Monthly Archives: September 2016

Rly Centralised Numbers 

 

क्या आप जानते हैं 

 खड़े – खड़े पानी पीने वाले का घुटना दुनिया का कोई डॉक्टर ठीक नहीँ कर सकता !*

तेज पंखे के नीचे या A. C. में सोने से मोटापा बढ़ता है !*

70% दर्द में एक ग्लास गर्म पानी , किसी भी पेन किलर से भी तेज काम करता है !*

कुकर में दाल गलती है , पकती नहीँ , इसीलिए गैस और एसिडिटी करती है !*

अल्युमिनम के बर्तनों के प्रयोग से , अंग्रेजों नें देशभक्त भारतीय क़ैदियों को रोगी बनाया था !*

शर्बत और नारियल पानी सुबह ग्यारह के पहले अमृत है !*

लकवा होते ही , मरीज के नाक में देशी गाय का घी डालने से , लकवा पन्द्रह मिनट मेँ ठीक हो जाता है !*

देशी गाय के शरीर पर हाथ फेरने से , 10 दिन में ब्लड प्रेसर नॉर्मल हो जाता है। 

Walking track group mobile number 

Ashok Joshi ji 9901744533

A.N.Sandhwar ji

0884885905,9431580003

Arjun Ghanshani ji 8105115522

B.P.Yadav ji 07376546095

D.G.Upadhayay 8553007100

Dr.Indarjeet Prashad 09934007175

Gyanchand Jain ji

09977833303

Jayanti Bhai ji 9892458494

Jasbeer Singh Sandhu Ji 9481421885, 8553901885

L.P.Sriwastava ji 8105602144

N.L.Agarwal ji 9632144037

N.M.Mishra ji 9008962160

Narayan ji 9399328943

Ojha ji Korba 09981442282

Radhakishan Nair ji 9986006574

Radhakishan Nair ji 8089618700

Suresh Mandal ji 8095849597,9482771950

Subir Dutta ji 8197077744

S.N.Shukla ji 9811893075

S.K.Sriwastava ji 9886275857

Sarkar Da 08670067460

Satyanarayan ji 7893077769

Suresh Bhatt 09611498620

Sharma ji 09955321107

V.G.Kabra 09414203976

बेटी बड़ी हो गई है 

अब मेरी बेटी थोड़ी सी,  बड़ी हो गई है।

कुछ जिद्दी, कुछ नकचढ़ी हो गई है।

अब अपनी हर बात,मनवाने लगी है।

हमको ही अब वो,  समझाने लगी है।

हर दिन नई नई फरमाइशें  होती है।

 लगता है कि फरमाइशों,की झड़ी लग गई है।

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है।

 अगर डाटता हूँ, तो आखें दिखाती है।

 खुद ही गुस्सा करके रूठ जाती है।

 उसको मनाना बहुत  मुश्किल होता है।

 गुस्से में कभी पटाखा, कभी फूलझड़ी हो गई है।

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है।

 जब वो हँसती है, तो मन को मोह लेती है।

घर के कोने कोने में,उसकी महक होती है।

कई बार उसके अजीब से,सवाल भी होते हैं।

बस अब तो वो जादू की छड़ी हो गई है।

 मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है।

 घर आते ही दिल उसी को पुकारता है।

सपने सारे अब उसी के संवारता है।

दुनियाँ में उसको अलग पहचान दिलानी है।

मेरे कदम से कदम मिलाकर,वो खड़ी हो गई है।

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी होगई है।

 बेटियाँ सब के नसीब में   कहाँ होती है।

रब को जो घर पसंद आए,वहाँ होती है।

 बोये जाते हैं बेटे, पर उग जाती है बेटियाँ।

खाद पानी बेटों को, पर लहराती हैं बेटियां।

स्कूल जाते हैं बेटे, पर पढ़ जाती हैं बेटियां।

मेहनत करते हैं बेटे, पर अव्वल आती हैं बेटियां।

रुलाते हैं जब खूब बेटे,तब हंसाती हैं बेटियां।

नाम करें न करें बेटे,पर नाम कमाती हैं बेटियां।

जब दर्द देते हैं बेटे, तब मरहम लगाती हैं बेटियां।

छोड़ जाते हैं जब बेटे,तो काम आती हैं बेटियां।

आशा रहती है बेटों से,पर पूर्ण करती हैं बेटियां।

सैकड़ों हजारों फरमाइश से, भरे हैं बेटे।

पर समय की नज़ाकत  को, समझती है बेटियां।

बेटी को चांद जैसे,  मत बना कर रखना। 

 कि कोई घूर घूर कर देखे उसको।

बेटी को सूरज जैसा बनाना, ताकि घूरने से पहले। 

 सब की नजर झुकजाये।सबकी नजर झुक जाये।। 

      जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

दोस्तों से सभार मिला है। 

आज के बच्चे 

      दत्ता जी मैं आपके विचारों से सहमत हूँ, पेड़ पौधे और इनसान में समानता है, दोनों एक दूसरों के लिए ही जीते आये हैं, जिस तरह पेड़ों से बीज बिखर कर नये पौधों को जनम देते हैं और फिर उन नये पौधों में वही फल फूल लगते हैं, पर स्थान बदलने तथा जलवायु परिवर्तन के कारण उनके फल फूल में बदलाव आ जाता है, कोई अपने मातृ पेड़ से बड़ा या फिर छोटा फल या फूल देता है, या विशेष मिठास वाला या खट्टा स्वाद वाला। पर वह मातृ पेड़ से ही रहता है, यही इनसान के साथ भी होता है, बेटी बेटा अपने माता पिता के गुणों के साथ ही पैदा लेते हैं, पर उसके पालन पोषण तथा सामाजिक परिवेश बदल जाने पर बदलाव हो जाना एक प्राकृतिक गुण है, इसमें चिंता करने या दुखी होने का कोई कारण नहीं है। 

बापे पूत, परापत घोड़ा,नहियों कुछ तो थोड़म थोड़ा। 

न तो पहले सभी बच्चे माँ बाप के 100 % गुण से  परिपूर्ण थे नहीं अब, कम वेस सभी बच्चे माता पिता तथा समाज के प्रति समर्पित हैं। हालांकि उनके सोचने का तरीका अलग अलग है। 

आज समाज और समय बदल रहा है, हमें भी इस बदलाव के साथ मिलकर चलने की कोशिश करनी चाहिए, इसी में परिवार, समाज और हमारी अपनी भलाई है। कुछ भूलें, कुछ नयी चीजों को अपनायें, खुश रहें, खुशियाँ लुटाते रहें, अपनों में, परिवार में, समाज में और प्रिय मित्रों में, 90%जिन्दगी हमने सुख दुख में जीते चले आ रहे हैं, बांकी 10% आनंद से जीयें। बहुत जोड़कर रक्खे हैं, अब धन नहीं जोड़ें,मन को जोड़ें, परमात्मा के साथ, दीन दुखियों के साथ, दोस्तों के साथ, कम खाएं, गम खायें, यदि अंदर से नहीं हँस सकते हैं, तो कम से कम बाहर से हँसते रहें,शायद आपको हँसते देख हम जैसे दूसरे लोग भी हँसना सीख लें। 

सुप्रभात, आज ही नहीं आने वाला हर दिन हमसबों का मंगलमय हो, यही सुरेश की शुभकामना है। 

    जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

संगति का प्रभाव 

​संगति का प्रभाव तो होना ही है। लोहे चुंबक के साथ रहकर खुद चुंबक बन जाता है, बच्चे कसाई के साथ काम करते करते कसाई बन जाता है, पत्थर जौहरी के पास जाकर हीरा बन जाता है, चंदन मलयागिरी की भिलनी के साथ रहकर चुल्हे का जलावन बनती है और वही बाजार में आकर सोने के भाव बिकती है तथा घर घर को सुवासित करती है, हमारे जैसे लोग आप जैसों के साथ मिलबैठकर इनसान बन जाते हैं, तांबा सोने से मिलकर सोने के भाव बिक जाता है। संसार में लाखों उदाहरण हैं, मुरख भी विद्वानों के साथ रहते रहते विद्वान बन जाता है, यही परमात्मा का संसार में दिया हुआ अटल सत्य है। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

Our relations

​Joshi jee , today there is little feeling and only dealing in relations. A kid is attached to you only if you give him his best favourite chaklets and play with him his favourite games, allowing him to play games on mobile and allow him to watch cartoons on t v, your wife loves you because you full fill her requirements, parents also have expectations from their sons and daughters, they will be looked after well by them in their old age, in every field deals are there and the feeling have less important. Still the feelings have their own value in our lives. Lion only rules and not the deers and jackals in the jungle. We are happy as we have feelings for families, for friends, for society and country. Have good feeling and keep your self smiling. 

Jaihind jaibharat vandematram.

कल का हिसाब क्या रक्खें 

 समय की  इस अनवरत बहती धारा में,

अपने चंद सालों का  हिसाब क्या रखें।

जिंदगी ने  दिया है जब इतना, बेशुमार यहाँ,

तो फिर जो नहीं मिला, उसका हिसाब क्या रखें। 

दोस्तों ने दिया है,  इतना प्यार यहाँ, 

तो दुश्मनी की बातों का हिसाब क्या रखें। 

दिन हैं उजालों से इतने भरपूर यहाँ,

तो रात के अँधेरों का हिसाब क्या रखे।

खुशी के दो पल काफी हैं, खिलने के लिये,

तो फिर उदासियों का,हिसाब क्या रखें। 

हसीन यादों के मंजर, इतने हैं जिंदगानी में, 

तो चंद दुख की बातों का, हिसाब क्या रखें। 

मिले हैं फूल यहाँ इतने, किन्हीं अपनों से, 

फिर काँटों की  चुभन का हिसाब क्या रखें। 

चाँद की चाँदनी जब इतनी दिलकश है, 

तो उसमें भी दाग है ये हिसाब क्या रखें। 

जब खयालों से ही पलक, भर जाती हो दिल में। 

तो फिर मिलने ना मिलने का, हिसाब क्या रखें। 

कुछ तो जरूर बहुत अच्छा है, सभी में यारों, 

फिर जरा सी  बुराइयों का, हिसाब क्या रखें। 

आज तो हम सब खुशहाल हैं  यारो, 

तो आने वाले दुखों का, हिसाब क्या रक्खें। 

बच्चे अभी तो छोटे हैं, हँसते गाते हैं, 

बड़े होकर दूर हो जायेंगे, इसका हिसाब क्या रक्खें। 

नया नया घर है, खुली आसमान है, 

पेड़ पौधोे हरी भरी बगिया भी है।

आसपास खुला मैदान खुली हवा है, 

कल और लोग आयेंगे, नये घर बसेंगे।

घुटन महसूस होगी, पेड़ पौधे कट जायेंगे, 

अभी से इसका हिसाब क्यों रक्खें। 

आज है आज की बात करें, 

जो कभी होने वाला है, उसे क्यों याद करें।

अभी के सुख को भूलाकर, 

क्यों आने वाले दुखों को याद करें।

जो अभी शुरू भी नहीं हुआ है, 

उसका क्योंकर अभी से हिसाब करें।

जो अभी पैदा भी न हुआ हो, 

उसके लिए खिलौने क्यों सजायें।

मूरख है वो जो कल की सोच रहा है, 

आज भूखा रहकर, कल के लिए संयोग रहा है।

आज तो आप हैं, कल का भरोसा क्या है, 

आज तो चैन से सो लें,कल उठ पायेंगे भी।

इसका भरोसा क्या है, इसका भरोसा क्या है।। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।।

दोस्तों से सभार मिला है और कुछ अपनी बात कही है। 

शहीद 

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये हैं, 

माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये हैं। 

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये हैं, 

पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे। 

टॉफियाँ खिलोने साथ में लाते थे, 

गोदी में उठा के खूब खिलखिलाते थे। 

हाथ फेर सर पे प्यार से सहलाते थे। 

ना जाने आज क्यूँ वो चुप हो गए हैं, 

लगता है कि खूब गहरी नींद सो गए हैं। 

नींद से पापा उठो मुन्ना बुलाये हैं। 

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये हैं। 

फौजियों की भीड़ घर क्यूँ आई है, 

पापा का सामान साथ में क्यूँ लाई है। 

क्यों लायी है वो मेडलों के हार, 

आँख में आँसू क्यों बहते हैं बार बार। 

चाचा मामा दादा दादी चीखते हैं क्यूँ, 

माँ मेरी बता वो सर को पीटते हैं क्यूँ। 

गाँव क्यूँ शहीद पापा को बताये हैं, 

ओढ़ के तिरंगा क्यूँ पापा आये हैं। 

माँ तू क्यों इतना रोती है मुझे बता, 

होश हर पल है खोती ये मुझे बता। 

माथे का सिन्दूर क्यूँ है दादी पोछती, 

लाल चूड़ी हाथ में क्यूँ बुआ तोड़ती। 

काले मोतियों की माला क्यूँ उतारी है, 

क्या तुझे माँ हो गया समझना भारी है। 

माँ तेरा ये रूप मुझे ना सुहाये है, 

ओढ़ के तिरंगा क्यूँ पापा आये हैं। 

पापा कहाँ हैं जा रहे ये तो बताओ न माँ, 

चुपचाप से आंसू बहा के यूँ सताओ ना माँ। 

क्यों उनको सब उठा रहे हाथों को बांधकर, 

जय हिन्द बोलते हैं क्यों कंधों पर लादकर। 

दादी खड़ी है क्यूँ भला आँचल को भींचकर, 

आंसू क्यूँ बहे जा रहे हैं आँखों को मींचकर। 

पापा की राह में क्यूँ फूल ये सजाये हैं, 

ओढ़ के तिरंगा क्यूँ पापा आये हैं। 

क्यों लकड़ियों के बीच में पापा को लिटाये हैं।

सब कह रहे हैं राम उनको लेने आये हैं। 

पापा ये दादा कह रहे हैं तुम को जलाऊँ मैं, 

बोलो भला इस आग को कैसे लगाऊं मैं। 

इस आग में समा के साथ छोड़ जाओगे, 

आँखों में आंसू होंगे बहुत याद आओगे। 

अब आया समझ, माँ ने क्यूँ आँसू बहाये हैं , 

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये हैं। 

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये हैं । 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

सभार मित्रों से मिली है। 

महत्व है 

डाक्टर के लिए बीमार का,

मरीज के लिए तीमारदार का,

गहने के लिए सुनार का, 

मालिक के लिए बफादार का।  बड़ा महत्व है। 

बहन के लिए भाई का, 

घर में साले और जमाई का, 

दूध में मक्खन और मलाई का, 

खाने में मिठाई का,   बड़ा महत्व है। 

शादी में सगाई का, 

देश में महंगाई का,

तेल में पेराई का,

मांसाहारी के लिए कसाई का,  बड़ा महत्व है। 

लीडर में बिहारी का, 

बाजार में मारवाड़ी का, 

पान में कत्था सुपारी का,

घर से दूर जबारी का,    बड़ा महत्व है। 

खुश रहने के लिए पड़ोसी का, 

निभाने के लिए दोस्ती का, 

जीवन में अपनी लुगाई का, 

दुख जानने के लिए बिबाई का,    बड़ा महत्व है। 

सोचने समझने के लिए अकल का, 

सुन्दर दीखने के लिए सकल का, 

परीक्षा पास करने के लिए नकल का, 

किसानों के लिए अच्छी फसल का, 

बड़ा महत्व है, भाई हम साथ साथ हैं, 

इसका भी बड़ा महत्व है। बड़ा महत्व है। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।