15 अगस्त सन सैंतालीस, एक बजे की रात घनी।
लाल किले की प्राचीर से, उतरा झंडा ब्रिटिश राज की।
उसी प्राचीर से भारत देश का, लहराया था यही तिरंगा।
आजादी पायी थी हमने, देश प्रदेश गूँजा था नारा।
बड़े शान से लहराता है, उसी दिवस से यही तिरंगा।
आजादी पाने की खातिर, हमने कितने कष्ट सहे।
खेले थे हम खून की होली, लाखों वीर शहीद हुए ।
सीनो पर झेले थे गोली, लाखों फांसी पर लटके ।
सूनी हो गयी कितनी मांगे, लाखों घर वीरान हुए ।
काला पानी काल कोठरी, वीरों ने दी थी कुर्बानी।
यातना भोगी नारकीय वो, इसके बाद मिली आजादी।
वर्षों के संघर्ष बाद ही, हमको मिल पायी आजादी।
हमें पढ़ाया गया अभी तक, चरखे से आयी आजादी।
भूला दिये वो भगतसिंह को, भूले चन्द शेखर आजाद ।
याद हमें सिर्फ यही दिलाया, नेहरु गाँधी का परिवार।
जलिया वाला वाग भूलाये, भूले वीर सुभाष को।
मुगलों का इतिहास पढ़ाकर, हमको झूठा ग्यान दिये।
पढाया नहीं वीर प्रताप को, झांसी रानी को मिटा दिये।
पृथ्वीराज छत्रसाल शिवा को, हम सबसे वो छिपा गये।
शान से लहराता ये झंडा, हमको याद सब दिला गया।
मस्तक ऊँचा रहे हमारा, कहता यही तिरंगा प्यारा।
हम सबको यह याद दिलाता, आजादी का सच्चा नारा।
देश भक्ति है वतन परस्ती, वतन के खातिर जीना मरना।जीवन से भी वतन बड़ा है, वतन के खातिर जीना मरना।
वतन के खातिर जीना मरना।
जयहिंद जयभारत वन्देमातरम
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