Monthly Archives: April 2019

हरि संग बैठो आज

अजहु न आयो बालमा सावन बीतो जात।

सखी री सावन बीतो जात।

निशि दिन जोहू बाट पिया की, दर्शन नहीं दिन रात ।

थक गयी अंखिया आस लगायो, पिया नहीं मिलयो आज।

सखी री हरि बिन हमहूं उदास । सखी री हरि बिन हमहूं उदास ।

कहे सुरेश जन हितकारी, बनिहे बिगड़ी बात ।

सखी तू काहे को होत उदास ।

सखी सब हरि संग बैठो आज ।

सखी री हरि संग बैठो आज ।

सखी री हरि संग बैठो आज ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

धरती स्वर्ग से प्यारी

धरम ही आधार जगत का, धरम ही पतवार जगत का।

धरम करम है जीवन धन का, धरम हमारा परहित जन का।

मान सम्मान धरम है जग का, दुख सुख में है साथ धरम का।

कोई बड़ा नहीं कोई छोटा, सभी बराबर सब धर्मों का।

एक गुरूननक एक ही रामा, एक येशू है एक रहीमा।

नानक दुखिया सब संसार, एक ही सबके तारन हार।

कहाँ बसे संतन सब साईं, कहाँ बसे रघुवर गोसाई ।

काशी काबा वेटिकन जाना, बेथलहम और कहाँ मदीना।

अलग नाम और धाम अलग है, सबके सब यह है अशियाना।

जनमानस शाही फकीर सब, राजा रंक भिखारी ।

एक जगह सब हुए बराबर, चार कंधों पर भारी ।

मिट्टी नीचे दबे हैं कोई, जले आग के ऊपर कोई ।

नहीं किसी का महल अटारी, और न सेवक चारी।

कहे सुरेश सब सज्जन से, कौन धरम पे भारी।

बृथा गवायो जीवन सारा, धरम धरम कर मारी।

जीते जीवन धरम न जानो, मानव प्रेम धरम पे भारी ।

धरम एक ही इस धरती पर, मानव धरम हमारी।

मिलजुलकर इनसान बसे जग, धरती स्वर्ग से प्यारी।

गुणीजन धरती स्वर्ण से प्यारी, जहाँ पर प्रेम की भाषा न्यारी।

गुणीजन धरती स्वर्ग से प्यारी, जहाँ पर प्रेम की भाषा न्यारी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

शादी की पैतालीसवी साल गिरह

आज हमारे नाना जी से साथ मिलीं थी नानी जी,

आज के दिन ही नाना नानी बने थे जीवन साथी जी।

आज मनाने पैंतालीसवी शादी वाली सालगिरह।

नाना नानी हमें बताते अपनी प्यारी बात पुनः ।

छब्बीस साल के नाना मेरे नानी अठरह साल की।

देख भाल के माँ बाप ने मंगनी कर दी आपकी।

दुल्हन बनकर नानी मेरी आ पहुँची ससुराल जी।

जेठानी ने पैर धुलाकर करी आरती आपकी।

सासु माँ ने घूँघट खोला ली बलैया आपकी ।

सुखी रहे घर वार तुम्हारा महके अंगना आप की।

सन चौहत्तर मयी महीना तारीख वो थी पाँच की।

बीत गये अब सालों साल, नाती नातिन आपकी।

खेले गोद में बड़े हो गये, स्नेह मिला है आपकी ।

आज आपके लिये जुटे हम, आशीष लेने आप की।

मन्नत माँग रहें ईश्वर से, साथ आप का बना रहे।

सालों साल हम खुशी मनाये, नाना नानी स्वास्थ्य रहें।

आशीष आप की बनी रहे, हम हँसते गाते साथ रहें।

हम हँसते गाते साथ रहें, हम हँसते गाते साथ रहें।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

हे सुबह तम्हें है नमन हमारा

हे सुबह तम्हें है नमन हमारा,
फूल खिलाना हर आँगन में ।
हर चेहरा हर्षाते रहना,
सूरज के स्वर्णिम किरणों में।
सबको अपने साथ जगाना,
भेद नहीं करना अपनों में।
महल अटारी झोपड़पट्टी,
सबके सब को रखना संग में।
सुबह शाम दिन रात सुहानी,
करना सबको सुखी जीवन में।
हे सुबह तम्हें है नमन हमारा,
सारे जग को हर्षित करना ।
सारे जग को हर्षित करना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

लेखक व कवि

वो लेखक जो बिक जाये चन्द रुपयों के लिये ।
वो कवि जो करे गुणगान चन्द रुपयों के लिये ।
आत्मा मरी हुई है उनकी चन्द रुपयों के लिये ।
बिकती है वैश्या भी हर रोज चन्द रुपयों के लिये ।
वो भी बेचती है अपना देह चन्द रुपयों के लिये ।
पर नहीं बेचती अपनी आत्मा चन्द रुपयों के लिये ।
ये लेखक और कवि गिरे हुए हैं चन्द रुपयों के लिये ।
उन बाजारू औरतों से भी गिरे हैं चन्द रुपयों के लिये ।
बेच रहे हैं अपनी आत्मा खुलेआम चन्द रुपयों के लिये ।
ये समाज और देश की हालात बयां करता है ।
आत्मा बेचकर पेट पालता है चन्द रुपयों के लिये ।
आत्मा बेचकर पेट पालता है चन्द रुपयों के लिये।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

राष्ट्र भक्त पन्ना धाय

खेद बहुत होता है भाई, पढ़कर तुमहरे लेख को।

कविता पाठ किया है तुमने, या बकवास किया तुमने ।

आँखों का पानी मर गया है, या नहीं ऑख में पानी है ।

पन्ना धाय माँ से बढ़कर वो, कुवँर की जान बचाई है ।
पुत्र प्रेम से बढ़कर उसने, राष्ट्र धरम निभाई है ।

गर्व है जिस माता के ऊपर, उसको दोषी दिखलायी है।

सारा राष्ट्र गर्वित है जिस पर, उसे कलंकित तुमने की है ।

राष्ट्र द्रोही और देश द्रोही का, घृणित कार्य तुमने की है ।

माँ की ममता को गाली देकर, उसे कलंकित तुमने की है ।

उसे कलंकित तुमने की है ।

उसे कलंकित तुमने की है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

स्वार्थी संसार

जब से होश संभाला मैंने ,
घर बाहर और सभी जगह पर ।
अपने अपने सभी लोग ही,
अपना स्वार्थ सिधारा है ।
बच्चे अपनी स्वार्थ के खातिर,
अपनी बात मनाने खातिर।
जिद करके फिर हठ करके वो,
रो धोकर करके सर पटक कर ।
आखिर बात मनवा ही लेते,
घर वाली भी नहीं चुकती,
अपनी बात मनवाने में ।
लार प्यार से हॅसते हॅसते,
और नहीं तो धमकी देकर ।
रूठ जाती या रौद्र रूप में,
माँ चंडी का रूप दिखाकर ।
पीया कहाँ वो पीछे रहते,
पत्नी से वो प्यार जताकर,
लोभ और कुछ लालच देकर ।
ऑख दिखाकर और डराकर,
आखिर बात मनवा ही लेते ।
पास पड़ोसी रिश्तेदार भी,
अपना काम करवाने खातिर।
चापलूसी कर मायूस होकर,
गिरगिट जैसा रंग बदलकर ।
अपना काम सधा ही जाते ,
सारी दुनिया रंगी हुई है,
चापलूसी और स्वार्थ में ।
गुजर गयी अब उम्र हमारी ,
इस स्वार्थी संसार में ।
अब इस स्वार्थी संसार में ।
अब इस स्वार्थी संसार में ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

अपने भी गैर जब होते हैं

गैरे तो गैर ही होते हैं,
पर अपना गैर जब होता है ।
गैरौ का रूठना उनका भूलना।
ये नहीं मायना रखता है।
पर अपने ही जब रूठ जाये,
तो दिल अपना भी टूटता है ।
जिन अपनों के लिये सदा,
हम भाग दौड़ करते आये ।
वह हमें भुला कर रूठ गया,
वह हमें अकेला छोड़ गया ।
वह हमें अकेला छोड़ गया ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

पावन पर्व प्रथम अप्रैल

यह दिवस हमारे जीवन का,

खुशियों से भरा त्यौहार है जी।

इस दिन हम सबको मिल करके,

नूतन नव-वर्ष मनाना जी ।

ये ओछी चाल थी गोरों की,

जिसने हमको बहकाया है ।

भारत की शान मिटाने को,

इसे अप्रैल फूल बनाया है ।

यह जनम दिवस है उन सबका,

जिसने यह देश बनाया है ।

इसी दिवस को ब्रह्मा जी ने,

करी शुरूआत थी सृष्टि की।

प्रभु राम का जन्म दिवस है,

विक्रमादित्य का राज्य स्थापन।

आर्य समाज स्थापना दिवस है ,

सिक्खों के गुरु श्री अंगद जी का,

जन्म दिवस का पावन दिन है ।

सिन्धी के भगवान सिन्ध में,

झूलेलाल जी प्रकट हुए थे ।

माँ शक्ति नवदुर्गा जी का,

आज के दिन ही पहला पूजन है ।

महाभारत के सम्राट युधिष्ठिर,

राज्याभिषेक का मंगल दिन है ।

महर्षि गौतम मान्य पुरुष का,

पावन दिन यह जनम दिवस है ।

त्रितु वसंत का पवन दिन यह,

लेकर आता पुष्पित पल्लवित।

शीतल बहती है बयार जब।

कोमल कोमल पत्ते डोले ।

डाली पर जब कोयल बोले ,

कानों में मिश्री सा घोले।

फूलों से महके संसार ,

दिशा दिशाऐ महक रही है ।

भारत माँ की इस धरती पर ,

कोयलिया भी कूक रही है ।

भारत के इस पुण्य भूमि का,

कैसे मिटा ये गौरव गान।

अंग्रेजों ने चाल चली थी ,

मिटा दिया इन सबका ग्यान ।

बहका करके हमलोगों को,

पावन पर्व को तोड़ मोड़ कर,

इसको अप्रैल फूल बनाया।

हम सबको ऐसे बहकाया ।

आज से हम सब नहीं मनाये,

अप्रैल फूल अब प्रथम दिवस पर ।

अपना पावन पर्व मनाये,

भारत देश की शान बढाये।

अपना पावन पर्व मनाये ,

भारत देश की शान बढाये ।

भारत देश की शान बढाये ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।