Monthly Archives: January 2022

माता कुन्ती व गांधारी

एक ही वंश में थी दो नारी, एक कुन्ती दूसरी गांधारी ।
कुन्ती पत्नी धर्म निभाया, थी विधवा कुल यश बढ़ाया ।
गांधारी भी सब वही किया , पर अपने कुल का नाश किया ।
आज भी कोई नाम न देता, अपनी बेटी का गांधारी ।
हर घर में है कुन्ती बेटी, घर घर कुन्ती नाम है प्यारी ।
अपनी जिद आक्रोश के चलते, निन्दनीय है गांधारी ।
माँ का सच्चा रूप है कुन्ती, है आदर्श और सबसे न्यारी।
माता कुन्ती सबसे न्यारी ।
माता कुन्ती सबसे न्यारी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

Advertisement

गरीबी

ये गीत हमारी जनमानस के, लिखा आपने कलमों से।
सही कहा है सही लिखा है, उन दुखियों के जीवन से।
यही व्यथा है इन गलियों की, उन किसान मजदूरों की ।
गुदरी ओढ़ सोती हैं माई, चिपका बच्चे छाती से।
नंगे पाँव खेत वो जाते , सर्दी गर्मी बारिस में ।
टूटी खाट टपकती बूंदे, भींगा तन वो रात बिताते ।
दो जून की रोटी खातिर, अपने तन को सभी गलाते।
काश कभी हम इन्हें उठाने, इनका जीवन सुखी बनाने ।
मिलजुलकर कुछ कदम उठाते, इनको भी हम सुखी बनाते ।
देश हमारा प्यारा भारत, धन धन्य से भरा हुआ है।
कुछ लोगों की बेईमानी से, बाकी सब को दुःख पाना है ।
नेता जागीरदार यहाँ पर, बांकी सब को लूट रहा है ।
कब इनको ये न्याय मिलेगी, अन्यायी को सज़ा मिलेगी ।
घर घर खुशियाँ आ जायेगी, और गरीबी मिट जायेगी ।
और गरीबी मिट जायेगी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

वनवासी राम

चले राम वन को सीता संग,
पीछे पीछे लक्षण भाई ।
पिता वचन को पूरा करने ,
छोड़ा अयोध्या राजा नगरी ।
माताए रोयी महलों में,
जन जन रोये अयोध्या नगरी ।
फूल कुमारी सीता वन में,
फिरती वो काटों के संग में ।
जिसके चाकर सारी दुनिया,
वही भटकते हैं वन वन में ।
छोड़ के छप्पन भोग महल में,
खाते हैं कन्द मूल ही वन में ।
धरा नहीं कहीं पांव जमी पर,
नंगे पाँव फिरे वो वन में ।
सुवर्ण पलंग पर सोने वाले,
सोते जमी पर परन कुटी में ।
कैसा भाग्य लिखा है विधना,
जग पालक रहते हैं वन में ।
मारे दुष्ट निशाचर वन वन ,
हुयेे सुरक्षित सारे ऋषि गण,
ताड़ अहिल्या पंचवटी को,
पहुँचे राम अनुज सीता संग ।
बरसों बरस बीत गये वन में,
लक्ष्मण कभी न सोये वन में ।
निशाचरी सूर्पनखा तब आयी,
लक्ष्मण से वह नाक कटवायी।
रावण हर ले गया सीता को ,
लंका देश अशोक वाटिका ।
सीता को वंदी कर रक्खा ।
इधर राम लक्ष्मण व्याकुल थे,
उधर वैदेही भी आकुल थी।
सीता खोज में राम लखन की,
हुई दोस्ती वानर राज की।
मार बाली को राज दिलायी,
सुग्रीव सखा से मेल बढ़ायी ।
वानर सेना के संग मिलकर,
रावण को जमलोक पहुंचाये।
राज तिलक विभीषण का कर,
लंका का राजा बनवाए ।
सीता माँ को मान सहित तब,
पुष्पक विमान से अयोध्या लाये।
राज तिलक तब हुई शुभघड़ी,
राजा रामअयोध्या नगरी की।
राजा राम अयोध्या नगरी की।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम