दूरी का एहसास

दूर हूँ परवरदिगार से
पर पास है हमारे वो।
दूर हूँ अपने परिवार से
पर सदा पास रहते हैं वो।
दूर हूँ दुरियां है हमारे बीच
पर ये दुरियां भी हमारे पास है।
अपनों से ये दुरियां दूरी से है
पर दिल से वे हमारे पास हैं।
कौन कहता है दुरियां है हमारे बीच
यही दुरियां तो हमारे मिलने की चाह है।
दूरियों से कभी दूर न होना
दुरियां ही तो प्यार की नींव है।
दुरियां बनाये रखना मेरे यार
मिलने की तड़प बनी रहेगी।
दुरियां तो दो किनारे हैं नदी के
चलते तो साथ साथ हैं ।
पर मिलते वो कभी भी नहीं।
पर नदियाँ बहती रहती हैं
दोनों किनारों को साथ साथ लेकर।
यही तो जीवन है हमारा
बहते जाना बहते जाना।
मिलने की चाह में सदा साथ साथ चलते जाना ।
सदा साथ साथ चलते जाना।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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बारिश की फुहार

भींग रही संग सजनी सजना ।
रिमझिम रिमझिम बारिश में।
छतरी हाथ धरे हैं सजना।
पर सजनी भीजे बारिश में।
खोलत चाहत छतरी सजना।
पर न खुले ये बारिश में।
भींग रहे हैं दोनों कब से।
खेलत सजनी बारिश में।
भींगी साड़ी भींगी अंगिया।
रूप सलोनी तकते सजना।
भूल गये दोनों संग अपना।
छतरी हाथ धरे है सजना।
छतरी हाथ धरे है सजना।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

शराबी का हाल

पीना है तो पी ले बंदे,
अमरित पी ले तनमन से।
सिगरेट और शराब छोड़ कर,
पी ले अमरित गोधन के।
दूध दही का सेवन कर ले,
फल फूलों का भोग लगा।
नित दिन सेवा कर ले बंदे,
दीन दुखियों का पीड़ मिटा।
काया तेरी सुखी रहेगी,
सुख शांति घर आयेगी।
देख लिया है तूने बंदे,
सिगरेट पीने का वो हाल।
और शराबी जीते घर में,
जीते सूकर कीचड़नाल।
तू है इनशा तू है मानव,
जग में तू है एक मिसाल।
फिर क्यों जीना तू इस हाल।
फिर क्यों जीना तू इस हाल।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

सैनिक की व्यथा

फोटो पर है फूल चढाना ,आज सभी को भाता है।
जीते जी सैनिक सम्मान,नहीं किसी को आता है।
रेल सफ़र में धक्के खाकर, फौजी जब घर आता है।
टीटी भी फौजी वर्दी पर, रहम कहाँ वो खाता है।
बिना लिये नोटों की गड्डी, जगह नहीं उसको देता है।
घर वाले भी नोच नोच कर , सदा सदा उसको खाता है।
गर विधवा हुई उसकी घरवाली,घोलघोल कर सब पीता है।
मरने वाला देश के खातिर , जान गवाता सरहद पर।
घरवाली मरती बेचारी, रोज रोज अपने घर पर।
बच्चे हुए अनाथ जब उनका, घरवाले क्यों कर सोचे।
सरकारी अनुदान का मालिक,घर वाले ही बन बैठे।
बेचारी विधवा नारी भी, कैसे अपना हक मांगे।
असहाय निर्बल वह नारी, लुटती जिसकी लाज घरों में।
घरवाले ही भक्षक बन गये, किसे कहे वो लाज बचाने।
फौजी सदा ही छला गया है, घर और बाहर अपनों से।
ड्यूटी पर अफ़सर छलते हैं,और समाज में घरवाले।
राजनीति के खेल में फौजी,फँसकर रह गये बेचारे।
जीते जी हर रोज वो मरते, देश के खातिर बोडर पर।
कहाँ उसे है चैन रे भैया,जीकर भी जो घर आये।
इस समाज में उसका जीना,काफ़ी दूभर है भैया।
तेल और पानी का मिलना,नहीं आज तक देखा भैया।
तेल और पानी का मिलना,नहीं आज तक देखा भैया।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

वर्ष गाँठ की बधाई

वर्षो पहले प्यार हुआ था।
मिलकर साथ संसार बसा था।

सालों बीते दुनियाँ बदली।
पर न हमारा प्यार बंटा है।
दो जन मिलकर बाग लगाया।
फल फूलों से बाग़ भरा है।
कितना सुन्दर है संसार।
यह जाना है हमने मिलकर।
आज हमारे साथ खड़ा है।
नीचे दो दो पौध बड़ा है।
बेटा बेटी नाती पोता।
हम हैं अब तो नाना दादा।
दादी नानी बनकर सजनी।
खूब लुटाती प्यार वो अपनी।
यही दुआ हम करते रब से।
रहे बरसता प्यार हमेशा।
हम दोनों के बीच का रिश्ता।
सदा रहे सुखमय जीवन का।
दुआ सुरेश करे है रब से।
मित्र हमारा कुशल रहे।
हँसते गाते इस बगिया के।
माली सदा वो बने रहे।
माली सदा वो बने रहे।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

Nav Varsh

nav varsh naya din aaya hai, vo ghar ghar khushiyain laya hai
naya naya sandesha lekar, nayi umange laya hai
nav chetan man me nayi nayi, vo nayi prerna laya hai
sukh shanti se milkar rahna , yahi sandesha laya hai
biti raat jo beet gayi, sukh dekar vo bhi chali gayi
ab aane vala jo kal hai, lekar aayi ummid nayi
tute aur adure sapne , kal tak jo hum dekhe the
sach pura hoga vo sapna, jo abtak hum dekhe the
desh hamara pyara Barat, tha jo duniya ka sartaj
sach me fir se hogiinki, sari duniya me jaykar
jagat guru ye sare jag ko, shanti ahinsha ka ye desh
mite kalayank nafrat duniya se, jati darm aur bhasha ki
manavta se nata jorhe, chchor larie bhasha ki
nav varsh naya sandesha lekar, humhe jagane aaya hai
sukh shanti se mil kar rahna, humhe sikhane aaya hai
ye ghar ghar khushiyain laya hai
ye ghar ghar khushiyain laya hai
nav varsh naya din aaya hai
aur humhe jagane aaya hai

By
Suresh Mandal

jaihind jaibharat vendamatram.

Happy birthday.

बीत गये दस साल तुम्हारे।
साल ग्यारहबी शुरू हुई ।
बचपन छूट चला है तेरा।
बालापन में आये तुम।
छोडो अब तुम रोना धोना।
छोडो अपना जिद्दीपन।
बालापन में बच्चे बढते।
अपनी अपनी मंजिल तक।
खूब पढ़ाई और लिखाई।
खेल कूद में बढते आगे।
माँ बाप को नहीं सताते।
अपना काम वो करते खुद।
यही दुआ और आशा तुमसे।
नाना नानी करते तुमसे।
सदा रहो खुशहाल डगर में।
यही दुआ हम करते हैं।
तुम हो घर के रौनक़ प्यारे।
तुम अंखियों के तारे हो।
माँ बाबा के सपने तुम हो।
दादाजी के अपने हो।
देश के तुम हो उगते सूरज।
हम सबके तुम सपने हो।
हम सबके तुम सपने हो।

Very very happy birthday to you, God bless you good health and prosperity in your, keep smiling and be happy.

jaihind jaibharat vendamatram.