Monthly Archives: August 2016

बिटिया ने रुलाया 

​हाँ बिटिया तुमने मुझे रुलाया,एक नहीं कई बार रुलाया। 

समाज से लड़ कर भी, जब मैंने तुम्हें कालेज भेजा। 

हठकर जब तुमने नौकरी चुनी, मनपसंद जीवन साथी चुना। 

सज धज कर चली गई, बाबुल को छोड़ ससुराल। 

मैं तब भी बहुत रोया था,तुम्हारे सुखी जीवन के लिए। 

पर बिटिया ये रोना रोना नहीं था, हम खुश होकर रोते थे। 

तेरी मेहनत और लगन से, जीवन में आगे बढ़ते जाने से। 

बिटिया मैं तो आज भी रोता हूँ , इसी चिंता से बार बार, 

तुम्हें कभी दुख और गम न हो। तुम हंसती गाती रहो, 

अपने बच्चों के साथ मुस्काती रहो। खुशियाँ लुटाती रहो।

खुशियाँ लुटाती रहो।

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

सुप्रभात 

​हम संवादों में याद नहीं भेज पाते, 

सुबह सुबह मेरे दोस्त। 

तुम ये न समझ बैठना, 

हम तुम्हें याद नहीं करते। 

अपने तो हमेशा दिल में बसते हैं, 

ईश्वर के बाद वही याद आते हैं। 

संवाद भेजऔर सुप्रभात बोलकर, 

सिर्फ एक दूसरे को याद दिलाना होता है। 

हम तुम्हारे साथ साथ हैं दूर नहीं, 

दूर तो वे लोग रहते हैं जो दिलों में नहीं। 

सुप्रभात, शब्बाखैर, गुडमारनिंग, शत श्री अकाल। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

देह का मान 

​कदर फूलों की नहीं उसकी खुशबू और रंग की होती है। 

फूल दो दिन में मुरझा कर मिट्टी में समा जाती है। 

फल मीठे और रसीले हों तो सभी प्यार से खाते हैं। 

फल लगते हैं बढते, पकते हैं, डालियों से गिर जाते हैं। , 

पेड़ बरसों बरस लहलहाते रहते हैं, फलते रहते हैं। 

इस नश्वर गोरी चमड़ी का गुमान न करो। 

देह का मान न करो, रूप रंग का गुमान न करो। 

कुछ ऐसा काम करो,मरने के बाद भी जिंदा रहो। 

मीठे बोल बोलो, दीन दुखियों की सेवा करते रहो।

जीते जी भी मान पाओ,मरने के बाद भी याद रहो। 

ईश्वर की अनमोल काया को, ऐसे ही लुटाया न करो। 

समाज सेवा करते रहो,मान सम्मान से जीते रहो। 

मान सम्मान से जीते रहो।

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

माता पिता 

​कद्र करो तुम माँ बाबा की, जिसने जनमा है तुमको। 

दुख सुख सह कर भी दोनों ने, तुम्हें सँवारा है उसने। 

बूढ़े और लाचार पिता का, दिल न कभी दुखाना तुम।

हाथ पकड़कर तुम्हें चलाया, जीवन साथ निभाना तुम। 

माँ बाबा का कर्ज है तुम पर,दिल से उसे चुकाना तुम। 

देवों में है देव पिता और , माता देवी है प्यारे। 

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे से, बढ़कर दोनों है प्यारे। 

जीवन सफल तुम्हारे होंगे, सेवा कर लो तुम प्यारे।

सेवा कर लो तुम प्यारे। 

     जयहिंद जयभारत वन्देमातरम

जीओ और जीने दो 

        सभी ग्रुप के मित्रों को सुरेश का सादर अभिवादन, सुप्रभात, आप सबों का जीवन मंगलमय हो, यही शुभकामना के साथ मैं भी दत्ता जी द्वारा उठाए गए गहन विषय पर आप लोगों के साथ ही अपना विचार व्यक्त कर रहा हूँ। 

    मित्रो, दत्ता जी ने कहा है अन्त भला तो सब भला, यह अक्षरशः सत्य है, पर आज के बदलते परिवेश में हम सभी को ये ध्यान रखने की जरूरत है कि हम अपने अपने कर्तव्यों को निभाते हुए, पूरा जीवन दूसरों के लिए ही जीते आये हैं। अब समय आ गया कि हम अपने लिए भी जीने की कोशिश करें, बच्चों को भी खुशी से जीने दें। अगर हम फाइनेंसली सक्षम हैं तो फिर बच्चों पर बोझ क्यों बनें? कहानी में दूबे जी का जीवन बहुत ही अच्छा लगा है। रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते हैं, रिश्ते वास्तव में वो होते हैं जो समय पर बिना स्वार्थ के एक दूसरे के प्रति समर्पित हैं, सुख में साथ देने वाले तो हजारों लोग मिल जाएंगे, पर दुख में साथ निभाने के लिए जो आप के साथ है वही आप का हितैषी और सही रिश्तेदार है। जब तक आप अपना काम खुद करने के लायक हैं,तो दूसरों का एहसान क्यों लें? कल किसने देखा है? पता नही चलते फिरते ही आप खुदा को प्यारे हो जायें।दोस्तों जी लो अपनी मर्जी से अपनी प्रिय घर वाली के साथ। बुढ़ापे में ही सही, न किसी की टोका टोकी, न किसी का डर, हम और हमारी सोन चिरैया, बुलबुल, रानी, मन की मुराद पूरी कर लें, बच्चों को कोसें नहीं, वो तो आप को खुशी से जीने का अवसर दिया है, उनका शुक्रिया अदा करें। उन्हें भी अपनी खुशी में शामिल करें, फिर देखेंगे, बहू बेटों का उत्साह, उसके चेहरे पर मुस्कान। आइये हम सब नयी शुरुआत करें, जीयें और जीने दें। 

          खुशियों के साथ नयी जिन्दगी जीने के लिए आप सबों को हमारी शुभकामनाएं। 

          जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

शराब बंदी 

​                                                                                       हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, शराब में भी बुराई और अच्छाई है,

ये आप पर निर्भर है कि आप कैसे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं ।

 सरकार पूरे देश में शराब बंदी नहीं ला सकती है, यह अटल सच है,

 सरकार को शराब से अरबों रुपये की राशि टैक्स में मिलती है, 

लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है, शराब में बुराइयां है, 

लेकिन सभ्यता के विकास के साथ ही शराब भी रोजमर्रा की जिंदगी 

का एक हिस्सा बन गया है, अतः इसका ईलाज सिर्फ आम आदमी के 

पास ही है, माँ बाप न घर में शराब पीयें न बाहर से शराब पीकर घर 

आयें, अपने बच्चों को बचपन से ही शराब की बुराइयों के बारे में 

बताते रहें,शिक्षा ही से शराब बंदी संभव है, अगर सभी घरवाली ये

 ठान ले कि उसका मर्द कभी भी शराब नहीं पीये तो शराब बनाना

 और बेचना अपने आप ही बंद हो जायेगा। पर इसके लिए मन बनाना 

होगा, मर्दों को समझाना होगा, तभी हम भारत देश को शराब मुक्त 

बना पायेंगे। पर यहाँ तो शहरों में पढी लिखी कमाने वाली लडकियाँ 

भी पब में लड़कों के साथ बैठकर शराब और सिगरेट पीती है और 

मस्ती करती है, तो कौन शराब बंदी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए 

आगे आएगा? जनजागरण के लिए जनअभियान चलाने की जरूरत 

है। जब तक जन जन के मन में इसकी बुराई नहीं पहुंच जाती, 

शराब बंदी संभव नहीं है। गरीब, कमजोर और झोपडपट्टी में रहने 

वालों को सबसे अधिक समझाने की जरूरत है। सबसे अधिक वही 

लोग इसके शिकार होते हैं। शराब की सबसे बड़ी मंडी गांव और 

शहर की झोपडपट्टी ही तो है। उन्हें जागरूक बनायें। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

जय आधुनिक सच 

 मियां-बीबी दोनों मिल खूब कमाते हैं,

तीस लाख का पैकेज दोनों ही पाते हैं।

सुबह आठ बजे नौकरियों पर जाते हैं, 

रात ग्यारह तक ही वापिस आते हैं।

अपने परिवारिक रिश्तों से कतराते हैं, 

अकेले रह कर वह  कैरियर  बनाते हैं।

कोई कुछ मांग न ले वो मुंह छुपाते हैं, 

भीड़ में रहकर भी अकेले रह जाते हैं।

मोटे वेतन की नौकरी छोड़ नहीं पाते हैं,

अपने नन्हे मुन्ने को पाल  नहीं पाते हैं।

फुल टाइम की मेड ऐजेंसी से लाते  हैं 

उसी के जिम्मे वो बच्चा छोड़ जाते हैं।

परिवार को उनका बच्चा नहीं जानता है, 

केवल आया’आंटी को ही पहचानता है।

दादा -दादी, नाना-नानी कौन होता है, 

अनजान है सबसे किसी को न मानता है।

आया ही नहलाती है आया ही खिलाती है,

टिफिन भी रोज़ रोज़ आया ही बनाती है।

यूनिफार्म पहना के स्कूल कैब में बिठाती है,

छुट्टी के बाद कैब से आया ही घर लाती है।

नींद जब आती है तो आया ही सुलाती है,

जैसी भी उसको आती है लोरी सुनाती है।

उसे सुलाने में अक्सर वो भी सो जाती है,

कभी जब मचलता है तो टीवी दिखाती है।

जो टीचर मैम बताती है वही वो मानता है,

देसी खाना छोड कर पीजा बर्गर खाता  है।

वीक ऐन्ड पर मौल में पिकनिक मनाता है, 

संडे की छुट्टी मौम-डैड के  संग बिताता है।

वक्त नहीं रुकता है तेजी से गुजर जाता है,

वह स्कूल से निकल के कालेज में आता है।

कान्वेन्ट में पढ़ने पर इंडिया कहाँ भाता है , 

आगे पढाई करने वह विदेश चला जाता है।

वहाँ नये दोस्त बनते हैं उनमें रम जाता है,

मां-बाप के पैसों से ही खर्चा चलाता है।

धीरे-धीरे वहीं की संस्कृति में रंग जाता है,

मौम डैड से रिश्ता पैसों का रह जाता है।

कुछ दिन में उसे काम वहीं मिल जाता है,

जीवन साथी शीघ्र ढूंढ वहीं बस जाता है।

माँ बाप ने जो देखा ख्वाब वो टूट जाता है,

बेटे के दिमाग में भी कैरियर रह जाता है।

बुढ़ापे में माँ-बाप अब अकेले रह जाते हैं,

जिनकी अनदेखी की उनसे आँखें चुराते हैं।

क्यों इतना कमाया ये सोच के पछताते हैं, 

घुट घुट कर जीते हैं खुद से भी शरमाते हैं।

हाथ पैर ढीले हो जाते, चलने में दुख पाते हैं,

दाढ़- दाँत गिर जाते, मोटे चश्मे लग जाते हैं।

कमर भी झुक जाती, कान नहीं सुन पाते हैं,

वृद्धाश्रम में दाखिल हो, जिंदा ही मर जाते हैं।

सोचना की बच्चे अपने लिए पैदा किया था, 

अथवा विदेश सेवा के लिये ही पढाया था। 

बेटा एडिलेड में है,और बेटी रहती न्यूयार्क,

ब्राईट बच्चों के लिए, हुआ बुढ़ापा डार्क।

बेटा डालर में बंधा, सात समन्दर पार,

चिता जलाने बाप की, गए पड़ोसी चार।

ऑन लाईन पर हो गए, सारे लाड़ दुलार,

दुनियां छोटी हो गई, रिश्ते हैं बीमार।

बूढ़ा-बूढ़ी आँख में, भरते खारा नीर,

हरिद्वार के घाट की, सिडनी में तकदीर।

बंगला गाड़ी बंद है,नौकर करे संवार, 

और लाइन पर बेचकर, बेटा मालोमाल। 

आज बराबर सुनने मिलता, बेटा गया विदेश, 

खुश होते हैं मम्मी डैडी, उनको नहीं कलेष। 

देखा देखी होती रहती, चिन्ता नहीं विशेष। 

भैया चिंता नहीं विशेष। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

बीबी का मान 

​बीबी पर ये व्यंग्य चुटकुले, हँसनेऔर  हँसाने के हैं। 

पर बीबी वह होती क्या है, हम सब उसको सही से जाने। 

सुबह आँख खुलते ही आती। गरमागरम चाय की प्याली।,

हाथ लिये बीबी अपनी, नहा धोकर निकलते ही।

गरमा गरम प्लेट लिये नाश्ते की। साथ बैठकर कर नाश्ता करती।  

बड़े प्यार से कहती है, हरी सब्जी दूध भी लाना है। 

तैयार हो बाहर भी जाइये , टीवी पर चिपके मत रहिये। 

यार दोस्त से मिल कर,धूप में टहलकर घूम फिर आइये। 

सब्जी भाजी दूध भी आ जायेगा, आपका टहलना भी हो जायेगा। 

दोपहर का भोजन भी गरमागरम, सब्जी भाजी दही अचार। 

साथ टेबल पर बैठ खाने का, जीवन का है अपना प्यार। 

शाम होते ही सजती टेबल, नमकीन बिस्कुट चाय गरम।

टीवी चैनल बंद करती है वह, शाम  घूमने को कहती है। 

लौटकर आने पर हर्षित हो, स्वागत करती है मुस्काकर। 

फिर लग जाती है किचन में,  सजती है डायनिंग टेबल,  

गरम रोटी सब्जी चटनी से। कभी नहीं भूली व रखने, 

मीठी डिश या लजीज मिठाई। प्यार से जिसको वही बनायी। 

जब सोने बिस्तर पर जाते, गरमागरम दूध वो लाती। 

माँ के बाद बीबी ही अपनी, यतन से ऐसे सेवा  करती।

पर दुनिया है उसे सताती, मान सम्मान उसे न देती। 

मान सम्मान उसे न देती। 

  जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

आई की याद आयी 

आई रे आई तेरी याद आती है,माँ की गोदी की याद आती है।  

बछड़े को देख मिलते गैया से, गैया  उसको चाटती रहती है। 

स्नेह से उसे निहारती है, तब तेरी याद आती है। 

जीवन में तकलीफ नहीं था, पर माँ, तेरा प्यार नसीब नहीं था। 

माँ तेरी बाँहों में सो जाना , तेरी आँचल में छिप जाना। 

रूठना और मचलना आई, मुझको ये नसीब नहीं था। 

सोच सोच कर ये सारी बातें, आँख हमारी भर जाती है । 

आई रे आई तेरी याद आती है । आज तेरी बहुत याद आती है। 

देखा बच्चों को आज मचलते, मैया की बाँहों में झुलते। 

प्यार दुलार से हँसते गाते, तब मुझको तुम याद हो आयी। 

आई री आई, तेरी आज बहुत याद आयी। 

माँ है रूप भगवान का आई,माँ तुमने मुझे छोड़ के भागी। 

मैं बदनसीब तुम्हें देख न पाया,गोदी तेरी खेल न पाया। 

लोरी तेरी सुना नहीं माँ, बांहों में मैं झुला नहीं माँ। 

विनती करता हूँ तुमसे, अगले जनम तुम्हीं मेरी अम्मा। 

तू ही मेरी आई बनना, तू ही मेरी आई।

माँ  तू ही मेरी आई , याद मुझे बहुत हो आयी। 

याद मुझे बहुत हो आयी। आई मेरी आई।

सभार   जोशी जी 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम।

शिक्षत ना समझ- रक्षाबंधन स्पेशल 

सीमा के माता पिता समझदार और जागरूक थे। लड़के लड़की में भेदभाव न रखते हुए, उसने सीमा को पूरी लगन से शिक्षा दीक्षा देकर आगे बढने में मदद करते रहे। वह बी ए पास कर पास के ही स्कूल में पढाने लगी। तब वे लोग उसकी शादी के लिए सुयोग्य वर की तलाश शुरू कर दिए।संयोग से उसी शहर में उन्हें एक शिक्षित सुयोग्य वर मिल गया। राहुल भी बी ए पास कर उसी शहर में एक प्राइवेट बैंक में नौकरी कर रहा था। उनकी अपनी बहन नेहा की शादी पिछले साल ही पास के शहर में हो चुकी थी, वह अपने ससुराल में खुशहाल थी। राहुल के पिता सरकारी नौकरी से सेवा निवृत्त होकर पेंशन पर अपने परिवार के साथ सुख पूर्वक रह रहे थे। भला परिवार और सज्जन लोग, दोनों परिवारों ने खुशी खुशी रिश्ते की मंजूरी दे दी। खूब धूमधाम से शादी हुई और सीमा अपने ससुराल चली गई। वहीं से वह स्कूल पढाने जाती। 

                   ससुराल में उसे सबों से भरपूर प्यार और स्नेह मिला, सासुमां उसकी हर संभव सहायता किया करती थी। ननद नेहा के आने पर घर में रौनक बढ़ जाती थी, उसके छोटू मन्नू की किलकारी से घर गूंजता रहता था, वह सभी का लाडला जो था। समय गुजरता गया और दो साल बाद सीमा भी माँ बनने वाली थी। घर में बहू को पहला बच्चा होने वाला था, अतः सभी उसे हर हाल में खुश रखने की कोशिश करते और घर के काम काज सभी मिलकर किया करते थे। पर सीमा का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता था, डाक्टर की देखभाल,अच्छे खान पान, और आराम के बावजूद भी वह एनेमिक थी। हरी साक भाजी, दूध, फल,विटामिन और आयरन की गोली से भी उसे कोई लाभ नहीं मिल रहा था। सभी आने वाले संतान और उसकी माँ के लिए चिंतित थे,और सदा ईश्वर से उसकी सलामती की दुआ मांगते रहते थे। 

               आखिर प्रसव की अंतिम घड़ी भी आ ही गई, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।डॉक्टर ने राहुल से सीमा के लिए खून का इन्तजाम करने की हिदायत दी और सीमा को लेबर रूम में भेज दिया गया। प्रसव नॉर्मल नहीं होने वाला था, क्योंकि वह एनेमिक थी और प्रसव पीड़ा सहने की उसे शक्ति नहीं थी। आपरेशन की पूरी तैयारी हो चुकी थी, पर अस्पताल में सीमा के बल्ड ग्रूप का बल्ड नहीं था। परिवार में सिर्फ सीमा के पति राहुल ही अपना बल्ड दे सकता था, क्योंकि उसका और सीमा का ग्रुप भी एक ही था, और उसके माता पिता तो साठ साल से ज्यादा उम्र के थे। पर राहुल क्या जाने अपना बल्ड देने को तैयार ही नहीं हुआ। उधर सीमा घर के चिराग को दुनिया में लाने के लिए मौत से लड़ रही थी और बच्चे का बाप अपनी नासमझी से दोनों को मौत के मुंह में ढकेल रहा था। माता पिता और डाक्टर के समझाने का प्रयास भी विफल रहा। सभी लोग अब सिर्फ भगवान से उनके जीवन की प्रार्थना कर रहे थे, तभी खबर पाकर सीमा की ननद भागी भागी अस्पताल आयी और सीधे डाक्टर के पास जाकर बोली डाक्टर आप मेरा बल्ड ले लें और मेरी भाभी और उसके बच्चे को बचा लें,। आप चिंता न करें, मेरा और भाभी का बल्ड ग्रुप भी एक ही है,मैं स्वस्थ हूँ और और न तो मुझे डायबिटीज है और न ऐड्स, आप निश्चिंत होकर खून निकाल लें। डाक्टर ने भी चैन की सांस ली और नेहा के स्नेह से नवजात शिशु और माँ दोनों को नया जीवन मिला। 

                  सबों ने नेहा और सीमा को बधाई दी। नेहा की माँ अपनी बेटी को सीने से लगा उसे खूब प्यार किया और आशीष दी तथा पोते व बहू को जीवन दान देने के लिए उसकी खूब सराहना की। सप्ताह बाद सीमा नवजात शिशु के साथ घर आ गयी। घर में खुशियां मनायी गयी। राहुल अपनी बहन सीमा की बहुत सराहना की,कहा बहन मुझे तुम पर गर्व है, मांग आज तुम जो भी चाहो, मांग लो मैं तुम्हें जरूर ही तुम्हारा मुंहमांगा इनाम देने को तैयार हूँ। पर नेहा अपने भाई को दो टूक शब्दों में कहा,भाई तुम मुझे क्या दे सकता है? जो अपने बेटे और पत्नी को बचाने के लिए अपना खून नहीं दे पाया वह बहन को क्या देगा? हाँ मैं आज तुम्हें कुछ ऐसी सौगात दे रही हूँ कि दुनिया में कोई भी बहन अपने भाई को आज तक न दिया है और न देगी। मैं आज पूरे परिवार के सदस्यों के सामने कसम खाती हूँ कि ता जिन्दगी तुम्हारी कलाई पर राखी नहीं बांधूगी। भाई पती-पत्नी का रिश्ता सिर्फ दो शरीर का रिश्ता नहीं होता है वरन दो आत्माओं का मिलन होता है।रोटी कपड़ा और सुख सुविधा देकर ही कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता है। वरन दुख सुख में एक दूसरे का काम आना ही सबसे बड़ी तपस्या और त्याग है। भाभी घर के चिराग के लिए अपना जीवन संकट में डाल मौत से लड़ रही थी और लड़ते वक्त भी उसे इस आने वाले संतान की चिंता थी। पर तुम उसे बचाने की बजाय मरने के लिए छोड़ दिया। अकारण अपना खून देने से इनकार कर दिया। मुझे तुम पर गर्व नहीं दया आती है। मैं राखी के पवित्र बंधन का अपमान  नहीं करना चाहती हूं। उसका मन भाई के स्वार्थ से टूट चुका था, अपने नासमझ भाई के लिए उसके दिल में कोई जगह नहीं थी। 

               वह अपनी भाभी और माँ बाप से बिदा ले रोती आँखों से अपनी ससुराल लौट गयी। वह ताउम्र अपने इकलौते भाई को फिर कभी राखी नहीं बांधी। हर साल राहुल राखी के दिन अपनी सूनी कलाई निहार आत्मग्लानि से घुलता रहता है, अपनी नासमझी के लिए बहन और पत्नी से मांफी मांगता रहता है।पत्नी उसे अवश्य ही दुःस्वप्न जानकर मांफ कर दिया है, पर बहन उस घड़ी को कभी भी नहीं भूला पायी है। आज वर्षों बीत गए हैं, सीमा का बेटा जवान हो गया है, नेहा हर साल राखी के दिन मायके आती है, भतीजे को राखी बांधती है और भाई की राखी वैसे ही थाल में सजा छोड़ जाती है। भतीजे द्वारा बुआ को वह सब मान सम्मान व नेग मिल जाता है जो उसे अपने भाई से मिलना था, पर राहुल को आज भी इन्तजार है कि उसकी अपनी बहन मरने के पहले उसे जरूर ही मांफ कर देगी और उसकी सूनी कलाई पर राखी जरूर बांधेगी।                

 जयहिंद जयभारत वन्देमातरम