Monthly Archives: April 2018

Heart Blockages Treatment

Take one one cup of

1) Lemon,

2) Apple Cyder,

3) Zinzer,

4) Garlic Juice.

Boil it till it remains only three cups. Cool and Add three cups of Honey.

Preserve it in a glass jar.

Take daily three spoon full in the morning empty stomach.

Your Heart Blockages will be cleared.

You need not to go to Hospital for treatment.

It is cheapest and best Auorbedic remedies for heart block clearance.

It is request to every person to spread the message for social causes.

Jaihind jaibharat vendamatram.

चाह नहीं है अब कुछ पाने की

चाह नहीं है अब कुछ पाने की, जी ली मैंने पूरा जीवन।

अपना जीवन सुख से जीया, नहीं कोई अफसोस रहा।

सुन्दर पत्नी चंचल बिटिया,बेटा काबिल मैं पाया।

भरा पूरा संसार हमारा, ईश्वर हमें संवारा है।

देश परदेश बहुत हम घूमे, अपना देश ही प्यारा है।

दिल्ली देखा पूना देखा, कानपुर और बरेली देखा।

भुज जोधपुर बाड़मेर देखा, जामनगर लखनऊ देखा।

कलकत्ता नासिक पटना देखा, आदमपुर अंबाला देखा।

पठानकोट जम्मू भी देखा, श्रीनगर कश्मीर देखा।

काशी देखा बनारस देखा, इलाहाबाद हलबारा देखा।

अहमदाबाद आबू भी देखा, बंगलोर देखा जयपुर देखा।

लंदन पेरिस इटली देखा, मिश्र कुवैत और दुबई भी।

हाँगकाँग अमरीका देखा, देश मेक्सिको बीच गया।

तरह तरह का व्यंजन खाया, ख़ालिस भेज व नौनभेज भी।

जैपनीज खाया इटालियन खाया, खाया डिश मैक्सिकन भी।

जीभर के चायनिज भी खाया, थाई डिश खायी मैंने।

स्वाद न पाया मैंने वैसा,अपने घर के खाने जैसा।

माँ के हाथों बना बनाया, खाना खाया बचपन में।

पूरा जीवन खाना खाया, बना-बनाया अपने घर में।

पत्नी रोज बनाती भोजन, प्यार प्रेम व तनमन से।

पूरी खीर की स्वाद निराली, छोले और भटूरे की।

सब्जी मिक्स मसाले वाली, आलू गोभी बैगन की।

मटर पनीर की सब्जी बनती, चाट मसाले वाली भी।

रोटी और पराठे उसकी, गोल गोल पतली पतली।

गोलगप्पे जब कभी खिलाती, कभी न मन भर पाती है।

पनीर पकौड़ी चटनी उसकी, ढोकला तो सरताज है।

उँगली चाट चाट हम खाते, मीठे की क्या बात है।

लड्डू नारियल वाली उसकी, नमकीन भी सौग़ात है।

चटक अचार बनाये घर में, आम और कटहल वाली।

सौस बनाये जाम बनाये, नीमकी वो नींबू वाली।

खूब खिलायी जीवन भर वह, बात नहीं भूलने वाली।

और नहीं है चाह हमारी, देश परदेश घूमने फिरने की।

सत्तर पार हुए हैं फिर भी, सिर्फ खाने की चाह रही।

सारा जीवन सुख से जीया, और नहीं अब चाह रही।

सारा जीवन सुख से जीया, और नहीं अब चाह रही।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

सबका साथ सबका विकास

देश का शासन जनता के हाथ।
मोदी जी के लिए देश सर्वोपरि है।
सबका साथ सबका विकास।
देश का शासन जनता के हाथ।
जन कल्याण ही मोदी जी का ईमान।
भर्ष्टाचार मुक्त भारत ही उनका अरमान।
भारत माँ के इस सपूत को हम सबका सत सत प्रणाम।
धन्य है ये माँ-बाप जिसने पैदा किया है इस लाल को।
धन्य है वो ग्राम और वो गुरू जिसने प्रश्रय दिया और शिक्षित किया इस महान विभूति को।
धन्य है वो आंगन जहाँ ये घुटनों घुटनों चला।
नये भारत के इस महान सपूत को ईश्वर दीर्घायु बनाये रखें।
यही हम भारतवासियों की ईश्वर से प्रार्थना है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

भूल गये हम उन वीरों को

भूला दिये हैं हमने उनको, यह सोच नहीं सच्चाई है।
हम भूल चुके हैं उन लोगों को , जिसने दी कुर्बानी है।

हम भूल चुके हैं उनको,दी जिसने भरी जवानी है ।
हम भूल चुके हैं उनको, जो वीर थे स्वाभिमानी।

भगतसिंह शुकदेव गुरू को, चंदरशेखर बलिदानी।

भुला दिया है हमने उनको, जैसे कोई कहानी।

याद हमें वो ही आता है, जो करते रहे गुलामी।

जूती चाटने वाले लीडर, हमको इतिहास पढ़ाया।

शेरों को भुला दिया उसने, गीदड़ को गीतों में डाला।

याद करो तुम उन वीरों को, जो फाँसी को गले लगाया।

जो भूला परिवार को अपना, मातृभूमि से नेह लगाया।

देश धर्म की बलिवेदी पर, अपने को कुर्बान किया।

याद करो तुम उन वीरों को, जिसने सब बलिदान किया।

जिसने सब बलिदान किया।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

ना है शिक्षक दोषी आज

ना है शिक्षक दोषी आज।

बात तुम्हारी खड़ी खड़ी है।
ना है शिक्षक दोषी आज।
बच्चे आज के बहुत निराले।
माँ बाबा के सपने होते।
बड़े स्कूल में उन्हें पढ़ाते।
उनके बच्चे सबसे अच्छे।
समय नहीं है उनके पास।
घड़ी दो घड़ी बच्चों के संग।
बिता सके वो छन दो चार।
बहुत काम है उनके पास।
बड़े स्कूल में पढ़ने भेजा ।
शिक्षक से है उसको आस।
झक मार कर रूपये देता।
चाहे माँगे लाख हज़ार।
क्यों देते हो दोष उसे अब।
वह भी करता है व्यापर ।
दोष हमारा कुछ अपना है।
कुछ दोषी स्कूल भी यार।
समय निकालकर बच्चों के संग।
खुलकर घूमो करलो प्यार।
नहीं लौटकर उसका बचपन।
आयेगा फिर तुम्हें रिझाने।
और नहीं तुम भी लौटोगे।
अपने यौवन के सपने में।
दोष न देकर करो विचार।
सब स्कूल है एक परिवार।
हर शिक्षक का अपना घर है ।
वो भी माँ है बच्चों वाली।
और पिता जो करते प्यार।
न तो दोषी स्कूल वाले।
न शिक्षक न घर परिवार।
दोष हमारा कुछ अपना है।
और दोषी हमरी सरकार।
और दोषी हमरी सरकार।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

पिताजी

पिता की सही परिभाषा लिखना मुश्किल है।
आपने चन्द शब्दों में जो कुछ भी लिखा है अक्षरशः सत्य है।
पिता परमात्मा तो नहीं है पर उनके बाद वही है।
कौन कहता है कि एक पिता कभी रोते नहीं हैं? वे हर दुख और गम में रोते हैं, पर उनका रोना किसी को भी नज़र नहीं आता है। वे अंदर अंदर ही रोते हैं और आसूओ को पीते रहते हैं।
एक पिता को अपने परिवार और बच्चों से सिर्फ प्यार की अभिलाषा रहती है न कि दया या एहसान की।
पिता एक पत्थर के समान कठोर और अविचल रहने वाला प्राणी है। जिसे बढ़ने और खिलने के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होती है।
पिता को परमात्मा ने एक नायाब तोहफा दिया है। कठोर मन, निरंतर संसार में जूझने की कौशल, दुख सहकर भी अपने बच्चों को सुखी बनाने का निरंतर प्रयत्न करते रहना।
सभी कर्मठ पिताओं को समर्पित।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।