Monthly Archives: February 2022

बड़ा भाई

हिंदुओं का रखवाला है, सिक्ख हमारे आँखों का तारा है ।
भारत में हिन्दुओं का अस्तित्व है, उसका श्रेय गुरू तेगबहादुर जी का बलिदान है।
गुरु जी का अटल धैर्य और साधना है ।
भारत माँ का दुलारा, सीमा पर सबसे आगे रहने वाला।
देश और मातृभूमि के लिए, सदा सिर पर कफन बाधकर तैयार रहने वाला ।
हम न कभी अलग थे न हैं , एक ही माँ के दो बेटे हैं ।
बड़ा भाई सिक्ख है तो छोटा भाई मौना है ।
न वो हमसे अलग हैं न हम उनसे, वे बड़े हैं तो हम छोटे हैं ।
हम आपस में सगे भाई हैं , एक ही माँ के जाई हैं ।
हम आपस में सगे भाई हैं, एक ही माँ के जाई हैं ।

जयहिंद-जयभारत-वन्देमातरम।

सत श्री अकाल, वाहे गुरूकी खालसा वाहे गुरू की फ़तह ।

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करबी सच्चाई

यही सच है सच्चाई है, आज की हकीकत है ।
बच्चे बदल गये हैं पढ़ लिख कर, शहर में बस रहे हैं घर छोड़कर ।
मुसीबत तो अब उन शहर वालों पर है, बच्चे शहर छोड़ विदेशों में बस रहे हैं ।
गाँव में कम से कम नाते रिश्तेदार होते हैं, शहर में पड़ोसी भी अनजान होते हैं ।
अन्तिम समय में जीना दुश्वार हो जाता है ।
धन दौलत कोई काम नहीं आता है ।
रोटी पानी के लिये नौकरों पर आश्रित होते हैं ।
अंतिम समय बहुत ही कष्टदायक होते हैं ।
मय्यत दो दिनों तक मोरचरी में पड़े रहते हैं,
बेटों के विदेश से आने की राह देखते हैं ।
यही सच है और यही सच्चाई है, पर आधुनिकता की दौड़ में सभी अंधे हैं ।
आज के पिता कल खुद बूढ़े होंगे ।
समय बदल रहा है यही हाल तो उनका भी होगा ।
बृद्धाश्रम ही एक सहारा है, पहले से ही वहां कमरा बुक करा रहे हैं ।
अवकाश के बाद बुजुर्ग वहीं जा रहे हैं ।
बच्चे विदेशों में दूर अपने बच्चों के लिए सोचते हैं ।
पर माँ बाप के बुढ़ापे पर मौन रहते हैं ।
पर माँ बाप के बुढ़ापे पर मौन रहते हैं ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

जीवन की खूबसूरत शाम

जिंदगी की खूबसूरत शाम आ गयी है ।
भूले-बिसरे भी याद आ रहे हैं ।
अपने और अपनों में जो फर्क होता है ।
आज वह साफ़ साफ़ दीख रहा है ।
जो कभी इज़हार कर न सका था ।
आज उसे खुलकर कह रहा हूँ ।
कल की कौन जाने आज की बात कर रहा हूँ ।
जिंदगी की इस खूबसूरत शाम का,
जी भरकर मज़ा ले रहा हूँ ।
कल जो था वह बीत गया है ।
आज आज की बात कर रहा हूँ ।
जिंदगी की इस खूबसूरत शाम का मज़ा ले रहा हूँ ।
न घर की चिंता है न बच्चों की।
चारपाई पर न अटक जाऊं ,
घिसट घिसट कर न मरना पड़े ।
बस यही सोच सोच कर डर रहा हूँ ।
जिंदगी की इस खूबसूरत शाम का मज़ा ले रहा हूँ ।
न जोड़ने की चिंता है न कुछ खोने की ।
परमात्मा की याद में जीवन गुजार रहा हूँ ।
जिंदगी की इस खूबसूरत शाम का मज़ा ले रहा हूँ ।
न अपनों से गिला है न औरों से,
पुरानी खूबसूरत यादों को ताजा कर रहा हूँ ।
ईश्वर की शरण में हूँ, उन्हीं को याद कर रहा हूँ ।
जीवन की इस खूबसूरत शाम का मज़ा ले रहा हूँ ।
जीवन की इस खूबसूरत शाम का मज़ा ले रहा हूँ ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

माँ की याद

माँ की याद

माँ की याद किसे नहीं आती है,

माँ की याद कब नहीं आती है ।

स्कूल जाते समय माँ की हिदायत,

कापी पेनसिल रख लिया है न।

टीफीन बाक्स रक्ख लिया है न ।

होमवर्क की कापी रक्खा है न ।

जाते जाते भी कहती थी संभल कर जाना ।

दोस्तों से यों ही झगड़ा नहीं करना ।

परीक्षा के दिन जाते जाते दही खिलना ।

पास होने पर मिठाई खिलाना और माथे का चूमना ।

कालेज जाने पर गले लगा कर रोना ।

हमारी बलैया लेना और नमकीन बांधना ।

नौकरी मिलने पर मंदिर में प्रसाद चढ़ाना ।

शादी पर लोकगीतों का गाना ।

दुल्हनिया का परछन करना ।

दूधों नहाओ और पूतो फलो का आशीर्वाद देना।

पोते पोतियो के होने पर बधाई गाना।

हमें क्या क्या नहीं याद आती है ।

माँ के होने का वो सुख हमें बहुत याद आती है ।

पर अब माँ की तस्वीर ही हमें रूलाती है ।

माँ आज भी बहुत याद आती है ।

माँ आज भी बहुत याद आती है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

स्वर कोकिला लता दीदी

स्वर कोकिला लता दीदी

सात दशकों से संगीत लहरी बिखेरतीं रहीं ।
छत्तीस भाषाओँ में गाती रहीं ।
कानों में मधु घोलती रहीं ।
बूढ़े जवान बच्चों को भी मुग्ध करती रहीं ।
हजारों लाखों ही नहीं, करोड़ों को मन्त्र मुग्ध करती रहीं ।
सारी दुनियाँ को अपनी आवाज़ से एक करती रहीं ।
रोगी भी उनकी आवाज की जादू से,
जल्दी ही अस्पताल से घर आते रहते हैं ।
सैनिक भी सीमा पर मुस्तैदी से डटे रहते हैं ।
उनकी मधुर आवाज से निडर खड़े रहते हैं ।
उनकी मधुर आवाज की जादू ,
हम आजतक सुनते रहे हैं ।
इसे अनंत काल तक सुनते ही रहेंगे ।
लता दीदी संगीत की दुनियाँ में,
सदा अमर रहकर हमारे साथ ही रहेंगी ।
लता दीदी संगीत की दुनियाँ में सदा अमर रहेंगी ,अमर रहेंगी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

अतिथि का सम्मान

आपसी मेल-मिलाप और एक दूसरे का सम्मान करने का सबसे सुन्दर व विशिष्ट तरीका है–

1 ) अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत करना ।
2) गिला शिकवा को भूलकर प्रेम और सौहार्द स्नेह से बातें करना ।
3) कम बोलना और अधिक सुनना ।
4) जीवन के मीठे करवे अनुभव को आपस में बांटना ।
5) परिस्थिति और हैसियत के अनुसार एक दूसरे के सुख दुःख में साथ निभाना ।
6) एक साथ बैठकर प्रेम पूर्वक रूचिकर भोजन करना ।
7) अपने बहू बेटे की शिकायत भूलकर भी नहीं करना ।
8) बिदा करते वक़्त कुछ अनुपम उपहार प्रदान करना और पुनः मिलने का आग्रह करना ।


दोस्ती और रिश्तेदारी भी परिवार का एक बहूमूल्य अंग है, इसे कभी बिखरने नहीं देना।
जीवन के अंतिम समय में पति पत्नी और ईश्वर ही हमारे सुख दुःख का अंतिम सहारा है, इसे गाँठ बाँध कर रखना ।
ईश्वर आप सबका मंगल करें ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

आज की लड़की हूँ मैं


लड़की हूँ मैं आज अब कुछ भी कर सकती हूँ ।
आजतक घूंघट में रही घुटती रही हूँ मैं ।
कभी गुलाम तो कभी अभिसारिका बनी रही हूँ मैं ।
आज तक घर में कैद रहकर घर जोड़ती रही हूँ मैं ।
मर्दों की दुनियाँ को गुलज़ार करती रही हूँ मैं ।
माँ बहन बेटी बनकर दुनियाँ समारती रही हूँ मैं ।
पर अब और अधिक यातना सहन कर सकती नहीं हूँ मैं ।
अब बने बनाये घर को भी उजाड़ सकती हूँ मैं ।
लड़की हूँ मैं अब अकेले भी रह सकती हूँ मैं ।
मुझे अब अबला मत समझना सारी दुनिया से अकेले भी लड़ सकती हूँ मैं ।
अब मैं अकेली नहीं हूँ, कानून भी हमारे साथ है ।
माता-पिता की संपत्ति में भी बराबर की हकदार हूँ मैं ।
फिर भी मर्दों से लड़ना चाहती नहीं हूँ मैं ।
बराबर का सम्मान और जीवन जीने का अधिकार चाहती हूँ मैं ।
पुरुषों के साथ मिलकर सम्मान से रहना चाहती हूँ मैं ।
लड़की हूँ अपने अधिकार और सम्मान के लिए लड़ सकती हूँ मैं ।
दुनियां में सम्मान के साथ जीना चाहती हूँ मैं ।
दुनियां में सम्मान के साथ जीना चाहती हूँ ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।