Monthly Archives: September 2018

औरत की गरिमा

औरत बेटी-बहन और माँ है।

सारे जहाँ का सम्मान है।

उसकी महिमा अपार है।

वह है तो ये हरा भरा संसार है।

क्योंकि वह है तो थाली में गर्म रोटी है।

ममता की ठंडक है, प्यार की ऊष्मा है।

उससे ही घर में संझा बाती है घर, घर है।

घर लौटने की इच्छा है, घर की वो धूरी है।

उनकी रसोई में भगवान का भोग है।

उससे ही पूजा की थाली है।

रिश्तों के गाँठ, पड़ोसी से प्यार है।

घर की घड़ी सोना जागना है।

होली दिवाली और तीज त्यौहार है।

रोशनी है, खिडक़ी है, ममता का आँचल है।

प्यार का समंदर, घना आकाश है।

अंधेरी रातों में चमकता चाँद है।

माँ ही तो है जो सारे जहाँ का सम्मान है।

मरते दम तक हमारी छाँव है।

उनके गोदी में दुनियाँ का हर सुख है।

वह है तो हम महान हैं, उनके बिना बेजान हैं।

उनके पैरों में जन्नत है भगवान है।

उनके पैरों में जन्नत है भगवान है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

अमर शहीद सैनिक

प्रियतम मेरे चले गये हैं, देश की सेवा करने को।

बाट निहारूँ नितदिन सखी मैं, पता नहीं कब आ जायें।

आयें हैं सखी संगी के संग, कंधों पर उन लोगों के।

लिपटे हैं सखी झंडों में वे। शोभ रहे हैं तिरंगों में।

पूछ रही है बिटिया मेरी, पापा क्यों ये सोये हैं।

बेटा मेरा पूछ रहा है, माँ दादा क्यों रोयें हैं।

बोल नहीं है मेरे मुख में, लिपटे देख तिरंगों में।

उजड़ गयी सखी माँग हमारी, दुनियाँ मेरी बिखर गयी।

साथ साथ जीने मरने की, चाह हमारी सिमट गयी।

अँखियाँ गीली, आँचल भींगीं, टूट गये सपने सब मेरे।

सजना संग ही साथ गया सब, सपने जो हम देखे थे।

सूनी माँग है सखी हमारी, सूनी पड़ी कलाई है।

सारा जीवन अंधकार है, पर बेटा कल का तारा है।

सखी बेटा मेरा सहारा है। सखी बेटा मेरा सहारा है।

जयहिन्द, जयभारत, वन्देमातरम।

रहना है सुख से रहना है

कुछ सही कहा कुछ गलत कहा है।

अपनों संग रहना सही कहा है।

पर घुट घुट साथ रहने से बेहतर,

कहीं दूर अकेले ही रहना है।

चाहे रहना अपने घर में,

या रहना बृद्धाश्रम में।

जीवन भर की आप कमाई,

उसे पास अपने रखना है।

बच्चों को तुम़ पढ़ा लिखाकर,

खड़ा जरूर पैरों पर करना।

न रखना उम्मीद तू उनसे,

और न रखना मन से दूर।

पैसा ही भगवान यहाँ पर,

पैसा करे अपनों से दूर।

न खुद ही तुम दुखी ही रहना,

और नहीं तुम दुख देना।

मोह में पर के बच्चों के तुम,

मोह में अंधा मत होना।

समय बदल गया है भैया,

साथ समय के चलना तू।

पंछी भी बच्चों को चुग्गा,

उड़ने तक ही देती है।

सबक उसीसे लेना भैया,

ये दुनियाँ रंग बदलती है।

संभल के रहना अपनों से भी,

कुछ कहने कुछ सुनने में।

न यह तेरा न है मेरा,

अपना नहीं पराया है।

उगते सूरज को करे सलाम,

डूबते किसको कब भाया है।

जनम जनम का नाता अपना,

फिर भी नहीं निभाया है।

मोह भरा संसार यहाँ है,

मोह में उलझा रहना है।

घर अपना है धन अपना है,

बेटा बेटी सब अपना है।

साँस छोड़ जाने के पहले,

सब अपना है सब अपना है।

साँस छूटते ही सुरेश सब,

यहीं धरा रह जाना है।

सब यहीं धरा रह जाना है।

सब यहीं धरा रह जाना है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

हरि बिन रहे न मनवा

हरि सुमिरन हर पल हरि, हरि हरि गाबत मनवा।

हरि बसत सखी साथ हमारे, इधर उधर ढूँढे मनवा।

काम करत हरि साथ हमारे, सोवत जागत मनवा ।

जिन देखूं सखी हरि हमारे , हॅसत खेलत मोरे संगमा।

मन में तन में और सपन में, सदा बसे हरि मनवा।

पल दो पल भी नाम सखी री, हरि भूले नहीं मनवा।

कहे सुरेश हरि नाम बिना सखी, हरि बिन रहे न मनवा।

सखी री हरि बिन रहे न मनवा।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

जीवन अपना सफल बनायें

जीवन का यह सार समझ लें,

संचय है अभिशाप समझ लें।

दर्पण सा हो जीवनअपना,

संग्रह नहीं पर सबसे मिलना।

उम्र हमारी घटती हर दिन,

डूबते सूरज का संदेश।

नयी उमंग और आशा लेकर,

नित दिन सूरज उगे सुरेश।

बीत गया जो वक़्त हमारा,
नहीं दुबारा आयेगा।
आज और यह वक़्त हमारा,
हमको सदा बढ़ायेगा।

नये फूल खिलते बगिया में,
नया सवेरा आने पर।
नये उमंग के फूल खिलायें,
अपने जीवन में हर पल।
जीवन है हर पल हंसने का,
जीवन अपना सफल बनायें।
नये जोश और नये उमंग से,
घर को अपना स्वर्ग बनायें।
जीवन अपना सफल बनायें।
घर को अपना स्वर्ग बनायें।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

चांदनी रात

ये चांदनी रात और ये झूला , झूले पे गोरी का झूलना ।

कसक उठती है मन में, जब मिली थी उससे नयना।

आज वह खुद झुलाती है, अपनी बाहों में ललना।

ये झूला याद दिलाये हमको, हम दोनों का मिलना।

हम दोनों का मिलना, हम दोनों का मिलना।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

बंगलोर की है शाम सुहानी

कितनी प्यारी शाम यहाँ पर, शीतल बहे बयार यहाँ पर ,

मन शीतल हो जाये आके, घूमने इस बगिया में आकर।

चौड़े पथ है पक्की सड़कें , पेड़ पौधौ से भरे यहाँ ।

हरियाली चहुँ ओर यहाँ है, शीतल मंद बयार यहाँ ।

बच्चे बूढ़े और सयाने, दौड़ भाग कर घूम रहे ।

अम्मा दादी सखी सहेली, झुण्ड झुण्ड में घूम रहे ।

कितने मिलकर बातें करते , बैठ यहाँ पर टोली में।

लते रोज मजे हम सब भी, बैठ यहाँ पर टोली में।

अपनी रोज सुनाते हम सब, औरों की भी सुनते हैं।

दिन भर की ये राम कहानी, अपनी अपनी कहते हैं।

साँझ ढले सूरज ढलते ही, संध्या वंदन करते हैं।

यही हमारी दिनचर्या है, यहाँ हमारा कोना है।

नितदिन घूमना बातें करना, घंटों समय बिताना है।

साँझ ढले शीतल बयार का, नितदिन सेवन करना है।

जीवन के अंतिम पड़ाव पर, यहीं तो जीवन जीना है।

यहीं तो जीवन जीना है, यहीं तो जीवन जीना है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

पल दो पल की जिंदगी

पल दो पल की जिन्दगी है ,
खुलकर जी लें मेरे यार।
खिले फूल से हँसना सीखें,
खूब लुटाये मिलकर प्यार।
जाने कौन किसे कब भाये,
बात तुम्हारी तुम्हरे संग।
बगिया में फूलों का खिलना,
तितली भौरे आये संग संग।
जीना चंदन बनकर जीना,
और महकते रहना ही।
चिड़ियों सी कलरव तू करना,

नील गगन में उड़ना तू।
चंदा की शीतलता जैसी,
शीतल शीतल रहना तू।
अंधियारों को दूर भगाना,
दीपक सा ही जलना तू।
राह चले राही को मंज़िल,
सदा दिखाते रहना तू।
दीमक कभी नहीं तू बनना,
और शकुनि रावण तू ।
बनना और बने ही रहना,
सारथी बनकर रहना तू।
जीना चाहे पल भर जीना,
सुख से जीवन जीना तू।
जीना चाहे पल भर जीना,
अपनी पहचान बनाना तू।
अपनी पहचान बनाना तू।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

दूर देश अब दूर नहीं है

टूट न जाये नाता अपना, टूटे पेड़ की डाली सा।

दूर बसे परिवार हमारा, बात बिना मन का रिश्ता।

तन से हम सब दूर बसे हैं, मन से सदा जुड़ा रहते।

ये तकनीक निराली भैया, समय निकाल बातें करते।

चेहरा भी दीखता है भैया, बात चीत करते करते।

पास पास ही बैठे हैं हम, आपस में बातें करते।

सेहत सूरत हाव भाव सब, दीखते अपने बच्चों की।

क्या खाता कैसे वह रहता, दीख रहा सब पर्दों पर।

वह भी अपने परिजनों को, देख रहा है पर्दों पर।

घर से बाहर दूर देश भी, दूर नहीं अब रहा तनिक।

मिलने को आने में घर तक, देर नहीं अब लगे अधिक।

दूर देश अब दूर नहीं है, तकनीकी विज्ञान से।

टेलीफोन टेलीविजन , वाई-फाई, इंटरनेट से।

हवाई मार्ग से उड़ कर आते, झट मीलों आकाश से।

दूर देश अब दूर नहीं है, तकनीकी विज्ञान से।

दूर देश अब दूर नहीं है, तकनीकी विज्ञान से।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

हिन्दी हिन्दुस्तानी है

हिन्दी को हिन्दी रहने दो, हिन्दी तो अपनी भाषा है।

हिन्दी भाषा वो भाषा है, जिसने भारत को जोड़ा है।

हिन्दी का उपकार है हम पर, हिन्दी प्यार की भाषा है।

हिन्दी भाषा को वैर नहीं , और किसी भी भाषा से।

मेल-मिलाप से सारी भाषा, खिलती है इस बगिया में।

हम सब भारत वासी मिलकर, सब भाषा को गाते हैं ।

तमिल तेलगु मलयालम को, कन्नड़ और मराठी भी।

पंजाबी गुजराती उर्दू , आसमी उड़िया बंगाली।

साथ साथ खेले हैं संग में, गाते मिल सब कौवाली।

सभी सखी है भाषा अपनी, सखियों में है मेल यहाँ।

हिलमिल कर रहती आयी हैं, नहीं किसी को बैर यहाँ।

हिन्दी भाषा सिरमौर यहाँ की , भाषा की वह रानी है ।

एकजुटता की जननी यह है, भारत की यह वाणी है।

हिन्द देश की भाषा हिन्दी, हिन्दी हिन्दुस्तानी है।

यह भाषा हिन्दी है प्यारे, हिन्दी हिन्दुस्तानी है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।