Monthly Archives: June 2019

इनसानीयत ही ईमान हो

खुश रहें, खुशहाल रहें,
दिल से दुआ हम करते हैं।
स्वस्थ्य सदा सपरिवार रहें,
मन में उमंग हो कभी न कोई गम हो।
ईश्वर भजन हो, मित्रों का संग हो।
आते जाते सज्जनों से मीठी बोलचाल हो।
भाई बहना का प्यार हो,
माँ बाप का सर पे हाथ हो।
पति पत्नी में प्यार हो,
सुखी सब संसार हो।
हम हों न हों, हमारी भी याद हो,
शुभ कामना है हमारी, चेहरे पर मुस्कान हो।
पर कभी भी न कोई गुमान हो,
न पड़ोसी आप से परेशान हो ।
यही दुआ है इनसानीयत ही ईमान हो।
इनसानीयत ही ईमान हो।

सुप्रभातम सुप्रभातम सुप्रभातम ।

सपनों की दुनियाँ

दुनियाँ जी रही है भ्रम में ही सही,
कल तो अपना है आज रहने दो जी।
कल जो बीत गयी वो अपना था,
कल जो आने वाला है वो तो सपना है ।
अभी जो समय चल रहा है,
वही तो सचमुच में अपना है।
अपने को अपनाये अपनों के साथ रहें,
सपने को भूलें और खुश रहें ।
सपना देखना बुरा नहीं होगा,
सपने को साकार करें भला होगा ।
सपनों को सचमुच अपना न समझें,
सपने तो सचमुच सपने ही होते हैं,
सपने कभी भी न अपने होते हैं ।
सपने देख सपने में ही खुशी मनायें।
हकीकत में सपने तो सपने होते हैं ।
सपने तो सचमुच ही सपने होते हैं,
सपने कभी भी न अपने होते हैं ।
सपने कभी भी न अपने होते हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सत्य वचन

1–चढ़ते सूरज को सभी सलाम करते हैं ।
2–काम करवाने के लिए सभी अनुरोध करते हैं ।
3–अमीरी में दोस्तों की टोली सदा घेरे रहती है ।
4–जवानी में प्यार करने वाले बहुत मिलते हैं ।
5–सुख के सब साथी, दुख में न कोई ।
6–विपरीत परिस्थितियों में ही साथ निभाने वाले सच्चे हितैषी होते हैं ।
7–आग और बाढ़ से सभी दूर रहते हैं ।
8–सर्दियों में आग और गर्मियों में पानी अमृत है ।
9–दुखदायी होती है अपनों का फरेब।
10–बुढ़ापे में ही पुत्र और पुत्रबधू की असलियत सामने आती है ।
11–गाँठ का पैसा और अपना स्वस्थ्य हर समय पर काम आता है ।
12–जो अपने बच्चों पर भरोसा करके अपने भविष्य को सुरक्षित नहीं रखते हैं ,उन्हें तकलीफ होती है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

धनवान

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

रेशम जैसे बाल है तेरे, उठे तुम्हारे भाल।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

सीपी जैसी आखें तेरी, हिरणी जैसी चाल।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

ओठ तुम्हारे मधु के प्याले, चेहरा गगन विशाल ।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

अड़तीस वाली सीना तेरी, चालीस वटक कमाल।

कमर तीस की पतली तेरी, हिरणी जैसी चाल।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

ठुमक-ठुमक कर चलती गोरी, देख हिरणी शरमाय।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

रूप सलोना देख देख के, चंदनिया शरमाय।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

छैल छवीली नटखट गोरी, किसको नहीं लजाय।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

दीप दिखाना सूरज को, और कलम तुमसे शरमाय।

एक तू ही धनवान है गोरी बाकि सब कंगाल ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

गरमी का जून महीना

चिलचिलाती धूप यहाँ गर्मी का जून का महीना ।

पूरे उत्तर भारत में है गरमी का खौफ पुराना ।

पौ फटते ही शुरू हो जाती गरम हवा का बहना।

ऊमस भरी हवा चलती है दूभर हो गया जीना।

पंखा चले दिन रात यहाँ पर बिजली रानी है मेहरबान।

ऐ सी भी चलती है भैया फिर भी जीना हुआ हराम।

घर से बाहर निकले कैसे लू चलती है भैया ।

घर के अंदर दुबके बैठे हैं और नहीं है ठैया।

काम काज सब ठप पड़ा है सर से गिरे पसीना ।

हाय रे भैया हाय रे भैया ऐसा जून महीना ।

मजदूरों की मजबूरी है खटते हैं दिन रात ।

सर पे बोझा तन बे कपड़ा टप टप गिरे पसीना ।

भाग दौड़ करते गर्मी में उसे है रोटी खाना ।

मजदूरों के लिये नहीं यह तपता जून महीना।

भैया तपता जून महीना।भैया तपता जून महीना।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

ढूढ़ते रह जाओगे

सचमुच में ढूंढते ही रह जाओगे,
अपनों में अपनापन,
बेटों में राम व बेटी में सीता,
रिश्तों में गरमी ।
और अपनों का मकान,
बासमती चावल की,
मलाई दार खीर,
गाय का शुद्ध घी,
गावों में बरगद की छाँव ।
सब ढूढ़ते रह जाओगे ।
दादा दादी का मकान,
चाचा चाची की मुस्कान,
भाई बहना का प्यार,
बाप के कंधों की सवारी,
वो दो पहियों वाली बैलगाड़ी ।
सब ढूढ़ते रह जाओगे ।
वो कच्चा पक्का मकान,
घास फूस की छत ,
और टटिये का दरवाज़ा ।
न सिटकनी न ताला।
गरमियो में मटके का ठंढा पानी,
अमराई में बिखरे आम,
वो ठंढे लाल लाल तरबूज,
लीचियो के गुच्छे,
आपस की छीना झपटी,
मामाजी का प्यार,
और ममानी का दुलार ।
सब ढूंढते रह जाओगे ।
मिट्टी और फूस की मरैया,
ऐसी से बढ़कर ठंडक,
नाना नानी की कहानी,
सब ढूंढते रह जाओगे ।
बकरियों की झुण्ड,
व गायों की गोशाला,
खेतों में झूमते गेहूं की बाली,
लहलहाती धान की फसलें,
गन्ने का ताज़ा ताज़ा रस,
मक्के की बालें व बेरी के बेर।
सब ढूंढते रह जाओगे ।
ये होगी तब ऐतिहासिक कहानी,
बच्चे याद करेंगे इन्हें,
कभी ऐसे भी लोग होते थे,
सचमुच में दादा दादी नाना नानी।
सब ढूंढते रह जाओगे ।
सब ढूंढते रह जाओगे ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

वर्षा रानी

घुमड़ घुमड़ कर वर्षा बरसे, भींगी धरती अंबर ।

ताल तलैया भरे पानी से, बाट में उठ गये कीचड़ ।

सूखे खेत लबालब भर गये, झीगूर मेंढक शोर मचाये ।

चारो ओर हरियाली छाई, फूटे कोपल नये नये ।

गाँव ग्राम में हलचल मच गयी, खेतों की तैयारी में।

वर्षा रानी झम झम बरसे , गरमी भागी रातों रात ।

बरसा बरसे झम झमाझम, ये है मौसम की बरसात ।

कल कल कल कल बहती नदियाँ, बरसा बरसे दिन व रात ।

ले किसान आया खेतों पर, बरसा होते ही हल बैल।

नये फसल की बीज लगाने, खेतों की तैयारी लेल।

हुलसत सब किसान रे भैया। समय पर बरसा पानी।

घुमड़ घुमड़कर बरखा बरसे, बरसे बरखा रानी।

आयी है बरसात सुहानी, बरसे बरखा रानी ।

भैया बरसे बरखा रानी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।