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भारत माँ के हम संतान

लाचारी को दे तिलांजली।
कूद पडो तुम समर में।
लेकर हाथ तिरंगा अपने।
हो तलवार कमर में।
वीरों की भूमि है भारत ,
हम कूदे आज समर में।
विषधर को विषहीन करो तुम।
दुराचारी का अंत करो तुम।
घर घर ये संदेश हमारा।
फैला दो तुम वतन में।
कामी क्रोधी अत्याचारी।
दुराचारी और घूसखोरो को।
देशद्रोही उन विक्रित जन को।
इसी समर में दफन करो तुम।
नहीं निहत्थे रहना अब तुम।
जुल्म नहीं है सहना अब तुम।
भारत माँ के लाड़ले बेटे।
मिलजुलकर है रहना अब तुम।
देश हमारा प्यारा भारत।
इसको नहीं भुलाना अब तुम।
भारत माँ के हम संतान।
घुट घुट कर जीने से बेहतर।
देश के हित में मरना बेहतर।
भारत माँ के हैं सपूत हम।
देश धर्म पर हम क़ुर्बान।
देश धर्म पर हम क़ुर्बान।
देश धर्म पर हम क़ुर्बान।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

बचपन वाली गलियां

यह सोच नहीं सच्चाई है।
घर छोड़ आना मजबूरी है।
छूट गया घर अपना प्यारा।
नये नये घर वार मिला।
साथी साथ निभाने वाला।
दूर देश में प्यार मिला।
भूल गये हम उन गलियों को।
अब तो केवल याद रहा।
बचपन के वो साथी संगी।
कहाँ रहे उन गलियों में।
धूम मचाते थे बचपन में।
वो भी अब सुनसान पड़ा।
वो भी अब सुनसान पड़ा।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।