Monthly Archives: January 2016

जय भारत

जय जय भारत देश हमारा,दुनियॉ में यह न्यारा है

धरती प्यारी अंबर प्यारा,प्यारी प्यारी बगिया है

हरे भरे हैं खेत हमारे ,बहती प्यारी नदियाँ है

फल पुलों से भरी हुई ये,बाग़ बग़ीचे न्यारे हैं

खेत भरे सोने चाँदी से,मकई धान व बाजरे हैं।

गेहूँ लहराती खेतों में,फूली सरसों पीले हैं

कहीं लरजते चने खेत में,कहीं ये अरहर पीले हैं

फल फूलों से भरी बादिंयॉ,सेबों के बाग़ हमारे हैं

अमरायी में अाम लदे हैं,कोयल गाते गाने हैं

लीची केलों के भरे बाग़ हैं,सजे बग़ीचे नींबू के

यहाँ अनार चीकू मौसम्मी,पेड़ भरे हैं बेरों के

छोटे बड़े पेड़ पर लटके,झूला झूले नारियल हैं

बड़े बड़े कटहल भी लटके,बेल शरीफ़े पेड़ों पर

आँवला से है भरी टहनियॉ ,हरे भरे मोती सी नूर

भरे बाग़ संतरा के मीठे,पके पपीते चमके दूर

अंगूर की है बात निराली,भरे बग़ीचे गुच्छों से

हरे हरे या काले गुच्छे,लटके मधु के छत्ते हैं

सूखे फल से भरी मंडिंयॉ ,क्या कहने इन मेवों की

चाय हमारी न्यारी जग में,ख़ुशबू है इन कहबों की

आलू का भंडार यहाँ पर,प्याज़ रसीले मेरे हैं

गोभी बैगन फूल टमाटर,घीया तोरी लौकी भी

हरा भरा बन्दगोभी प्यारा,अरबी सूरन मूली भी

पत्तों में है प्यारा पत्ता,धनिया पालक मेथी की

चौलाई है लाल हरी भी ,ख़ुशबू भरी पुदीने की

छोटे परवल और करेला ,खीरा कंकरी भिण्डी भी

बड़े बड़े काशी फल पीले,तरबूज़े संग लौकी भी

मिर्च मसाले बहुत निराले ,अदरक हल्दी सूखा सोंठ

तीखी मिर्ची लाल हरी है,काली मिर्ची गोलकी गोल

ज़ीरा सोया अजमइन भी,इलायची यहाँ बड़ा अनमोल

मेरा प्यारा देश हमारा ,फल फूलों से भरा भरा

नहीं यहाँ रहने की मुश्किल,नहीं यहाँ खाने की मार

नदियॉ बहती भरे नीर की,बरसों बरस पानी भरमार

जंगल इसकी हरी भरी है,जंगली पशुओं की भरमार

चीतल चौकड़ी करती फिरती,शेर हमारे हैं मेहमान

हाथी हथनी मस्त घूमते,बाघ नहीं इतना अनजान

भालू बंदर मिल कर रहते,सुअर साही संग नीलगाय

मोर मोरनी तीतर फिरते,हंस हंसनी वत्तक भी खाश

बाज़ कबूतर तोता मैंना,गिद्ध चील उड़ते आकाश

जय जय भारत देश हमारा,जय जय हो जन जीवन का

जय जय हो हर नव विहान का,जय जवान हो जय किसान का

जय हो भारत के मंगल का,जय सुरेशमधु जय भारत का

जय हो जय हो जय भारत का

बिरहनी

डर लागे सखी री अँगना में,डर लागे मोहे घर अँगना में

सैंयां गइल परदेश छोड़ मोहे अँगना में,कैसे कटी री दिन अँगना में

काली कोयलिया कूहकत डलिया,हुक उठेला मोरी मनमा में

डर लागे सखी री मोहे अँगना में

बीतल बरस आयल नहीं सैंयां ,कैसे कटी री दिन अँगना में

सून मोरी सेजिया सूनी अंगनमा,घर सूनी नहीं गोदी ललनमा

,याद सतावे मोहे सजना के,मन में पीड़ उठत सखी सजना के

सासु नहीं बोले ननद नहीं बोले,देवरा सतावे सखी अँगना में

डर लागे मोहे घर अँगना में ,पी की याद रूलावे सखी अँगना में

डर लागे मोहे घर अँगना में

ललना

अँगना में पलना पलने में ललना,खेलत री सखी पलना में

पलना में सखी झूलत ललनमा,झूला झूलत सखी अँगना में

पलना में खेला खेले सखी ललना,खेलत री सखी अँगना में

गिरत उठत फिरे मोर ललन सखी ,ठुमक ठुमक के अँगना में

पैरों में बाजे पैंजनिया ललन के ,हे सखी अँगना में
बाबा संगे खेले ललन सखी,ठुमक ठुमक री अँगना में

पलना में झूलत मोर ललन ,झूला झूलत सखी अँगना में

अँगना में पलना पलने में ललना,झूला झूले री सखी अँगना में

झूला झूलत सखी अँगना में

प्यारा बंधन

जो बंधन बिन बाँधे ही,बँधता विधि विधान से

जिस बंधन से बँधकर सारा,फलता फूलता है संसार

उस प्यारे बंधन से बँधकर,सुखी सदा रहता संसार

बंधन जननी से बेटे का,बंधन पिता संतान का

बहन से बंधन है भाई का,बंधन गुरू से ज्ञान का,

बंधन है उसे उस माटी से,जिस पर जन्मा है इन्सान 

बंधन है उस घर आँगन से,जिस घर में वह बड़ा हुआ

बंधन उसका उस समाज से,जिसने उसे आधार दिया

बंधन है उस धरती मॉ से,जिसके बल वह खड़ा हुआ

अगर ये टूटा प्यारा बंधन,मिट जायेगा यह संसार

मॉ बेट न भाई बहना, न पिता रहेगा न ये प्यार

अपनी मिट्टी अपनी धरती,अपने वतन से करना प्यार

बंध कर रहना इस बंधन से,बिन बाँधे ही अपने मन से

कहे सुरेशमधु नये युगल से,नव बंधन का रखना मान

सारा जीवन बंध कर रहना,सुख शांति का रखना ध्यान

सुख शांति का रखना ध्यान

औरत

माँग टीका सजाये ,भाल बिंदिया लगाये

नयना काजल से काली,ओठ लाली सजाई

गले मोतियों की माला ,तन पे सोहे दुशाला

झीनी रेशम की साड़ी ,संग बलमा अनाड़ी

पैर पायल  बजाये ,हाथ कंगना खनकाये

वो जो प्यारी सी ठारी ,मॉ ,बहन,बेटी है नारी

है वह सुन्दर सलोनी,सखी सजनी किसी की

माँग सीधी सँवारे ,भाल टिकुली लगाये

नयना कजरा बिनु काली, ओठ लाली बिनु लाली

गले माला बिनु ख़ाली,तन चिथड़ों से ढांकी

पैर कीचड़ में सानी ,हाथ चुड़ी कॉच की

माँग सिन्दुर  सजाये ,सिर पे टोकर भार की

गोद प्यारा सा छैला ,ढकी अचरा वह मैला

वो भी बहना है प्यारी ,मॉ ,बेटी,सखी ,सजनी

वह दोनों ही है औरत,पर अलग है उनकी सूरत

है अलग उनकी पहचान ,अलग उनकी मान है

अलग है रहन सहन ,अलग उनकी शान है

पर है दोनों ही औरत,वह हमारी ही मॉ है

बहन बेटी सखी सजनी है,यही उनकी पहचान है

वह तो बस एक औरत है ,वह एक औरत है

वह एक औरत है

आशीरवाद

तुम दोनों के ये फूल प्यारे प्यारे,तेरे बाँहों में चमकते सितारे

पापा मम्मी तुम्हें है पुकारे,भोले नटखट हैं राज दुलारे

बबुआ आशीष तुम्हें है हमारे,बगिया के ये फूल न्यारेन्यारे

बाबा अम्माँ  के राज दुलारे,तुम बढ़ते रहो मेरे प्यारे

चाँद सूरज सा चमको दुलारे,तुम खिलखिलाते रहो मेरे प्यारे

बबुआ आशीष तुम्हें है हमारे,आशीष तुम्हें है हमारे

जन्म दिन मुबारक हो,जियो बरस सौ साल

ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ मिले,तुम जिओ हज़ारों साल

तुम जिओ हज़ारों साल

जीवन का सत्य

सपने तो सपने होते हैं ,सपने क्या अपने होते हैं

सपने में हमने क्या पाया ,सपने में हमने क्या खोया

सपना तो केवल सपना है,सपना तो केवल सपना है

सपना में पाना सपना है,सपना में खोना सपना है

सपने से हमने सीखा है,सपने जीने की रेखा है

यह जीवन भी तो सपना है ,जो यहाँ न कोई अपना है

सपना तो केवल सपना है ,सपना तो केवल सपना है

जीवन में आते अपने हैं ,जीवन भर साथ निभाते हैं

जीवन के बाद तो अपने भी ,सपने की तरह खो जाते हैं

फिर सपने और इस जीवन में,सच्चा तो केवल सपना है

सपना तो केवल सपना है,सपना तो केवल सपना है

मॉ बाप सगे भाई बहना,बेटा बेटी नाती पोता

पत्नी भी साथ नहीं चलना,ये जीवन भी तो सपना है

सपना तो केवल सपना है ,सपना तो केवल सपना है

ये महल अटारी चौबारे,गाड़ी बंगला ये अपने हैं

सोने चाँदी मोती माला,हीरों से जड़े ये गहने हैं

जीवन भर साथ निभाते हैं,जीवन के बाद ये सपने हैं

फिर सपने और इस जीवन में,सच्चा तो केवल सपना है

सपना तो केवल सपना है,सपना तो केवल सपना है

सपनों की तरह ही भुलनेमें,जीवन की यह सच्चाई है

अपने और पराये भी ,जो नाता नहीं निभायी है

सपने तो सपने होते हैं,पर अपने भी सपने होते हैं

सपना तो केवल सपना है,अपना भी अपना सपना है

अपना भी अपना सपना है

झूमर गीत

अँगना बोढ़त सखी आईल मोरा देवरा,अँगना में कंगना हेराय गइल हो

सखी अँगना में कंगना हेराय गइल हो

ओसरा बोढ़त सखी अइली देवरानियाँ ,ओसरे पे झुमका भुलाय गइल हो

सखी ओसरे पे झुमका भुलाय गइली हो

सेजिया पे सैंया करेला जोड़ा जोड़ी,सेजिया पे नथुनी घुमाय गइल हो

सखी सेजिया पे नथुनी घुमाय गइल हो

सासु गरिइहें ननद गरिइहें,ससुरा न करिहें दुलार सखी हो

अँगना में कंगना हेराय गइल हो सखी,ओसरे पे झुमका भुलाय गइल हो 

सखी सेजिया पे नथुनी घुमाय गइल हो 

कहॉ पाइव झुमका और कहॉ पाइव कंगना,कहॉ पाइव नथुनी जोड़ीदार सखी हो

देवरा संग कंगना देवरानियाँ संग झुमका,सैंया संग नथुनी जड़ीदार सखी हो

अँगना में कंगना ओसरेवे पे झुमका,सेजिया पे नथुनी घुमाय गइली हो सखी

अँगना में कंगना हेराय अइली हो सखी अँगना में कंगना हेराय अइली हो

दोषी

दोष नहीं है इन बच्चों की ,दोषी पालनहार है,अच्छी शिक्षा अच्छी बातें नहीं दिया संस्कार है

बड़े बूढ़ों और प्रिय जनों से,नहीं सिखाया करना प्यार,मिल जुल रहना बॉट कर खाना,नहीं सिखाया प्यार दुलार

पलने से ही सिखलाया है,उसको उड़ना ऊँची उड़ान,नहीं बताया उसे कभी वो,जीवन जीना नहीं आसान

रात दिन मेहनत करते वो,नहीं समय दे पाते हैं,उनको पढ़ने और पढ़ाने,नाते ख़ूब कमाते हैं

नहीं उसे फ़ुर्सत कमों से ,काम ही उनका जीवन है,रात और दिन ख़ूब कमाना,नहीं सुखी ये जीवन है

ख़ूब कमाया ख़ूब जमाया,घर बंगला गाड़ी की शान,नहीं कमाया जीवन जीना,पाया नहीं सच्ची मुस्कान

बने ईंट गाड़ों की महलें,ख़ुब  सूरत लगती मकान,पलती जिसमें जीवन पल पल,गुड्डे गड़ियों सी बेजान

मम्मी पापा अलग अलग हैं,उनके सपने अलग अलग,बच्चों को नहीं प्यार मिला है,आया पाली अलग अलग

हाय हैलौ तक रिश्ता उनका,नहीं है मन में वो सन्मान,मॉ की लोरी बाप की गोदी,इसका उसे नहीं है भान

संगी संग वे खेले खाये,आया की गोदी का प्यार,पास नहीं हैं मम्मी पापा,कैसे होता उसको प्यार

अपनी प्यार की पेंगे बढ़ाई,उन बच्चों ने अपने ही,छोड़ बसेरा जैसे पंछी,उड़ते पंख के होते ही

वैसे वो भी छेड़े अपनी ,मम्मी पापा का संसार,दुखिया मॉ रोती महलों में,क्यों वो भूली करना प्यार

बूढ़े होते मम्मी पापा ,देख के आसूं रोते हैं,अपनी करनी पर पछताते,मन ही मन अब रोते हैं

उसने भी तो यही किया था,बुढे अम्मी अब्बा से,राह उसी ने दिखलायी थी इन बच्चों को जीने की

दोष हमारा अपना ही है ,दोष नहीं इन बच्चों की,जो कुछ इसे सिखाया हमने
आज वही वह सीखा है,बोया हमने बेल बबुल तो कॉटो को ही उगना था, 

फूलों की क्यों आश करें हम,फूल नहीं जो बोये थे,फूल नहीं जो बोये थे।

ख़ुशियों की तलाश

हम ढूँढते हैं ख़ुशियाँ को अपने आस पास,उसे पाने के लिये लगे रहते हैं दिन रात

उसे ढूँढने के चक्कर में लग जाती है सारी ज़िन्दगी,पर क्या वह मिल पाती ता ज़िन्दगी 

नहीं क्योंकि हम उसे ढूँढते ही रहते हैं,उसे पाने की नाकाम कोशिश करते ही रहते हैं

ख़ुशियाँ हमारे सामने रहती है दिन रात,हर जगह हर समय हमारे आस पास

कस्तूरी की तरह वह है हमारे आस पास,पर उसे पाने के लिये हम छटपटाते हैं

मृगतृष्णा सी भटकता रहता है मन,अपने ही भ्रमजाल में उलझते जाते हैं हम

ख़ुशियाँ तो अपने मन के अंदर होती है,इसे औरों में बॉटने से बढ़ती  है

यह वह पौध है जो सींचने पर बढ़ता है,फलता फूलता और फल देता ही रहता है

इसे बॉट कर तो देखो,अपने लोगों में,इसे बॉटो अपने आस पास पड़ोसी में

दीन दुखियों में ,गली मुहल्लों में,मीठी बोली प्यारे बोल,तेरी ये ख़ुशियाँ अनमोल

मॉ को मिलती है ख़ुशियाँ ,बच्चों की किलकारी में,मिलती है सुकून ,जब अपना दूध पिलाती है

उसे चलते देख निहाल होती है,तुतलाने पर बलिहारी जाती है

उसके रोने और मचलने पर,उन्हें मनाती है,सारा दुख भुला ,छाती से लगा लेती है

क्या ये ख़ुशियाँ नहीं है? हर्ष पिता को होता है जब अपना बच्चा उसे पापा पापा कहता है

वह भूल जाता है सारा ग़म,जब वह बाँहें फैलाता है,उसे वह गोद में उठाता,बाँहों में झुलाता है

पुचकारता प्यार करता है,जब वह स्कूल जाता है,उसे वह छोड़ने और लाने वहॉ जाता है

उसकी पढ़ाई पर ध्यान देता है,गाड़ी में घुमाता है,उसकी ख़ुशी के लिये ,अपना दुख दर्द भूल जाता है

उसे इन्सान बनाने के लिये, सारी दुनियॉ से लड़ता ह,अपने सारे ग़मों को ख़ुशियों में बदल देता है

यही तो है उनकी सच्ची ख़ुशियाँ है,क्या उसे कहीं ढूँढना पड़ता है

उनकी ख़ुशियाँ उनके पास है,ता उम्र वह उसी के लिये जीता है

पर जब बच्चे बड़े हो जाते हैं,उनकी तमाम ख़ुशियाँ बिखर जाती है

बच्चे ख़ुद तो ख़ुशियाँ मनाते हैं,मॉ बाप को भूल घर छोड़ जाते है

मॉ बाप को बुढ़ापे में ,बेसहारा छोड़ रास्ते से भटक जाते हैं

जो वह कभी बचपन में बोला करता था,मम्मी पापा तुतलाता था
यही ख़ुशियाँ वह क्यों नहीं लौटा देता है,अपनी दो मीठी बोलसे

जो वह कभी बचपन में बोला करता था,पापा मम्मी से चिपकता था

रूठता और ठुनकता था,हँसता कभी रोता था,मॉ की छाती से  लगता था

आज वह बड़ हो गया है,बीती बातें भूल गया है,कल शायद उसे एहसास होगा,

जब उसका भी बच्चा बड़ा होगा,वह भी भूल जायेगा ,जैसे वहअपने मॉ बाप को भूला है

उसकी भी ख़ुशियाँ उससे बिखर जायेगी,तब तक बहुत देर हो जायेगी

अभी समय है चेत जाओ,बूढ़े मॉ बाप की क़दर करो उसे साथ रक्खो

सेवा कर उनके सुख दुख में हाथ बँटाओ ,उनकी दुआएँ लो मान बढ़ाओ 

बच्चे भी तुम से सीख लेंगे ,तुम्हारा बुढ़ापा भी सुखमय होगा

ख़ुशी लुटाओ और ढेर सारी ख़ुशियाँ पाते रहो,ख़ुशियाँ पाते रहो

सुरेशमधु की आशा है ,तुम सब पहल करोगे,सुख से रहोगे

सब सुख से रहोगे ,सब सुख से रहोगे