Monthly Archives: December 2018

दादा की जवानी का राज

बूढ़ा होना और बुढ़ापा आना एक प्राकृतिक नियम है। पर ज्यादातर बुजुर्ग 60 साल के बाद अपने अपने कामों से अलग हो जाते हैं और घर बाहर की सारी जिम्मेदारी अपने अपने बच्चों को सौंप दिया करते हैं। बच्चे भी तब तक तीस चालीसा की उम्र के हो जाते हैं और पूरी जिम्मेदारी संभालने के काबिल हो जाते हैं। उन्हें भी लगता है कि अब हमारे माता-पिता को आराम करने की आवश्यकता है। अतः वे अपने माता-पिता को कहने लगते हैं कि अब आपलोग आराम कीजिये क्योंकि आप बूढ़े हो चुके हैं। यही जुमला घर बाहर बार बार दुहराया जाता है, और बुजुर्ग माता-पिता स्वस्थ्य होते हुए भी काम नहीं करते रहने के कारण अपने को बूढ़े महसूस करने लगते हैं।
पर आज कल के बुजुर्ग माता-पिता, अपने को घरेलू कामों से आजाद होकर सामाजिक कार्यों में व्यस्त हो कर तथा घर बाहर अपने बच्चों के काम में सहयोग कर अपने को उम्र के इस पड़ाव पर भी तरोताजा और तंदुरुस्त रख रहे हैं और बुढ़ापा को धोखा दे रहे हैं।अतः दादा जी न पहले बूढ़े थे न आज। आप भी सदा जवान बने रहने की इस नुस्खा को अपना कर हँसते गुनगुनाते रहें और अपने नवासे नवासियों के साथ खिलखिलाते रहें।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

Santa the great

It is one of the great festivals in the world celebrated by the Christian community all over the world on 25dec. every year. Children are waiting eagerly to receive their favourite gift by Santa.
Dear friends and children, we must thank to God to have a great Santa in our home that is our own Father. Who gives us our all desired wishes not only one day in a year but every day of the year. Can you remember when your wishes were not full filled by your Father in time due to various reasons you were angry and cried without thinking the reasons why it was not given to you? Now you can realised it being a Father, when you are not able to full fill the wishes and desires of your children.
We must thank to God for sending the great Santa to every home as one’s Father.
We Thanks our Father being the great Santa. Long live my Dad, Santa the great.
Jaihind jaibharat vandemataram .

सच्चे दोस्त

तकदीर से मिलते हैं ऐसे दोस्त।
जान है तो जहान है।
धन संपत्ति तो आया गया मेहमान है।
किस्मत में लिखा होगा तो दुबारा मिल जायेगा।
गर ऐसे दोस्त का साथ हो तो जिंदगी दुबारा सबर जायेगी।
खाली हाथ आया था खाली हाथ ही जाना है।
ईश्वर देता है तो छप्पर फाड़ के और लेता है तो उघाड़ के।
पास पड़ोस और रिश्तेदार हमारे सुख में जलते हैं और दुख में हॅसते हैं।
एक सच्चा दोस्त ही सुख दुःख का साथी होता है।
मस्त रहें सदा व्यस्त रहें, सुख दुःख जीवन के दो पहिये हैं।
जीवन की गाड़ी संभाल कर चलायें।
ईश्वर के बाद अपने आप और अपने सच्चे दोस्त पर भरोसा करें।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

हाय रूपैया हाय रूपैया

आज न बेटा रह गया बाप का, और ना बहना भाई का।
भाई रह गया बन कर दुश्मन, दूर अपना जमाई हो गया।
रिश्ते दार पड़ोसी अपना, सबके सब बेगाना हो गया।
माँ और मासी तायी चाची, बुआ भी अनजानी हो गयी।
अपना तो अब पैसा रह गया, पैसे वाला भाई बन गया।
दुखिया और गरीबी जग में, अपना भी बेगाना हो गया।
पैसा पैसा हाय रूपैया,
हाय हाय कर सब को ले गया।
भरा पूरा वो सुखी समय था, रूपया पैसा चाहे कम था।
घर में बप्पा भैया अपना,
दादी दादा सबके सब था।
बुआ के आने पर घर में, त्योहारों का दिन होता था।
बहना जब ससुराल से आती,
भाई का वह मंगल दिन था।
मामा भांजे भांजियों को तब, खूब खिलाते खूब घुमाते।
जीजा जी के घर आने पर, मेहमानों की खूब कदर थी।
अब तो भैया राम राम ही, टेलीफोन पर ही होती है। टेलीफून पर ही होती है। टेलीफोन पर ही होती है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

शेरों के शेर भगत सिंह

शेरों के सरदार भगत सिंह, शेरे दिल का मालिक था।
हुए शहीद जिस धरती माँ पर, वह तो आज लजाती है।
चोर उच्चके देश चलाये, इनसा योगी रोते हैं।
लूट खसोट कर इस माटी को, ऐश विदेश में करते हैं।
भारत माँ की लाज बचाने, हमें भगत सिंह भाते हैं।
कब पैदा होगा वह शेर, किस माँ का वह होगा लाल।
भगतसिंह सुभाष चन्द्र और, कोई होगा लौह पुरुष।
राणा प्रताप शिवाजी होगा, झांसी वाली रानी भी।
रणवाकुरा रंजीत सिंह होगा, पैदा होगा गोबिन्द सिंह।
तब तक भारत नहीं बनेगा, भारत देश भारतीयों का।
लाज बचाने आगे आओ, बच्चो तुम सब बन कर शेर।
बच्चो तुम सब बन कर शेर, बच्चो तुम सब बन कर शेर।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

अवकाश

अवकाश नाम है जिन्दगी से दूर भागने का।
पिता नौकरी से अवकाश लेकर ,
दूसरे ही दिन बूढ़े हो जाते हैं।
रोज रोज देर से सो कर उठते हैं,
अपने ही घर में गैर हो जाते हैं।
न समय पर चाय और न नास्ता,
बढी हुई दाढ़ी और बेमेल कपडा।
हर समय बकबक और किच-किच,
बच्चों को टोका टोकी आम बात होती है।
आफिस वाला रुतबा जो नहीं मिलता है।
हर महीने की वो पहली तारीख,
अब जेब में आधी ही रकम आती है।
मन में टीस उठती है मन दुखी होता है।
पर वह यह भूल जाता है कि बच्चे भी कमाते हैं।
उनकी परेशानी और दायित्व पूरी हो गयी है।
फिर भी ज्यादेतर सरकारी बाबू दुखी ही रहते हैं।
शानो शौकत जो नौकरी में थी वह नहीं है।
घर का मालिक भी अब बेटा बहू ही है।
यही सब सोच कर वह दुखी रहता है।
परिवार और पड़ोसी को भी परेशान करता है।
अवकाश लेकर पिता शायद ही खुशहाल रहता है।
माँ पहले भी घर के काम में उलझी रहती थी।
आज भी उनका नियम वही पुराना है।
पहले पति और बच्चों की जिम्मेदारी थी।
आज पोते पोती और पति की जिम्मेदारी है।
न कल उनका अपना था न आज उनका अपना है।
शायद जीते जी माँ का यही सपना था।
हमारे बच्चे खुशहाल रहें, परिवार सुखी रहे।
माँ को न तब कभी अवकाश मिला न आज।
उन्हें तो बस चाहिए सुखी परिवार।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

अजनबी

वोअजनबी दिल पे दस्तक दे गया और जिंदगी भर का चैन ले गया।
आज भी याद आती है उन लम्हों की, मन में तडप और तन में आग लग जाती है।
बचपन की वो यादें यों ही तड़पाती है।
कब हम बड़े हो गये और वो हमसे दूर हो गये।
अजनबी वो भी किसी अजनबी शहर में गुम हो गये।
यादों के शहर में याद आता है आज भी वो अजनबी हमें तड़पाता है।
आज भी वो अजनबी हमें तड़पता है।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

अपना फर्ज

कहानी सच को दर्शाती है।
पर आज की पीढ़ी इसे नकारती है।
आप का ये फर्ज था,

कहकर हमें सुनाती है।
अपना फर्ज वह भूल जाता है।
समय बहुत बलवान है,
उसे नहीं इसका ज्ञान है।
वह भी पछतायेगा, अपने बुढ़ापे में।
जब उसका भी बुरा हाल होगा ।
बच्चे उसे भी तरसायेंगे, रूलायेंगे।
तब अपना कर्म उसे याद आयेगा।
माँ बाप का दिल दुखाना उसे,
अंतिम समय उसकी याद दिलायेगा।
समय अभी भी शेष है,
माँ बाप का आदर करे ,
अपना बुढ़ापा सुखमय करे।
नयी पीढ़ी अभी भी चेत जाये।
माँ बाप की दुआ पाये।

जयहिन्द, जयभारत, वन्देमातरम।