं सकता,

दिल तो साथ ले आए धड़कन छोड़ आए हैं।

ठोकरें अच्छी है रास्तों की, रुकावटों का पता चलता है,

संभालने वाले हाथ किसके हैं , ये भी पता चलता है।

एक सांस सबके हिस्से से , हर पल घट जाती है,

कोई जी लेता है ज़िंदगी, किसी की कट जाती है।

जरूरी नहींं कि जिसमें साँसे नहीं वही मुर्दा हैं,

जिसमें इन्सानियत नहीं हैं ,वो कौन सा जिन्दा हैं।

समस्या का समाधान इस बात पर निर्भर करता है ,

कि हमारा सलाहकार कौन है, क्योंकि ये बहुत महत्वपूर्ण है, 

शकुनी सलाहकार था दुर्योधन का,

श्रीकृष्ण थे सलाहकार पार्थ अर्जुन का।

रावण का सलाहकार चाटूकार था,

और राम का सलाहकार खुद विभीषण था।

अतः चाटूकारों से दूर रहें, सज्जन मित्रों का सहयोग लें।

दुख सुख की छांव में आगे बढ़ते रहें,

जीवन का मर्म समझें, खुशी से जीवन जीते रहें।

तन और धन यहीं रह जायेगा,

करम और धरम ही साथ निभायेगा।

अतः नेक करम और धरम करें, खुद भी सुखी रहें, 

औरों को भी सुख देते रहें। औरों को भी सुख देते रहें।

जयहिंद,जयभारत,वन्देमातरम।

*अपनी और एक मित्र की रचना।*

Treatment heart attack

हार्ट अटैक से घबराने की बजाय करें कारगर उपाय

पीपल का पत्ता….99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है।

पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।

पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँचपर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।

इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

* पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।

* इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।

* खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें।

* प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।

* अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में 

भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें । 

तो अब समझ आया, भगवान ने पीपल के पत्तों को हार्टशेप क्यों बनाया..

( शुभेच्छु :- गोवंश रक्षा पदयात्रा ) जनहित में शेयर करना ना भूले…..

मायूश न हो मेरे दोस्त

परिंदे तो परिंदे होते हैं मेरे दोस्त,

उनका बसेरा माँ का घोसला नहीं,

खुला आसमान होता है।

पर इनसान इनसान होकर भी ,

अपना घर बार भूल जाता है।

खुद माँ बाप बन जाने के बाद,

अपने बूढ़े माँ बाप को भुला देता है।

यह खुदगर्जी है पर हकीकत भी,

जो रात भर रौशनी देती रही हमें,

सुबह होते ही शमा हम बुझा देते हैं।

कदर करता है इनसान चमकते सूरज का,

डूबते सूरज पर बेहतर चिराग होते हैं।

यही हकीकत है इस जिन्दगी की,

वक्त पर दुश्मन भी प्यार करते हैं।

तन्हाई में भी शकून मिलता है हमें,

गर उस वक्त खुदा हमारे साथ होते हैं।

मायूश न हो मेरे यारो इस उम्र में,

ईश्वर हर वक्त हमारे साथ होते हैं।

याद करते रहो अपने अजीजों को,

वो तो सदा तुम्हारे साथ होते हैं।

वो तो सदा तुम्हारे साथ होते हैं।

जयहिंद, जयभारत,वन्देमातरम।