Monthly Archives: March 2016

गौपालक का दर्द

भारत एक कृषि प्रधान देश है,यहाँ की खेती छोटे छोटे किसानों द्वारा हल बैलों से की जाती है। पशु पालन भी किसानों का एक प्रमुख धन्धा है।गाय हमारे मुख्य पशु हैं,उन्हीं के बछड़े जब बड़े हो जाते हैं तो उन्हें हलों में जोत खेती किया जाता है,साथ ही सामान ढोने का भी काम भी इन्हीं बैलों से बैलगाड़ी द्वारा लिया जाता है।सदियों से यही यहाँ का प्रमुख रोज़गार बना हुआ है ।गाय बैल हमारे जीवन के अभिन्न अंग हैं।उनके बिना हमारा असतित्व ही नहीं है।यही कारण है कि हम इन्हें माँ की तरह पूजा करते हैं ।दूध ,दही ,घी,और खेतों के लिये कंमपोस्ट खाद,सब हमें इन्हीं से मिलता है ।जब तक गाय हमें बछड़े देती है ,हमें दूध ,दही और घी मिलता रहता है ।बैल जब तक जवान रहता है हमारे काम का रहता है ।पर जब ये बूढ़े हो जाते हैं ,तो वो फिर हमारे किसी काम के नहीं रह जाते हैं ।हमें इन्हें सिर्फ़ चारा खाना देना पड़ता है ,जो किसान को एक बोझ बन जाता है।जीवन भर वे हमारी सेवा करते आये हैं ,अत: हम उन्हें न भूखे रख सकते हैं न घर से दूर भगा सकते हैं।पर किसान को उन्हें रखना काफ़ी मंहगा पड़ता है ।कभी कभी कुछ किसान इस बोझ को नहीं उठा पाते हैं ,और इन पशुओं को वे आवारा छोड़ देते हैं।किसानों को इससे काफ़ी आर्थिक नुक़सान भी होता है।हमें और हमारी सरकार को इसका समुचित समाधान निकालने की ज़रूरत है ।

मेरा अपना विचार है कि इस समस्या के समाधान के लिये, हमें धर्म से अलग हट कर सोचना चाहिये ,धर्म और गाय का रिश्ता साथ साथ लेकर चलने पर समाधान ढूँढने में परेशानी होगी ।गाय को हिन्दू धर्म से इसलिये जोड़कर रक्खा गया है कि ,बिना गाय बैल के कृषि करना हमारे देश में संभव ही नहीं ,वरन असंभव भी है।पर अगर इनमें कुछ सुधार कर किसानों को इसे और लाभकर बनाया जाय तो किसान भी ख़ुश और समाज भी ख़ुश।कोई भी किसान अपने बूढ़े बैल और गायों को इसलिये भी नहीं बेचना चाहते हैं कि उन्हें उसका उचित मुल्य नहीं मिलता है।व्यापार की दृष्टि से अगर देखा जाय तो बूढ़े पशुओं की भी क़ीमत जवान पशु के बराबर ही है।पर व्यापारी सिर्फ़ अपना लाभ देखते हैं और किसानों की ग़रीबी का फ़ायदा उठाकर मिट्टी के भाव में उसे ले जाते हैं या फिर आवारा घुमते पशु को बेमोल उठा ले जाते हैं ।उनके तो दोनों ही हाथों में लड्डु है।अगर हम किसान और व्यापारियों के बीच एक सही ताल मेल बनायें,और दोनों के हित के बारे में विचार करें तो शायद हमारा रूढ़िवादी सोच में बदलाव आ सकता है और हम अपने किसानों को अधिक आय दे पायेंगे ।सरकार ये क़ानून बनाये कि वही पशु कसाई को बेचा जाय जो किसानों के काम का नहीं रह पाया है,बूढ़े और बाँझ पशु जो सिर्फ़ चारा खाना खाते हैं और दूध नहीं देते या हल में जुतने लायक नहीं रह गये हैं ।अगर ऐसा हो जाय तो किसानों को उनका भरपूर लाभ मिलेगा तथा दूसरे समुदाय को खाने के लिये पर्याप्त माँस ,चमड़ा उद्योग के लिये चमड़े ।न कहीं वैमनस्यता होगी ,न कहीं तनाव रहेगा ,आपस में भाईचारा बढ़ेगा देश में शांति रहेगी ।

पर इसके लिये सही माहौल बनाना होगा ,धर्म गुरुओं से प्रार्थना करनी होगी,किसानों को मनाना होगा ।चुनौतियाँ बड़ी हैं ,पर अगर बौद्ध जन शांति पूर्वक विचार करेंगे तो सब कुछ संभव है।सरकार को भी धैर्य पूर्वक आगे आना होगा ।समाज और देश को आज इसकी आवश्यकता है ,इसमें सभी की भलाई है,हमें उम्मीद है कि नेता गण भी इसे वोट बैंक से हट कर विचार करेंगे। मैं अंत में आपसे विनती कर अनुरोध करता हूँ कि ये मेरा अपना और सिर्फ़ अपना निजी विचार है ,मैं न किसी संगठन से जुड़ा हूं ,न नास्तिक हूँ और न तो किसी धर्म विशेष से हूँ ,मैं भी एक आम भारतीय हूँ और बहुसंख्यक समाज से हूँ,एक अदना सा किसान का बेटा और अवकाश प्राप्त फ़ौजी हूँ ।जयहिन्द,जय भारत ,वन्देमातरम ।

जनम जनम का रिश्ता

सदियों पुरानी ये कहानी है,पति पत्नी का रिश्ता तो जनम जनम का रिश्ता होता है ।यह सच भी हो सकता है ,हमने ये कहानी अपने दादा दादी से अपने वचपन में सुनी थी।चंपा नगर में एक नेक धनवान परिवार रहता था।शरभ और इंदुमति दोनों उन्हीं के संतान थे।शरभ बड़ा होकर राजा के दरबार में दरबारी बन गया।वहीं उसका प्रिय मित्र विनय भी राज दरबारी था।एक दिन दोनों राज काज के काम से चंपा नगर आये थे।काम निपटा कर  रात्रि  विश्राम के लिये शरभ विनय को साथ लेकर अपने घर आया था।पिता के साथ दोनों दोस्त दस्तरख़ान पर बैठ खाना खा रहे थे ,माँ रसोई में थी और इंदु सबों को भोजन पड़ोस रही थी।उसकी नज़र विनय से मिली और वह सपनों में खो गयी।वह रात भर विस्तर पर विनय के बारे में ही सोचती सोचती सो गयी।

सुबह जब विनय नित क्रिया क्रम से निबट कर बैठक में अकेला था,तभी इंदु जलपान लेकर कमरे में आयी।उसने मुस्कुरा कर विनय से जलपान करने की विनती की।विनय जलपान करने लगा ,तभी इंदु दरवाज़ा अंदर से बन्दकर विनय के पास आकर बैठ गयी ।विनय चकित था,उसने इंदु से दरवाज़ा लगाने का कारण पूछा।वह शर्माती हुई बोली,मुझे एकांत में आपसे कुछ बातें करनी है।वह उसे देखते रह गया और बोला,इंदु तुम्हारे घर वालों को यह देखकर बहुत बुरा लगेगा।मैं भी बदनाम हो जाऊँगा और तुम भी।वह धीमे से बोली,आप चिंता न करें ,मैं आप में खो चुकी हूँ ,मुझे आपको देखते ही आप से प्यार हो गया है ।आप सहमति दें तो मेरे माता पिता हम दोनों को आशीर्वाद ज़रूर देगें।विनय बोला यह सही नहीं है,तुम मेरे बारे में क्या जानती हो?इंदु गंभीर होकर बोली ,मुझे आपके बारे में सब कुछ पता है ,जो एक पत्नी को होना चाहिये।आप एक उच्च कुल से हैं ,हम सजातीय हैं,आप सारे दुर्गुणों से दूर हैं ,माता पिता का आदर करते हैं ,परिवार से प्रेम करते हैं ,सच्चे और ईमानदार हैं ,एक माँ बाप को आप जैसा जमाई पाकर गर्व ही होगा ।विनय इंदु को अपलक देखता ही रह गया ,वह पहली बार उससे निल रहा था और उसे इतना सब पता है ,वह हैरान था?

बहुत देर तक दोनों में बातें होती रही,माँ को शंका हुई कि इंदु इतनी देर तक क्यों रसोई में वापस नहीं लौटी?वह बैठक जा पहुँची ,अन्दर से दरवाज़ा बन्द देख वह घबड़ा गयी ।दरवाज़े पर दस्तक दी ,अंदर से इंदु बोली ,ताई मैं तुम्हारे जमाई के साथ बैठी हूँ ,मैं दरवाज़ा तब तक नहीं खोलूँगी ,जब तक आप लोग हमें आशीर्वाद नहीं देते।माँ सोच में पड़ गयी ,बोली इंदु तू पागल तो नहीं हुई?इंदु  माँ को धीरज देते हुए बोली ,आप लोग मेरे लिये वर ढूँढ रहे थे ।मैंने आपका काम आसान कर दिया ,ऐसे होनहार जमाई पाकर आप सभी गर्व करेंगे ,बाबा को बुलाकर हमें आशीर्वाद दें।माँ घबराई हुई जा कर पति से सारी बात कह सुनायी।वे हँसे और बैठक के पास आकर बेटी से बड़े ही स्नेह से बोले,बेटी मुझे तुम पर गर्व है,।मुझे तुम्हारी पसंद मंज़ूर है,विनय हमारी बेटी को सुखी रख पायेगा ,मुझे पूर्ण विश्वास है।दरवाज़ा खोल बाहर आ जाओ।दोनों बच्चे आँखें नीची किये बाहर आ गये और माता पिता के चरणों में गिरकर आशीष लिये।

सही समय और सही मुहूर्त में दोनों परिवारों के सहमति और आशीश से दोनों बच्चों की शादी संपन्न हो गयी ।इंदु अपने पति के साथ मायके छोड़ ससुराल आ गयी ,दोनों पति पत्नी ता ज़िन्दगी प्यार और सुख से जीवन बिता भरा पूरा परिवार छोड़ परलोक वासी हुए ।आज भी उनकी ये प्रेम कहानी समाज को प्रेरणा दे रही है ।है न ये जनम जनम का रिश्ता,पति पत्नी का यह अटूट रिश्ता पूर्व निर्धारित होता है ,भले ही ढूँढने में वक़्त लग जाता है ।प्यार के इस रिश्ते को मज़बूत धागों से बाँध कर रक्खें ,ये टूटने न पाये ।

देशप्रेम

धरती से जिसको प्यार नहीं ,माता से जिसको लाड़ नहीं।

वह नहीं ही सच्चा बेटा है ,माता के कोख का खोटा है ।

अपनी बात बढ़ाने को ,मजमे में भीड़ जुटाने को ।

सपेरा भी बीन बजाता है ,सांपों से हाथ मिलाता है ।

हाजमें की दवा हो या टीकिया,जम्बुरा खेल दिखाता है।

मजमें में भीड़ तो आती है,दो चार दवा बिक जाता है।

नेता गण भी अपने ख़ातिर ,मजमे में भीड़ जुटाता है।

जुटी भीड़ से गदगद हो,वोटर पर नोट लुटाता है।

जनता भी ऐसे गिरगिट से ,ले नोट पलट वह जाता है।

चिन्ता उसे सताती रहती,कैसे हो कल्याण देश का।

देश के ख़ातिर कौन हमारा,अपने को अर्पण करने का।

मातृ भक्त और देश भक्त ही,मोदी जैसा नेता होगा।

आओ ऐसे देश भक्त को ,मिलकर गले लगाने का ।

भारत को इस सारे जग में ,सादर सम्मान दिलाने का।

जयहिंद ,जयभारत ,वन्देमातरम ।

 

Happiness 

Are we really happy today?

1-Business man-They are always busy in increasing wealth and loosing health,

Morning to night ,having no leasure time to spend with family,and friends,

Money is every thing for them,they earn,preserve,and leave behind them,

Miser is the best downer in this world,they donate it after their death,

They have never seen a rising sun,evening sunset,a beautiful chirping birds,

They have never enjoyed with poor folk of villagers singing together,

Going to office in morning and returning late night with heavy heart is a daily routine ,

Children are sleeping,eating alone on dyning table,going on bed and snoring their nose,

His life remains as a machine,they have never been happy through out their life.

2-An Ordinary Man-Farmers,technicians,clerks,drivers,postmen,ordinary venders,etc,

They always try to keep their family and children happy for ever,

They are so busy in their life that they have no time for them self to enjoy and be happy ,

Their life are around their near and dear only to keep them happy,leaves the world for them.

3-Sciencetist ,Doctor,Teacher,-they are the architects,always work for the society,

Study hard to get the best knowledge till their youth,get on the service till death,

Starving for more and more knowledge during his life time to serve the best,

No time for family ,friends and children ,only they can provide money to them,

Having no time for proper rest,prayers,outgoing for peace ,thinking for themself

Leave the world for ever only doing their duties and finding solutions for others.

4-A Real Saint (Great Muni)-He has no need ,never thinks for tomorrow ,lives for today

He is satisfied ,lives out side of society,having little cloths to cover them self,

No foods in store,no proper shelter ,no desire to get these all,how it comes?who provides?

Who will use it?no worldly desires,having nothings ,he is more happy then worldly men,

Always remains with All Mighty God,prayers ,prayers and prayers,it never stops for him,

He is cheerful,smiles,soft spoken,God fearing,truthfull,pray for societies well being

Is he not a happy man?perhaps,he may be ,still worldly peaples have their limitations,

They can not leave the society ,they are the creators ,they are the protector ,

world is for them and they are there for world,each one is complementry to each others,

LESSON-I have learnt the lessons from above ,one must have their own time for them self,

Take away some moments from your busy life for your self,sit calmly,think for your self,

Pray to All Mighty,be with your children ,family,give them some time,be happy with them,

Who knows about tomorrow ?yesterday has gone,enjoy today,it is your day ,use it for your self.

Earnings ,Earnings and Earnings,you have to leave them here only,nothings you can carry,

If your son is a good man ,you need not to worry,if he is a bad mad you can not help him,

Money can not buy every things in this world ,give them good educations,make them honest,

A brave and faithful citizen,buy some times for you ,enjoy the natures,life is short ,live happily.

Valuable In life

Must remember three 

1-God ,Allah,Ishwar

2-Father,Son ,Son-in-law

3-Mother,Sister,Wife

4-Teacher,Employer,Doctor

5-Home,School,Country

6-Duty,Responsibiliy,Right

7-Breakfast ,Lunch,Dinner

8-Work,Rest,Sleep

9-Listen,Respond,Patience

10-Pray, Forgive,Help

11-Neatness,truthful,Dutyful

12-Obidience,Brave,Foresighted

13-Friends,Family,Society

14-Water,Plants,Wild Animals

15-Mine,Yours,Ours

16-Police,Lawyers,Judge

A sincere Advice to Fighting Women Brigade

1-Dear mother and sisters,do not waste your time and energy for silly reasons.

2-Always be constructive,you are genius ,bold ,brave,educated young Lady.

3-We obey you at home ,without questioning,you are the master at home .

4-Advice and convince your Father,Brother,Husband,children at  home .

5-Ask them to change their attitudes,bad old practices,towards women.

6-Donot visit Tamples and places which restrict your entrance any more.

7-Never visit any Tamples and worship their ,God is every where,pray at home.

8-90% only women visit Tamples ,if you absent your self ,all priest will starve .

9-All flower sellers,and puja items sellers will be jobless,.

10-Market near Tamples will be closed ,you will not loose any things.

11-All head priest of local Tamples will come and request you all and bow to your feet.

12-you need not to  go for procession for getting entry in to Tamples at all.

13-This whole world is in your hand ,you are giver and not beggars .

14- you know your strength and power,you are really Durga ,Sarswati ,and Kali .

15-You know non co operation movement of Mahatma Gandhi during Independance.

16-Adopt this weapon ,take pledge ,not to visit any Tamples in future.

17-Let me see how you are not given your right,who will have guts to deny it .

18-But you have to boycott Tamples going and convince your family male at home .

19 I hope your problems will be solved within no time,without getting any trouble .

20-Remember non co operative movement ,Donot cook at least two days in every week at home.

21-Protest ,ask your family members to cook them self or manage it from hotel,be firm.

22-Till your male members comes to your terms ,wish you all great Lady your success.

महफ़िल 

शाम सुहानी थी हर रोज़ की तरह ,हम सभी साथ बैठे थे ।

घनश्याम की मंडली,जोशी, सुरेश ,संधु सभी साथ  बैठे थे ।

लगभग साठ की उमर पार कर चुके,बुज़ुर्गों की ये टोली थी ।

सिंधी,पंजाबी,गुजराती,मराठी,बिहारी,यूपी और बंगाली की।

गप शप ,हँसी ख़ुशी ,बाँटते,हम सब कहकहे लगाते थे।

बचपन से जवानी ,नौकरी व शादी की,दुख सुख सभी बाँटते थे

हमारा यहाँ रोज़ रोज़ का आना था,हँसते गाते बातें होती थी

न घर की चक चक ,न बच्चों की ,यहाँ तो बस महफ़िल होती थी

एक दिवस हम ऐसे ही चहक रहे थे,किसी बात पर लहक रहे थे

तभी एक नौजवान ने ताना मारा,देखो इन बुड्ढों को कैसे बहक रहे हैं?

सुन कर हमें काफ़ी दुख हुआ,ये कैसे संस्कार में बच्चे पल रहे हैं 

हम भी कभी जवान थे ,बुज़ुर्गों को सदा बाबा दादा ही कहता था

पास पड़ोस ,आने जाने वालों को भी,सदा सम्मान ही करता था

बड़ों को प्रणाम कर सदा ,उनका आशीष ही लेता रहा था

हमारे लड़कपन में ख़ूब बारिश होती थी,काग़ज़ की कश्ती से खेला करते थे

कोई कभी दूर निकल जाता था,कोई कभी पास ही डूब जाते थे

हम हँसते खिलखिलाते थे,पर पास खड़े बुज़ुर्गों को बाबा ही बुलाते थे

कभी कोई भूल कर भी इन्हें ,बुड्ढा नहीं बुलाया था

आज ये बच्चे अपने ही बाबा दादा को,बुड्ढा कहकर बुलाता है

सर्दियों में नाक ज़रूर रिसता था,तब भी हम गिल्ली डंडा खेलते थे

एक हाथ से नाक झिरक,दूसरे हाथ से डंडा घुमाया करते थे

आस पास हमारे बुज़ुर्ग ,हमें खेलते निहारा करते थे

हम सभी उन्हें बाबा दादा ही बुलाया करते थे 

बुड्ढा क्या होता है यह ,तब हम नहीं जानते थे

हमने भी बचपन में शैतानी की थी,बाग़ों से आम चुराये थे

माली से पकड़े जाने पर ,कान पकड़ मांफी माँगे थे

पर उन्हें भी हम बुड्ढा नहीं बुलाये थे 

तैराकी हमने भी सीखी थी,गाँव की उस उथले तालाब में

स्वीमिंग पूल भी होता है,अभी ही पता चला है हमें

हमारे हमजोली ही हमें,तालाब में ढकेल देते थे

डूबने उतराने पर वही ,हमें ढंग से तैरना भी सिखलाते थे

जवानी में हमने भी  कभी ,चोरी चोरी सिगरेट पीया करते थे

बुज़ुर्गों की डर से छिप छिप कर ,दूर दूर जाकर पीते थे

उनसे पकड़े जाने पर ,पैर पकड़ मांफी माँग लेते थे

पर कभी भी उन्हें हमने ,बुड्ढा कहकर नहीं बुलाया था

नौकरी के लिये हम भी ,दर दर भटककर सर फोड़ा था

काँटों के बीच से गुज़र कर ,ज़िन्दगी में आगे बढ़ा था

अपने माँ बाप ,बीबी बच्चों के साथ,हम ख़ुशी ख़ुशी रहते थे

बाहर कितनी भी तकलीफ़ होती थी,पर घर में ख़ुश हम रहते थे

साहब की डाँट ,काम का बोझ,हमारे उपर भी था

पर कभी किसी बुज़ुर्ग को,हमने बुड्ढा नहीं कहा था

आज भी हमारी इस टोली में ,कोई बृद्धा आश्रम में नहीं रहता है

हम अपने बच्चों के साथ हैं,वह हमारे साथ ही रहता है 

पर मैं पूछना चाहता हूँ ,उस नौजवान बेशरम से

क्या तुम्हारे माँ बाप तुम्हारे साथ है, या बृद्धा आश्रम में?

ज़रूर ही वो किसी बृद्धा आश्रम की ,शोभा बढ़ा रहे हैं

तभी तो उनका ये होनहार पूत,हमें बुड्ढा कह रहे हैं

पर शायद ये उसका दोष नहीं है,वह तो अपने ही बाप से सीखा है

जो अपने बूढ़े माँ बाप को,बृद्धा आश्रम में छोड़ आया था

दादा दादी का प्यार क्या होता है,उसको यह नहीं पाया था

बच्चे तो वही सीखा है,बचपन में माँ बाप जो सिखाया था

मुझे शिकायत है उन माता पिता से,जो अपना फ़र्ज़ भूलते जा रहे हैं

अपनी जवानी के सुख में,बुढ़ापे के दुख को बुला रहे हैं

अपने लिये गड्ढा खोद,बच्चों में ग़लत संस्कार डाल रहे हैं 

तरस आता है उनके परवरिश पर,तरस आता है उनके परवरिश पर

Save water

1-Take bath with mug and bucket ,

2-20 ltrs. water is sufficient for an adult,

3-you can wash your under garment too with this ,

4-Before bath soap your under garments,

5-Enjoy bathing on under garments,

6-you will really feel pleasure bathing with mug,

7-Leaving two ltrs.water in the last you clean your u garments,

8- I hope you will save 30 ltrs. Water every day per person 

9-In one month you can save 30*5*30=4500 ltrs in every house,

10-If every house is practicing we can save house quantity of water,

11-Water is very precious,save it ,save water bill ,increase ur saving,

12-Adopt rain water harvesting in every house ,

13-Help your self,help. Your Govt.,contribute something for Nation,

14-you can give a happy future to your children ,save water,

15-you will not loose any things,but gain every things .

Sureshmadhu prays every one to save water ,jaihind,jaibharat,.