Monthly Archives: January 2019

कभी मिलते भी रहें पल दो पल

स्नेह से ओत-प्रोत ये घर,

वट-वृक्ष के नीचे पूरा परिवार ।

प्यार और दुलार से सराबोर,

हमारे मित्र का यह संसार ।

घनी घनी डालियों के बीच,

छोटे बड़े रसीले फल।

कुदरत से दुआ है हमारी,

हॅसते मुस्कुराते रहें हर पल।

सुरेश की आशा है मित्र से,

कभी मिलते भी रहें पल दो पल।

कभी मिलते भी रहें पल दो पल ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

हीरा

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग ।
कीचड़ बीच खिले कमल, कीचड़ लगे नहीं अंग।
साधु नहीं मैले भयो, जो दुर्जन बैठे संग।
तैरत है पानी के उपर, तेल न मिलयो संग ।
भैया तेल न मिलयो संग, हीरा बैठे काँच संग,
क्यों कर खोये रंग, भैया क्यों कर खोये रंग ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सुप्रभातम

दूर अंधेरा कर देती है,

रोज सुबह सूरज की किरणें ।

गम को कोशों दूर भगाकर,

खुशियाँ भर देती हैं दुआएं।

दुआ मित्र की वो औषध है,

विष भी अमृत हो जाती हैं ।

कहे सुरेश सभी मित्रोंको

दूध मिले जब मिश्री संग को।

सुख दुःख में मिलते हैं साथी,

सूरज के संग जैसे बदली।

सूरज के संग जैसे बदली।

सुप्रभातम सुप्रभातम सुप्रभातम।

Feel the joy

Keep the smile, leave the tension.
Enjoy your pension, laugh with friends.
Feel the joy, forget the worry.
Play like kids, always be happy.
Hold the peace, leave the pain.
Hold the hand, together with your wife.
Keep laughing, keep enjoying.
Forget your past, live with present.
Be liberal with everyone, make others to laugh.
Never keep I, we make us laugh.
Pray to God, for your happy days.
Never complain for sadness, Remember you are the best.
Family and friends, are the only help.
You and me always be friends. You and me always be friends.
Jaihind jaibharat vandemataram.

फिर भी अनमोल हैं हम

पुराने स्वेटर की वेदना सुन,

आखें हमारी भर आयी है ।

बक्से में पड़े पड़े दम घुटता है,

बाहर निकालें किसी का काम आऊँ।

बुजुर्ग माता-पिता के अरमान,

बच्चों ने कुचल कर रख दी है।

तप तप कर जला था जिसे संवारने में,

वही आज तिल तिल कर जला रहा है।

रोटी पानी के लिये तरसा दिया है,

बुढ़ापे में चारपाई पर सिमट गया।

सहारा के बिना उठ नहीं पाता,

और सहारे के लिये तरस गया।

लाख कमाया था दौलत हमने,

सब लूट ले गया हमारा अपना ही।

फरियाद किससे करूँ मैं,

तन के टुकड़ों को सजा देने की।

दुआ सुरेश करता है अपने खुदा से,

सूकून से दुनिया छोड़ने की।

खुश रक्खें उस ना शुक्रे को,

जो माँ बाप का दिल दुखाया है।

पुराने जरूर हो गये हैं हम,

फिर भी अनमोल हैं हम।

फिर भी अनमोल हैं हम।

फिर भी अनमोल हैं हम।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

दीदार हो हम सफ़र का

बातों बातों में कह दी सारी बातें।

निगाहों ही निगाहों में कह दी सारी बातें।

न तीर चली न तलवार चली।

कत्ल हो गये बिना खंजर के ही।

शुक्र है उपर वाले की हम पर,

फिर भी सही सलामत हैं हम।

कछ ऐसा ऐहसान करें हम पर।

नसीब हो हमारे नसीब से बढ़कर ।

दीदार तो हो कभी हमसफ़र का।

जन्नत नसीब हो जाये इस जमीं पर।

अता फ़रमाते हैं खुदा से,

साथ साथ रहने की रहम कर दे।

साथ साथ रहने की रहम कर दे।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मेरे देश की धरती

हम सबका देश की धरती से,

जनम जनम का नाता है।

ये भारत देश हमारा है,

हमको प्राणों से प्यारा है।

धरती नदियों का देश यह प्यारा,

सारे जग से यह न्यारा है ।

यह भारत देश हमारा है ।

यह भारत देश हमारा है ।

हिम छादित शिखर हिमालय जिसका ,

बहती गंगा जल धारा है ।

शदियो से यह देश हमारा,

वीर भोग्या वसुंधरा है ।

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई,

बौद्ध जैन सब भाई भाई ।

मिलजुल कर सब रहते एक,

एक तरू की नीचे छाँव में ।

जैसे रहते पशु अनेक।

ये देश हमारा प्यारा भारत,

माँ के आँचल सा प्यारा है ।

ये भारत देश हमारा है ।

ये मातृभूमि है देश हमारा,

मातृ वंदना करते हम।

जन जन सुखाय का नारा है,

यह भारत देश हमारा है ।

गर्वित हैं हम देश के वासी,

जनम जनम का नाता है ।

यह देश हमारा प्यारा भारत।

हमको प्राणों से प्यारा है ।

वतन हमारा जान से प्यारा ।

भारत देश हमारा है ।

यह भारत देश हमारा है ।

यह भारत देश हमारा है ।

वंदेमातरम वंदेमातरम वंदेमातरम ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

पडोसन

साथ पड़ोसन बैठी बाग में ।
रिमझिम रिमझिम बारिश में ।
एक छतरी के नीचे दोनों ।
सट के हमसे साथ पड़ोसन ।
बातें करते करते दोनों ।
भूल गये घर भी जाना है ।
शाम अंधेरा होने आया ।
घर को तब जाने को आया ।
हॅसकर वो बोली तब हमसे ।
आज गधे के संग बिताया ।
घास पड़ी थी पास गधे के ।
मूरख वह खा भी न पाया ।
मैं जब तक ये बात समझता ।
टाटा कर वह मुस्कायी।
हाथ हिला कर ऑख मारकर।
कमर इठला कर चली गयी ।
वह आख मारकर चली गयी ।
वह ऑख मारकर चली गयी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।