Monthly Archives: April 2022

पत्नी के बिना पुरुष अधूरा है

ईट गारों से शानदार महल बनवाया।
रंग रोगन करवा इसे खूबसूरत बनाया ।
कीमती झाड़ फानूस और फरनीचरो से सजाया ।
घर के बाहर बड़ी सी तख्ती पर अपना नाम खुदवाया ।
महल देख देख खूब इतराया।
पर ये महल महल ही रहा घर कभी न बन पाया।
पर जब इस महल में पत्नी को व्याह लाया ।
तभी ये महल घर और मंदिर बन पाया ।
नाम की तख्ती लगा लेने से घर किसका हुआ ।
घर तो घरवाली के घर में रहने से घर हुआ ।
हे प्रियतमा तू क्यों नाम की तख्ती के लिये रोती है ।
मैं भी तुम्हारा हूँ ये घर भी तुम्हारा ही है ।
क्या कहीं सीता के बिना राम को देखा है।
कोई राम राम नहीं कहता सभी सीताराम कहता है ।
सभी राधेश्याम कहता है ।
सीता के बिना राम अधूरा है और पत्नी के बिना पुरुष अधूरा है ।
पत्नी के बिना पुरुष अधूरा है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

अच्यतम केशवं

अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरम , रामायणम जानकीवल्ल्भम।
नन्द के नन्दनम यशोदा ललनम, पूतना मारनम कंस का वो बधम।
अच्युतम केशवं कृष्ण दामोदरम, राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
कौशल्या सुतम दशरथा नन्दम वन उनका गमन दुष्ट राक्षस बधम।
राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
अच्यतम केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
अहिल्या तारणम शवरी बेरी खानम, बाली मर्दन करम राज सुग्रीवम दीनम।
राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
अच्यतम केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
रावण सीता हरणम राम रावण मारणम, लंका विजयम करम राज विभीषण दीनम।
राम नारायणम
जानकीवल्ल्भम।
अच्यतम केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
अच्यतम केशवं कृष्ण दामोदरं राम नारायणम जानकीवल्ल्भम।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

पति पत्नी की कहानी

पत्नी ने कहा तीन चौथाई जिंदगी आपकी सेवा में गुजार दी ।
अड़तालीस सालों से सेवा करते रहें हैं आपकी ।
पैंसठ साल हमारी उम्र हो गयी है, नाती नातिन भी बड़ी हो गयी हैं ।
क्या कभी शिकवा शिकायत की है आपसे, फिर अब इतने उखड़े उखड़े क्यों रहते हैं ।
मैंने उसे पास बिठाया और प्यार से समझाया, हम उखड़े उखड़े नहीं हैं , उम्र के साथ बड़े हो गये हैं ।
हम भी इतने वर्षों से तुम्हारी चाकरी में ही लगे हैं, माँ बाप भाई बहन से दूर हो गये हैं ।
सुबह निकलते ही आफिस चला जाता हूँ, शाम के पहले ही घर लौट आता हूँ ।
महीने भर की कमाई भी तेरे हाथ ही रखता हूँ , जो सब फरमाइश करती हो लेकर हाजिर होता हूँ ।
बच्चों के लिये दिन रात खटता हूँ , अपने लिये कभी नहीं सोचता हूँ ।
पर सच कहूँ, हमारे माँ बाप ने हमें शादी करके मिलाया है ।
प्यार क्या होता है ये शादी के बाद ही समझ आया है ।
न तुम सेविका हो और न मैं तुम्हारा चाकर हूँ, तुम तो चंदा हो और मैं चकोर हूँ ।
सात जन्मोंके रिश्तों में बंधा हम दोनों दो नहीं एक हैं ।
तुम चंदा मैं चकोर हूँ, तुम चंदा मैं चकोर हूँ ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

माता-पिता

माँ ममतामयी माँ ही बनी रही, पर पिता हमेशा दहशत ही बने रहे ।
माँ बच्चों को अपने आँचल की छाँव दी, पिता दोनों को छाया ही देते रहे।
माँ बच्चों की पसंद का खाना खिलाती रही, पिता उनके लिए सामान ही जुटाते रहे।
बच्चे माँ की गोद में सुख से सोते रहे, पिता उसे कंधों पर ही घुमाते रहे ।
माँ पति की छत्रछाया में निश्चिन्त रही, पिता जमाने का बोझ ही उठाते रहे ।
माँ बच्चों को लोरी सुनाती रही, पिता लोगों की बोली ही सुनते रहे ।
माँ बच्चों की प्यारी माँ बनी रही, पिता एक निष्ठुर निष्ठावान पिता ही रहे ।
पिता हमेशा ही पीते रहे, दुनियाँ का हर गम और बिष ।
वो हलाहल जिससे बचकर बच्चे अमृत पी सके।
माँ ममतामयी माँ बनी रही, पिता एक निष्ठुर कठोर पिता ही रहे ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

पुरुषत्व

पुरुष का पुरुषत्व पत्नियों को डराने धमाकाने या उसको यातना देने में नहीं, बरन उसे प्यार आदर सम्मान व सुरक्षा देने में है।

उसका पुरुषत्व गरीबों को सताने, शोषण करने, नीचा दिखाने या जलील करने में नहीं, बरन उसे उपर उठाने, पैरों पर खड़ा करने और आत्मनिर्भर बनाने में है।

उसका पुरुषत्व समाज में भय पैदा करनेके लिए नहीं, बरन उसे भयमुक्त करने में है।

पुरुषत्व सिर्फ़ दर्जनों बच्चे पैदा करने के लिए नहीं, बरन कम से कम बच्चे पैदा कर उसे कामयाब व योग्य नागरिक बनाने में है।

पुरुषत्व ईश्वर का वरदान है पुरुषों के लिये, इस वरदान का परिवार, समाज और देश हित में उपयोग होना चाहिए न कि स्वहित में अपने घमंड और अकड़ को साधने में ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

औरत तेरी यही कहानी

औरत तेरी यही कहानी, दिन भर खटती कभी न थकती ।
बेटा बेटी पति व सास, तेरे लिये सभी हैं खास।
तुम इस घर की बस एक चाकर, कहलाती हो घर की रानी ।
घिसती रहती हो जीवन भर, यही सोचकर घर की रानी ।
सास दिखाकर ठेंगा चल गयी, पति सदा बने रहे महान ।
बेटा बेटी लाड लड़ाकर , अपने घर को गये किये परियान।
बूढ़ी काया पड़ी अकेली, पूरा घर हो गया सुनसान ।
औरत तेरी यही कहानी, कहने भर को हो तुम रानी।
कहने भर को हो तुम रानी।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

उन्हें सब अच्छा लगता है

शाम ढले पंछी पेड़ों पर, लौट घोसले में आ जाना ।
चूजों के संग रात बिताना ।
अच्छा लगता है ।
शाम ढले सूरज का डूबना, और चाँदनी का बिछ जाना।
अच्छा लगता है ।
पतझड़ में पत्तों का गिरना, नये नये कोपल का आना।
अच्छा लगता है ।
पशुओं का नित चारा चरने, सुबह रोज जंगल को जाना।
शाम ढले घर वापस आना, पशु बारे में रात बिताना ।
अच्छा लगता है ।
बच्चों का नित स्कूल जाना, नये नये पाठों का पढ़ना ।
शाम ढले घर वापस आना, शोर शराबा खूब मचाना।
अच्छा लगता है ।
माँ बाबा का दिन भर खटना, और कभी न थकना ।
बच्चों को हर खुशियाँ देना, उनके मन का करना ।
ये सब अच्छा लगता है, उन्हें सब अच्छा लगता है ।
उन्हें सब अच्छा लगता है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम