Monthly Archives: September 2019

महिला जाति का सम्मान

बेटी और बहू की पूरी कहानी लिखी है चन्द लफ्जों में ।

मायके में बेटियों का अल्हड़पन और बहू की जिम्मेदारी ।

क्या खूब सजाकर रख दी है पूरी की पूरी जिन्दगानी ।

माँ का लारदुलार ,डांट डपट और उनकी झिरकी।

सब कुछ तो लिखा है, बेटियों को सुघढ़ बनाने की ।

माँ की बातों का अनसुना करना, बेटियों की तुनकमिजाजी।
बहू बनते ही जिम्मेदारी का एहसास होना और निभाना ।

अपनी बचपने को याद कर, स्त्री की गरिमा को पहचानना ।
सचमुच ही तुम्हारी ये लेखनी है एक बेहतरीन रचना ।

सचमुच ही तुम एक अच्छी बेटी और सुघढ़ बहू हो।

मायके और ससुराल वाले दोनों घरों की शान हो।

महिला और पूरी महिला जाति का सम्मान हो।

पूरी महिला जाति का सम्मान हो ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।


Weekly Haat

Very good morning friends, I still remember those days of my stay at Airforce Station Kalaikunda West Bengal from 1978 to 1980. I was working in 14 sqn. Hunter Aircraft. Those days living in and SMQ both the accommodations were within the same campus. Only one main gate was for entry and exit. I too was staying in RAQ with my family, that was only one room with open Barandah with independent bathroom and courtyard.

As the Airforce station was 12 km away from the nearest city Kharagpur, we used to buy all groceries items from nearby Bania shops just outside the main gate. But the big challenge was buying vegetables. As there were no permanent vegetable shop nearby. But the beauty of having by weekly vegetable Haat in the MES campus which was just infront of main gate on Sunday and Thursday were boon for us. Vegetable vendors and local farmers from surrounding villages used to come and sell fresh organic fruit and vegetables. Surrounding areas Sheduled tribes ladies who were bringing fresh fruit and vegetables from their kitchen garden were very cheap and delicious to eat. All the seasonal fruits and vegetables we used to buy from them for rest of three days. I still remember Caster apple, tree ripened very sweet and as big as 200-300gm. costing only 10 -15 Naya Paisa, Round shaped Lauki weighing 2-3kg. Costing only 50-75 Naya paisa, Radish, Carrots, Guava, green leaves all were fresh and very cheap. Total Rs.10 was sufficient for us to have fruits and vegetables for 3 -4days. Sunday was the holiday but for Thursday, there was verbal instructions from Station Commander to leave all living out personnel from their duties to buy vegetables without disrupting the working, so we were given one hour time turn by turn, this we used to manage in our section, as there were 50% living in personnel so working was effected. Those days ready made goods for ladies and children were very cheap in this Haat, they used to sell Blouses for RS.3-5 and frocks Rs.10-20. Now it is only dream.

There after I lived in many Airforce station — Ambalacantt, Pune, Bangalore ,Bareily, Lucknow, Nasik, but I could not get those tasty fruits and vegetables any where.

Thanks to Airforce Service, people like me have enjoyed the foods fruits and vegetables of different places in the country and enjoyed living all those places. Hope some of my old friends who lived there may remember those lovely days.

Jaihind jaibharat vandemataram.

प्यार और सम्मान

रूपये लाखों करोड़ों कमा ली,

बंगला गाड़ी सब कुछ बना ली।

बैंकों में करोड़ों जमा कर ली,

जमीनें भी खूब बना ली।

माँ बाप को खरीदने में,

ये सब भी कम पड़ गयी।

पर प्यार का एक कतरा ही,

माँ बाप के लिये जन्नत बन गयी।

खुशी धन दौलत के चकाचौंध में नहीं ,

बुढ़ापे में प्यार और सम्मान है बड़ी ।

बुढ़ापे में प्यार और सम्मान है बड़ी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मरकर भी अमर हो जाओ

नाम तो मेरा रख लिया है ,
क्या काम मेरा कर सकोगे तू?
राम बनकर, कृष्ण बनकर,
क्या सचमुच कर्म करेगा तू?
बाप खुद भी बन चुका है,
क्या फर्ज बेटे का निभाता है तू ?
मुखिया बनकर देश समाज का,
क्या बाप का फ़र्ज निभा पायेगा तू?
नाम रखना बहुत आसान है ,
पर उन जैसा बनना बहुत कठिन है।
खुद भी ऐसा कुछ कर जाओ,
लोगों को तुम पर नाज हो।
मरकर भी अमरहो जाओ।
मरकर भी अमर हो जाओ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

Airforce memories In 1987 January at Airforce station Ambalacantt, I along with my friends planed to visit Shimla to enjoy snow fall.A bus was hired and we started at 04am from. Ambalacantt. My wife prepared delicious khir puri and snacks in the night. My 9yrs tween daughters and 6yrs son all were exited. No sooner I boarded in bus one of my friend started smoking, as it was a severe winter all the windows and doors were closed. As My wife having allergy of cigarettes smokes, she felt vomiting, I opened the side window and requested my friend to stop smoking, but it was too late. She started vomiting, it became very difficult for me as her vomiting continued and she was nervous. But further deterioration was not bearable as my all three children too starred vomiting. I requested driver to stop bus on the way and got down with them. I was out on the road for more than 10 minute, still they were not well, I told them to leave us and proceed but they were not leaving us. At last half an hour later we boarded in and finally reached Shimla. It was nearly 10AM sun was signing. We freshed our self and sat down in a park. I asked my wife to take out meals, neither she nor the children were willing to take food. Any how I persuaded them and ate those delicious foods but the happiness was not there on their face. We moved all over, rolled on snow , walked on mall road and by evening started journey back to Ambalacantt. On return journey too my son was suffering badly and started crying, again I requested bus driver to stop bus, I got down with them. Now the situation was worst for me as my sunny was not willing to board in the bus, there was a red car moving on the road, he cried ,( I will go by this car only ) I was unable to convince him, it was going dark and every one was tired, they wanted to return early. Forcefully I boarded with my family and returned to our service quarters by 08pm. My tour was so bad that I still remember those moments and curse my smoking friend who have spoiled my pleasant tour, smoking is not bad for smokers but to everyone in contact with them. There after I learned a lesson and never faced such situation till my 33yrs long service . Hope my remembrance you too may enjoy and refresh your self. Thanks to Airforce who have given us to enjoy various places in our country. Jaihind jaibharat vandemataram

आँखों में सपने सजते

आँखों में हैं सपने सजते,
रंग बिरंगी सपने सजते।
बहुत निराले सपने सजते,
सपने तो सपने ही होते।
हाथ हमारे जो न होते ।
सपनों को साकार ये करते ।
इन हाथों की बात निराली,
करे हकीकत सपने सारी।
भाग्य की रेखा बदले इसने,
बदले ये तो भाग्य हमारी ।
आँखों ने जो सपने देखे ,
सपनों को साकार ये करते ।
हाथ हमारे मेहनत करते,
सपनों को साकार ये करते ।
सपनों को साकार ये करते

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम आदरणीय ।

बाबा की गुड़िया

वो तुतलाती डगमगाती नन्हीं सी गुड़िया,
आँखे मटकाती वो छोटी सी गुड़िया ।
बाहों में झूला झूलती नटखट सी गुड़िया ।
शाम घर आते ही पैरों में लिपटती वो गुड़िया ।
छुट्टियों के दिन घुमने जाने की जिद करती वो गुड़िया ।
स्कूल से कॉलेज पढ़ने जाती वो गुड़िया ।
शादी के बाद बिदा होती वो गुड़िया ।
आज ससुराल में माँ बन खुद खेलाती हुई गुड़िया ।
बाबा के लिये तो आज भी वह है वही गुड़िया ।
मायका, मायका है माँ बाप के रहते मेरी गुड़िया ।
गुडिय़ों से खेलने वाली गुड़िया आज खेलाती है गुड़िया ।
अपनी बेटियों को माँ बाप आज भी बुलाती है गुड़िया ।
उनके मायके आने पर महकती है बगिया ।
घर आँगन महकती माँ की जुडाती है अंखिया।
घर आँगन महकती उनकी आबत की पतियाँ ।
घर आँगन महकती उनकी आबत की पतियाँ ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

महिला का सम्मान करें

ये लताये पेड़ पौधे सब उगते हैं।
बढ़ते लहलहाते फलते फूलते हैं ।
इसी धरा पर टिके हैं खड़े हैं ।
पुरुष कभी अभिमान न करें ।
माँ की कोख ने ही जने हैं उन्हें ।
स्त्रियों का कभी अपमान न करें ।
उन्हीं की बदौलत तो ये जहाँ हैं बने।
मान सम्मान का अधिकार है उन्हें ।
उनका तिरस्कार न करें ।
बेटी बहन पत्नी माँ मातामही।
देव-देवताओं की सहचरी देवी।
बिना इनके न पूजा होती है कहीं ।
बिना इनके न पूजा होती है कहीं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम आदरणीय ।

आजादी की सच्चाई

अंधेरों में रक्खा गया है वर्षों से,

सच्चाई छुपायी गयी है हमसे ।

आजादी मिली हमें अंग्रेजों से,

पर गुलामी बनी रही है वर्षों से ।

आज आँखें खुली है वर्षों बाद,

सच्चाई सामने आयी है वर्षों बाद ।

शत-शत नमन है उन शहीदों को,

आजादी के उन सभी दीवानों को ।

हमें साहस, संबल और धीरज दे,

वतन की इस आजादी बचाने को।

वतन के गद्दारों से देश बचाने को।

देश में अमन चैन खुशहाली लाने को।

भारत को सोने की चिड़िया बनाने को।

भारत की पुरानी गौरव लौटने को ।

भारत की पुरानी गौरव लौटने को ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम आदरणीय ।

मायके की दहलीज

बिटिया के लिये सदा खुला है दरवाज़ा ।
माता-पिता की साया है बिटिया ।
माता-पिता के रहते आबाद है मायका।
उनके गुजरते ही पराया है मायका।
भूल जाते हैं भाई अपनी बहनों को ।
जनमते ही अपनी बेटी सब घरों को।
जनम जनम का रिश्ता है माँ बेटी का।
पिता की लाडली होती है सब बेटियां ।
सांस रहते तक आशा करती हैं बेटियां ।
स्वर्ग होती है दहलीज मायके की ।
माँ की गोदी में सर रखने की।
पिता के कंधों का सहारा पाने की ।
माँ बाप की दुलारी होती हैं बेटियां ।
माँ बाप की दुलारी होती हैं बेटियां ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम आदरणीय ।