Monthly Archives: June 2017

महानायक आडवाणी जी

नमन तुम्हें है हे जननायक,

बनकर नींव का पत्थर तुम।

खड़ा हुआ है जिस पत्थर पर,

आज बी जे पी महल बनकर।

नहीं भुलाया जा सकता है,

आपकी मेहनत और लगन।

आप ने दे दी है कुर्बानी,

देश के खातिर में तनमन।

देश हमारा बढ़ता जाये,

बी जे पी के संग संग में।

आपकी सेवा और कुर्बानी, 

याद रहेगी जन जन में।

पी एम और ये राष्ट्रपति भी,

नहीं बड़े अडवाणी जी से।

वो दोनों भी काज संभाले,

आपकी अपनी मेहरबानी से।

शत शत नमन तुम्हें हम सबका,

भारत माँ के सच्चे सपूत को।

जिसने देश को मोदी देकर,

मान दिया जो पी एम पद को।

कोबिंद जैसा राष्ट्रपति भी,

दिया देश को हे महानायक।

याद करेगी सारी धरती,

भारत देश को हे महानायक।

नव भारत के भाग्य विधाता,

शत शत नमन तुम्हें महानायक।

शत शत नमन तुम्हें महानायक।

जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

इनसानीयत

इनसानीयत अभी भी जिंदा है, गरीबों की गरीबी में,

हैवानियत जिंदा है, अमीरों की अमीरी में।

जमा करने की धुन में , हम भूल चुके हैं इनसानीयत।

सारा जमा यहीं रह जायेगा, मरने के बाद।

क्या काम आयेगी, बेशर्मी से जमा किया धन दौलत।

न सुख से जीया न सुख पाया, कंकड़ पत्थर जमा किया।

खुद घुट घुट कर जीया, मानुष जनम बरबाद किया।

सीख कुछ इन पेड़ों से, फूलों से, मधुमक्खियों से।

झरनों से, नदियों से, तपते सूरज और चंदा तारों से।

ये सब फलते हैं, महकते हैं, तपते और बहते हैं।

कभी भी अपने लिए नहीं, पर दूसरों के वास्ते ही ।

इसी लिये तो ये पूजे जाते हैं, देवों के शीश पर चढ़ाये जाते हैं।

फूलों  का मधु रस भी , भौरे दूसरों के लिए ही इकट्ठा करते हैं।

तुम इनसान होकर भी ,सिर्फ अपने लिये जीते रहे हो।

इनसानीयत की तौहीन न करो, इनसान बनकर रहो।

इनसान ही बन कर रहो।
जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

प्रभु नाम

शरण गहूँ प्रभु आपकी, दुख सुख दोनों एक।

नाम जपत हरि का सुरेश, क्या दुख क्या सुख एक।

पार लगाओ आपना, भवसागर की लेक।

बिसर गयो प्रभु नाम तुम्हारो, पाके खुशी अनेक।

काज करो ऐसो मनमोहन, नाम न बिसरें तोय।

सखा सहायक रहो हमारे, और न बिसरें तोय।

प्रभु नाम न बिसरें तोय, नाम न बिसरें तोय।
जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

पिता भगवान होता है

पिता तो आखिर पिता ही होता है,

पिता सबमुच में ही भगवान होता है।

मानो या न मानो यारो,

पिता के बिना सब सुनसान होता है।

ये हँसी और ये ऐय्याशी,

सब पिता की ही देन होती है।

माँ तो बस माँ होती है,

पिता बच्चों का भगवान होता है।

वो सख्श भाग्यवान होता है,

जिसका पिता उसके साथ होता है।

हम सब भी तो भाई बेटे हैं,

पिता का मान सम्मान करते रहें।

हमारे अपने बच्चे भी सीख जायेंगे,

हमारा मान सम्मान करना।

जब हम लाचार होंगे पैरों से चलना।

पिता के इस पुण्यतिथि पर, 

हमारा उन्हें शत शत नमन।

उन्हें शत शत नमन।

जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

बधायी जन्म दिवस की

जन्म दिवस की बहुत बधायी,

सुख से जीयें सालों साल।

मातु पिता का आशीष तुमको,

सुखी भरा हो घर संसार।

बच्चों के संग मौज मनायें,

और खिलायें फूल हजार।

दीन दुखियों की सेवा करके,
जग में पायें सबसे मान।

जीवन सफल बने तुम सबका,

यही दुआ है हम सबका।

फूलों से तुम खिलते रहना,

बादल से लहराना तुम।

सूरज जैसा गरमी देना,

चँदा सी शीतलता तुम।

नाम सदा ही अमर रहे,

दीन दुखियों संग रहना तुम।

कृति अमर रहे इस जग में,

ऐसा काम ही करना तुम।

ऐसा काम ही करना तुम।

जयहिंद, जयभारत, वन्देमातरम।

ढलती शाम

साँझ ढलने लगी हैं, मन बहकने लगी है।

मिलन की चाह में, दिल धड़कने लगी है।

प्रियतम की याद क्यों सताने लगी है।

 मधुर मिलन को,  दिल मचलने लगी है।

साँझ ढलने लगी है, रात होने लगी है।

मन मचलने लगी है, दिल बहकने लगी है।

मुद्दत्तों बाद वो आ रहे हैं, दिन ढलने लगी है।

मिलने को दिल अब धड़कने लगी है।

मन मचलने लगा है, दिल धड़कने लगी है।

निगोड़ी छुटियाँ भी  जल्दी बीत गयी है।

कल ही तो वो आये थे, कहते हैं महीना बीत गयी है।

घर सूना सूना फिर हो जायेगा, वो लाम पर लौट जायेंगे।

फिर वही तनहाई वो सूनापन, दिन तो कट जायेगी।

रात आते ही याद आयेगी, बिस्तर पर वो अकेलापन।

साजन की बाहों का सिरहाना, सपने में भी वो याद आयेंंगे।

साँझ ढलने लगी याद आने लगी है।

साजन की याद अब सताने लगी है ।

साँझ ढलने लगी याद आने लगी है,

 याद आने लगी है, याद आने लगी है।

जयहिंद ,जयभारत, वन्देमातरम।

Was it wrong or correct

Dear Veterans, I am going to narrate you the working of Aircraft Technicians in the Electrical Bay while servicing and testing faulty components.

  It is a normal procedure to be followed as per the mannual and publications. It requires new spares , all the lock washers, tab washers, rubber seals must be replaced with new one, it is mandatory.

While serving and testing A/C Generator after 200/400 flying hrs. without these spares it cannot be serviced. There was an occasion when the Bay received 08 Generator of 04 Jaguar A/C and these spares were not available in the logistic section. AOG was raised on all the 04 aircraft. Aircraft servicing was completed in R&S, but due to non availability of Gen.Set aircrafts could not be rolled out form R&S.

Electrical officer Wg.Cdr, who was also  officer I/C Electrical Bay  came to the way and asked the progress of Gen.Set to MWO I/C Bay. He called the Electrical I/C and asked him to reply.  He narrated the complete story of spares, as the AOG has not received it is not possible to service it. Wgco.  asked him, is any alternative is possible? He replied, sir ,if you permit me to use the same old spares of Generator which are going to be discarded, it can be serviced, it will be taken due care while dismentalling the set, so that non of them will damage. After servicing and fitment it will be tested towice on the test bench. If the test is satisfied on test bench then only the Gen.Set will be delivered to R&S. Further Sir, I will sign as a workman and you have to sign as my supervisor. Wgco agreed and asked him to go ahead with servicing.

  This task was completed successfully and the GenSet was delivered to R&S. All the 04 aircraft passed out from R&S. 720B prepared I/C Electrical signed as work man and Wgco name written on the supervisor column on form 720B, sent for his signature to Electrical section. Fort night passed but the form was not signed. It was mandatory for the Bay to submit the F720B within fortnight to logestic sec.  Reminder Quarry came from there. Electrical I/C  requested MWO I/C Bay to find out the progress.

He gone to Electrical section and found the unsigned form lying on wgco.table. Those days wgco. was officiating C.Eng.O. of Station. So he took the file and gone to CEng.O office. He was welcomed by C. Eng. O. They had coffee together, then C.Eng.O asked him any problems, MWO put the file in front of him for his signature, C.Eng. O asked MWO all the 04 A/Cs are flying, how many hrs. they have flown? Are any Generator problems? MWO replied, they have flown more than 15 to 20 hrs without any problems. C.Eng.O told MWO, then why you have brought this from to me for signature? You could have signed and disposed off it earlier. He got up from the table ,took the file, came back to Bay, called the Electrical I/C , and warn him not to commit any such things in future service. He was having father son relationship between two. Electrical I/c wept and promised him not to bring such situation in future. This unforgatable instance I can’t forget in my whole life.

Now I want my all fellow technical veterans to put their views, opinions and comment who was wrong and right.

Jaihind jaibharat vandematram.

Foreigner Technical Expert

I was on the posting strength of 14 Sqn.in1980s as a Corporal. Jaguar A/C was introduced newly in IAF. It was the latest technology those days. Few Foreigner Technical Expert was attached with the Sqn. from UK. Whenever there used to appear critical sang they were consulted and their advice used to be final. Many  times we were thinking they are the best, having vast knowledge, we have studied thoroughly the publication and acquired better knowledge on the trade conserened. There after we were not asking any more advice from them, specially Electrician as our boss Sgt Mandal was having better knowledge than those Foreigners. Under his guidance we Electricians also became Expert on our Electrical system. I was too recognized as Expert.

   Due to my knowledge on system I was selected in ferry out mission of Jaguar from UK to India in 1981. When our team reached to Warton Division in UK , we met most of those Technical Expert there in the Hanger. I was surprised to see them wearing the overall having Corporal and Sgt. rank on the solder. They hesitated and shook hands with us .We had good conversation with them and they told that you all are the Best Expert on your trade matter. This was the pride moment for us as they them self have accepted and commented.

      Further I just want to tell you all, those Technical Expert were provided Air-conditioned offices, three star hotel in Chandigarh, new Air-conditioned ammesader car for coming on duty and other movement with drivers. Full facilities in Air Force Officers Mess.

    We all Technical trades men are far more superior than any our counterpart in the world. We give guarantee for safe landing to our beloved Pilot , no single officers are involve in this , they have never signed the F700, that is the flying certificate. Still we all are humiliated and our real pay , pension and allowances are cut in every pay commission, only our officers are taking all the benefits. It is a pity on the part of our government and Chief.

Jaihind jaibharat vandematram.

जीवन का सच

जो चाहा कभी पाया नहीं, जो पाया कभी सोचा नहीं।

जो सोचा कभी मिला नहीं, जो मिला रास आया नहीं।

जो खोया वो याद आता है, पर जो पाया संभाला जाता नहीं।

क्यों अजीब सी पहेली है ज़िन्दगी, जिसको कोई सुलझा पाता नहीं।

जीवन में कभी समझौता करना पड़े, तो कोई बड़ी बात नहीं 

है। क्योंकि, झुकता वही है ,जिसमें जान होती है,

अकड़ तो ,मुरदे की पहचान होती है। ज़िन्दगी जीने के दो तरीके होते है!

पहला जो पसंद है उसे हासिल करना सीख लो.!

दूसरा जो हासिल है, उसे पसंद करना सीख लो.!

जिंदगी जीना आसान नहीं होता; बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता।

जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है; कभी हंसती है तो कभी रुलाती है।

पर जो हर हाल में खुश रहते हैं; जिंदगी उनके आगे सर झुकाती है।

चेहरे की हंसी से हर गम चुराओ; बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना छुपाओ।

खुद ना रूठो कभी पर सबको मनाओ; राज़ है ये जिंदगी का बस जीते चले जाओ।

गुजरी हुई जिंदगी कभी याद न कर, तकदीर मे जो लिखा है, उसकी फर्याद न कर।

जो होगा वो होकर रहेगा, तु कल की फिकर मेंं अपनी आज की हँसी बर्बाद न कर।

हंस मरते हुये भी गाता है ,और मोर नाचते हुये भी रोता है।

ये जिंदगी का फंडा है बॉस, दुखों वाली रात  नहीं आती।

और खुशी वाली रात कौन सोता है।  ईश्वर का दिया,कभी अल्प नहीं होता;

जो टूट जाये ,वो संकल्प नहीं होता। हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;

क्योंकि जीत का ,कोई विकल्प नहीं होता।

जिंदगी में दो चीज़ें , हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं :

सांस और साथ, सांस टूटने से तो इंसान 1 ही बार मरता है।

पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल-पल मरता है।

जीवन का सबसे बड़ा अपराध , किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।

और जीवन की, सबसे बड़ी उपलब्धि , किसी की आँख में आंसू, आपके लिए होना।

जिंदगी जीना आसान नहीं होता; बिना संघर्ष कोई महान नहीं होता।

जब तक न पड़े हथोड़े की चोट; पत्थर भी भगवान नहीं होता।

जरुरत के मुताबिक जिंदगी जिओ, ख्वाहिशों के मुताबिक नहीं।,

क्योंकि जरुरत तो, फकीरों की भी पूरी हो जाती है;

और ख्वाहिशें बादशाहों की भी, अधूरी रह जाती है।

मनुष्य सुबह से शाम तक, काम करके उतना नहीं थकता।

जितना क्रोध और चिंता से, एक क्षण में थक जाता है।

दुनिया में कोई भी चीज़ ,अपने आपके लिए नहीं बनी है।

जैसे: दरिया खुद अपना पानी नहीं पीता , पेड़ -खुद अपना फल नहीं खाते।

सूरज -अपने लिए हररात नहीं देता , फूल -अपनी खुशबू अपने लिए नहीं बिखेरते।

मालूम है क्यों? क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असली जिंदगी है।

मांगो तो अपने रब से मांगो; जो दे तो रहमत और न दे तो किस्मत; लेकिन दुनिया से

हरगिज़ मत माँगना; क्योंकि दे तो एहसान और न दे तो शर्मिंदगी।

कभी भी कामयाबी को दिमाग,और नाकामी को दिल में

जगह नहीं देनी चाहिए।

क्योंकि,कामयाबीदिमाग में घमंड,और नकामी दिल में मायूसी पैदा करती है।

कौन देता है उम्र भर का सहारा।, लोग तो जनाज़े में भी कंधे बदलते रहते हैं।

कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए।

यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती ,तो वह हर प्राणी को

आंख, नाक,कान,मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता।      

पानी से तस्वीर कहाँ बनती है, ख्वाबों से तकदीर कहाँ बनती है,

किसी भी रिश्ते को सच्चे दिल से निभाओ, ये जिंदगी फिर वापस कहाँ मिलती है।

कौन किस से चाहकर दूर होता है, हर कोई अपने हालातों से मजबूर होता है,

हम तो बस इतना जानते है, हर रिश्ता मोती और हर दोस्त कोहिनूर होता है

सभार अनाम मित्र से।