Monthly Archives: March 2018

नये साल की पहली बारिश

नये साल की पहली बारिश।

रिमझिम रिमझिम बरस रही है।

झम झम करके बरसा बरसी।

ठंडी ठंडी हवा बह रही ।

मौसम बड़ी सुहानी हो गयी।

गरज़ गरज़ कर बरसा बरसी।

सोधी सोधी खुशबू मिट्टी की ।

फैल गयी चहुँ ओर दिशाये।

धरती गीली सड़कें गीली।

कुछ कीचड़ भी छोड़ गयी है।

वक़्त शाम की बड़ी सुहानी।

रिमझिम बारिश में घुमने को।

बाग बगीचे नदी किनारे।

मन ललच रहा घुमने को।

छतरी हाथ में लेकर निकले।

मौज मनाने इस बारिस में।

रिमझिम रिमझिम बरखा बरखे।

घुमर घुमर बदरा गरजे।

बहती ठंडी है बयार अब।

गरम हवा गर्मी से राहत।

नये साल की पहली बारिश।

खूब बरस कर हमें भींगायी।

बरखा रानी खूब बरस कर।

झम झम करके हमें भींगायी।

झम झम करके हमें भींगायी।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

जनम दिवस डाक्टर साहब की

आज दिवस है बाईस मार्च ,

हुए इकट्ठे हम सब सज्जन।

उनावासी साल के डाक्टर साहब,

मना रहे हैं जनम दिवस।

आज के दिन ही सन उनचालीस में,

जन्मा था एक नन्हा बालक।

तेज चमकता था ऑखों में ।

घर में बजी बधाई थी।

दादा दादी उल्लासित थे,

खूब बटी मिठाई थी।

बाबू जी पंडित से पूछे।

भाग देख लें बच्चे का,

पत्रा देख पंडित जी बोले ,

बबुआ बनिहै बड़ा डाक्टर ।

उगली पकड़ के चलना सीखा।

स्कूल कालेज पढ़ने भेजा ।

डाक्टर बन बबुआ जब आया।

पूरे गांव में बटी मिठाई।

जन सेवा में डाक्टर साहब।

खूब कमाया नाम वो अपना।

घूम घूम कर गाँव शहर में।

घूमे वे पूरे बिहार में।

जहाँ जहाँ तैनात हुए थे।

जनता में उल्लास भरे थे।

सरकारी अस्पताल में जमकर ,

निष्ठा पूर्वक काम किये थे।

प्यार और सम्मान मिला था,

जहाँ जहाँ वो काम किया था।

ले अवकाश वो साठ बरस में,

बच्चों के संग रहते हैं घुलकर।

जनमानस के सच्चे प्रेमी,

हम सब के वो सगे हितैषी।

शुभकामना है जनम दिवस की,

यही दुआ हम करते हैं।

स्वस्थ्य सदा वो सुखी रहें,

शतायु हो और साथ रहें।

शतायु हो और साथ रहें।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

Importance of Festivals in life

Festivals play important role in our life.

It is the time to join our family.

We may be any where in or around for work.

It is the time to join our family and enjoy.

Leaving our work and duties.

Forgeting our business and worries.

Giving our time to our family and children.

Enjoying with them leaving all our commitments.

Enjoying the best foods and drinks.

Living with our family and friends whole heartedly.

This festival time gives us lots of gifts.

We are with your family and friends.

In our parental home with them.

We can recollect our child hood memories.

our school and college days.

Playing grounds of those child hood days.

Moving in the old street and orchards.

The sweet memories of those period of child hood.

Really festivals give us the complete rest and pleasure.

We must thanks our forefathers.

Who gave us this precious gifts of Festivals.

It is not just a holiday but the boons for us.

To relax fully and enjoy with our families.

Time to meet our relatives.

Most of the festival’s falls on changing season.

New crops new flowers and fruits.

This all increase the importance of Festivals.

Come and celebrate it with joy.

Time and again when ever it comes.

Jaihind jaibharat vendamatram.

समुनदर की लहरें

समुनदर की लहरें उठती हैं, बार बार वेगों से।

किनारों पर मिलने आती हैं , बेकरार अपने प्रियतम से।

न जाने कब होगी ये मुलाकात उनकी।

न जाने कब खतम होगी बेकरारी उनकी।

उनका आना बार बार मिलने की आश में।

किनारों को छूकर लौट जाना तड़पते दिल से।

कब आयेगी मिलन की वो सुहानी घड़ी।

इसी आशा में ही सदियाँ गुजर गयी।

फिर भी आज तक आश नहीं टूटी है उनकी।

वो आती है मिलने प्रियतम को बार बार।

निराश हो लौट जाती है सदियों से हर बार।

यही है जीवन हमारा, जनम लेना ये बार बार।

पिया मिलन की आश में, जनम जनम तक भटकना।

न मिलन हो पाती है उनसे, न रूकता है आना जाना।

ये जनम मृत्यु का चक्र, इस करम का न रुकना।

इस अनंत सागर में ही, जीवन का सार है समाया।

लहरों में ही जीवन की सच्चाई है।

लहरें उठती हैं मिटती हैं, खुद टकराकर किनारों से।

जनम लेते हैं करम करते हैं, न मिलन होती है।

न रूकता है आना जाना, न रूकता है आना जाना।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

नदियाँ अपनी बहती रहे

सूख चली है नदी हमारी, कल कल जो बहती रहती थी।

कटते जंगल कटती शाखें, उजड़ गयी हरियाली है।

वर्षा रानी रूठ गयी है, नदियाँ नाले सूख गयी है।

आओ मिलकर पेड़ लगायें, अपनी भूल को अभी सुधारें।

आने वाले युग के बच्चे, बिन पानी के मर न पायें।

हमने जो ये गलती की है, काट पेड़ शंकट जो लाये।

उस गलती को अभी सुधारें। आओ मिलकर पेड़ लगायें।

आओ मिलकर कसम उठाले। पेड़ नहीं अब हम काटेगे।

और नहीं हम कटने देगें। पेड़ लगायेंगे हम घर घर।

आस पास बीहड़ में जंगल। उसे सीचकर बढ़ने देगें।

देखभाल कर फलनेे देगें। हरियाली चहुँ ओर खिलेगी।

फल फूलों से बाग़ भरेगी। वर्षा रानी खूब सजेगी।

पानी पानी होगी धरती। हर घर में होगी खुशहाली।

पानी की सौग़ात धरा पर। जीते जी हम दे पायेंगे।

सुखी हमारे बच्चे होंगे। पानी बिन वो न तरसेंगे।

पानी बिन वो न तरसेंगे। पानी बिन वो न तरसेंगे।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

शहीदों की व्यथा

शहीदो की व्यथा

सोती रही सरकार आज तक।
नहीं मिला सम्मान शहीदों को।
पर खूब मिला धन दौलत उनको।
जिसने जूती चाटी काग्रेस की।
जेल गये बिना ही बन गये।
फ्रीडम फाइटर घर घर उनके।
पाँच साल की उमर थी उनकी।
जब आजादी मिली थी देश की।
खूब मजे से लूट रहा है।
पेंशन वो फ्रीडम फाइटर की।
और शहीद परिवार देश में।
करते चाकरी उस सज्जन की।
धन्य हमारा देश है भारत।
जहाँ नौटंकी करते नेता।
मौज उड़ाते लूट मचाकर।
मौज उड़ाते लूट मचाकर।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

नींद और निन्दया

नींद पर विजय पाना आसान है।
आपके हाथ में कमान है।
अगर आपको जिंदगी में आगे बढ़ना है।
तो ये आपका ही काम है।
निन्दा तो वरदान है।
आगे बढ़ते रहने का पैगाम है।
आप को आपकी गलतियों का एहसास दिलाती है निन्दा।
निन्दक से बढकर दूसरा कोई हितैषी नहीं।
उससे अच्छा कोई पड़ोसी नहीं।

A challenge is a tool of your success. Without a challenge you can not improve your self. It gives you an opportunity to rise in your life.

Jaihind jaibharat vendamatram.

बहुत दिया देने वाले ने तुमको

बहुत कमाया तूने बहुत बचाया।

खुद नहीं खाया भैया समय गंवाया।

छोड़ के जाना भैया महल ये माया।

साथ नाही चलिहे तोरी कंचन सी काया।

माटी की मूरत तोरी माटी की देहिया।

माटी संग बीलीन होहिये माटी की देहिया।

काहे का गुमान होई जर जहिये देहिया।

नेकी की कमाई करें सुखी रहब भैया।

खाये खेलें सुखी रहें, दान करें भैया

छोटी सी जिंदगानी बाड़ेन मौज करें भैया।

सपना से निकल आयें, योग करें भैया।

सपना से निकल आयें, योग करें भैया

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

स्वभाव और विश्वास

अच्छे स्वभाव की वो खूबी होती है।
जो सदा के लिये सभी को अपना प्रिय बना लेती है ।
कितना भी दूर क्यों नहीं रहते हैं वो।
किसी न किसी पल याद आ ही जाते हैं वो।
स्वभाव इंसान की कमाई हुई सबसे बड़ी दौलत है।
रिश्तों की सबसे बड़ी इमारत है।

हर चीज वहीं मिल जाती है।
जहाँ वो खोयी हुई रहती है।
पर विश्वास वहाँ कभी नहीं मिलता है।
जहाँ हमने एकबार उसे खोया है।
विश्वास ही इनसान की इंसानियत है।
इसे ता जीवन निभाना सीखे,
इसे कभी खोने ना दें
खोने पर इंसानियत मिट जाएगी।
विश्वास ही वो अनदेखी डोर है।
जो हमें एक दूसरे से जोड़े रक्खा है।
ये डोर ही जीवन की सच्चाई है।
इसी डोर से बँधकर हम सभी बहन भाई हैं।

विश्वास ही सभी का सगा है।विश्वास ही हमारा अपना सगा है।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

शुभप्रभात

A great Lady and Icon

I have got the opportunity to read a book published on the 64th birthday of a great lady. It was a family , friends and their relatives who have written their love and affections shown to them all by the great lady.

They have expressed and described Her, as a great Daughter, a great Daughter inlaw, a Wife , a Mother , a Mother inlaw, a Grand mother and agreat Leader Social worker.

She was 2nd among 5 ladies in seniority in her in law’s house. She was well educated having MSC degree from Rurki university , yet she remained as a House maker through out her life. Being a better half of a PHD Schaller and a great Professor of IIT Delhi she remained devoted to the cause of her Semi combined family of 5 brothers and 3 sisters at inlaw’s house, to give them support for getting better education to get higher place in their lives and She achieved this in her life. Her own sons and nieces and nephews more than 15, all most all of them passed out from IITs. They all are highly placed in country and abroad.

She was a master cook at home, Cooking and Feeding was her passion. She used to prepare delicious Gulab Jamun, Mathery, Chats, Dahi wada, and many more dishes to her guests who were regular at her IIT residential house at Delhi . Most of them used to be friends of her husband and sons. Apart from their relatives who used to visit Delhi for their work occasionally. Some times 10-15 guests apart from her husband and sons. Immegine the patients of this great lady who not only used to serve them delicious food in time but also used to help them financially and emotionally. It was not the easy to full fill this Herculean task by an ordinary human beings. She was really a great woman. Never to complain and ever to smile.

It is priase worthy to write and say , She was a great Icon for everyone as a Mother, as a Host, and Care taker, who all benefited from her by one or the other way. It is very true, She represented the whole women of our country, where their roles are all most same as her in every houses. But the other face of the coin nobody has touched. Everyone either from her family or friends and relatives always taken her granted to be loved and fed, no one tired to understand her agony doing all these tirelessly for them. Though she was very happy to her duties. After all she was an ordinary woman and not a Robot or Monster to work tirelessly. I myself feel and want to tell everyone, please don’t take any anti advantages from innocent and gentle people like Her either at home or in offices.

God bless her soul in heaven.

Jaihind jaibharat vendamatram.