Monthly Archives: February 2021

हिन्दू सिक्ख हैं सगे भाई

हिन्दू सिक्ख सगे भाई हैं, एक ही माँ के लाल हैं ।

बड़ा बेटा है गुरू अमानत, हिन्दुओं के नाज है ।

रखवाले हैं हिन्दू धरम का, दुश्मनों के काल हैं ।

सीमा पर सबसे आगे वह, भारत माँ के लाल हैं ।

आँखो का तारा है भाई, माँ बहनों की लाज है।

नहीं कभी हम अलग हुए हैं, नहीं आपस में बैर है।

सगे भाई हम दोनों ही हैं , एक बड़े एक छोटे हैं ।

बेटी रोटी का रिश्ता है, आपस में हम एक हैं ।

एक ही माँ के हम बेटे हैं, सगे सगे हम भाई हैं ।

एक ही माँ के दो बेटे हैं, सगे सगे हम भाई हैं ।

वाहे गुरू की खालसा, जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल ।

जयहिंद-जयभारत-वन्देमातरम।

अभी अभी मैं जीना सीखा हूँ

आज कल मैं बस अपने मन का ही करता हूँ ।

सुबह देर से उठता हूँ और रात देर से सोता हूँ ।

न कभी चाय पीता हूँ न काफ़ी पीता हूँ ।

सुबह रोज ताजे फल और सूखे मेवा खाता हूँ ।

खाने के बाद हर रोज मिठाई नहीं मैं गुड खाता हूँ ।

रोटियाँ कम और हरी सब्जियां भरपूर खाता हूँ ।

ठंढा पानी और ठंढी पेय मैं कभी नहीं पीता हूँ ।

हाँ हर वक्त तसल्ली से गरम पानी जरूर पीता हूँ ।

न होटलों में जाता हूँ न बाहर की तलीभूनी खाता हूँ ।

पर घर के बने नमकीन और पकौड़े मजे में खाता हूँ ।

पानी पूरी और नारियल की मिठाई भी जरूर खाता हूँ ।

सत्तर वसंत देख चुके हैं, शतक पूरा करना चाहता हूँ ।

करोना ने रोक रक्खा है, पर मीलभर जरूर चलता हूँ ।

दोस्तों से मिलना नहीं होता, पर बातें जरूर करता हूँ ।

बच्चों के साथ रहता हूँ, पर टोका टोकी से दूर रहता हूँ ।

क्या करूँ अभी अभी खुद के लिये जीना सीखा हूँ ।

लिखने पढ़ने का शौक तो मुझे बचपन से ही था।

पर कहानी कविता पिछले पन्द्रह साल से ही लिखता हूँ ।

तुक बंदी ही सही, पर समय जरूर गुजार लेता हूँ ।

भाई अभी अभी मैं खुद के लिये जीना सीखा हूँ ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

पीएम तो मोदी ही रहना

बिके हुए थे पत्रकार तब, बिकते थे नेता सांसद ।
बिकी हुई थी अफसरसाही, बिकी हुई थी न्यायालय ।
बिकी हुई थी पुलिस महकमा, जब थी काँग्रेस की शासन ।
रोती थी जनता किस्मत पर, मुँह पर लगा हुआ था ताला ।
इमरजेन्सी का भूत था सर पर, बन्ध्याकरण करवा डाला ।
रोज नये दंगे होते थे, और बेहाल थी सारी जनता ।
बरबादी का आलम इतना, बिना शस्त्र की थी सेना ।
बर्फीले सियाचिन में, मरती थी अपनी सेना ।
लूट खसोट की पूरी टोली, रोती है घड़ियाली आँसू ।
जनता जाग गयी है अब तो, पीएम तो मोदी ही रहना ।
बीजेपी सरकार देश में, भारत देश का मान बढ़ाना ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

देखा मैंने एक सपना

रात नींद में सोया मैंने, देखा एक अनोखा सपना ।

बगिया के पेड़ों पर बैठी, कोयल और सुनहरी मैना।

कोयल कूक रही थी धुन में, चीची शोर मचाती मैना।

जैसे होड़ लगा हो उनमें, दोनों का ये गीत सुनाना।

एक दूजे से होड़ लगाती, जोर जोर से खूब चहकना।

भरी नींद में ऐसा सुन्दर, मैंने देखा है ये सपना ।

कोयल की मीठी बाणी व, मैना का चीची करना।

खोया था सपनों में तब मैं, कानों में मिश्री सा घुलना।

आँख खुली तो बीराना था, न थी कोयल ना थी मैना ।

कहाँ बाग और कहाँ बगीचे, ईट पत्थर का बना आशियाना ।

शहरों का ये बास बसेरा, महल अटारी नया पुराना ।

कहीं कहीं है बाग बगीचे, नहीं गाँव जैसा अंगना ।

नहीं कूक कोयल की मीठी, नहीं चहकती है मैना।

बाग बगीचे खेतों वाली, गाँव का अपना घर अंगना।

सपना ये सब सपना हो गया, हुआ है जबसे शहर में रहना ।

सपना ये सब सपना हो गया, हुआ है जबसे शहर में रहना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

पति पत्नी

पत्नी है तो ये मकान एक घर है ।
पत्नी है तो घर घर नहीं स्वर्ग है।
पत्नी है तो थाली में भोजन है ।
पत्नी है तो घर में बच्चों की किलकारी है ।
पत्नी है तो घर में सुख शांति है।
पत्नी है तो ये घर ही स्वर्ग है।
पत्नी है तो घर एक मंदिर है।
पत्नी है तो घर में रौनक है ।
पत्नी है तो घर में लक्ष्मी का वास है
बिना पत्नी घर भूत का डेरा है ।
पति है तो पत्नी सुरक्षित है।
पति है तो बच्चे निडर हैं ।
पति है तो घर में कोई दुःखी नहीं है ।
पति घर की छत और मजबूत दरवाजे हैं ।
पति पत्नी एक दूसरे के सहारे हैं ।
एक के बिना दूसरा अधूरे हैं ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

प्रेम, प्रणय, प्रजनन, परिवार, परवरिश, पेट, परिणाम, पारगमन, पुनर्जन्म।

भरी जवानी प्रेम हुई थी, प्रणय बंधन में मैं बंधा।

बस गया परिवार अपना, बच्चों का भी जनम हुआ ।

मेहनत कर दिन रात हमने, उन सबका परवरिश किया ।

पेट के खातिर खूब पसीना, बहा बहा कर जमा किया ।

ज़रूरत थी बस दो रोटी की, हमने लाखों जमा किया ।

क्या परिणाम हुआ सब उसका, सब कुछ यहीं तो पड़ा रहा ।

मरने बाद नहीं कुछ अपना, साथ नहीं वो धन आया ।

पारगमन पर सभी हमारे, अपने भी कोई काम न आया ।

हाय हाय कर पूरा जीवन, खून पसीना खूब बहाया।

धन दौलत तो जोड़ा हमने, प्रभु से नाता नहीं किया ।

पुनर्जनम हो वापस आया, पिछली गलती न दुहराया ।

दान धर्म सद्कर्म करने को, जनम दूसरा हमने पाया ।

सोच समझले दुनियाँ वाले, कारज परहित करले भाया।

यही जनम है पास तुम्हारे, प्रभु भजन कर ले रे भाया।

प्रभु भजन कर ले रे भाया। प्रभु भजन कर ले रे भाया।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

माँ तो बस माँ होती है

माँ की ये महानता ही तो होती है,
उसकी कोई सीमा कहाँ होती है ।
माँ तो बस एक माँ होती है,
धरती पर ईश्वर की छवि होती है ।
वह भी एक साधारण मनुष्य है ,
उसे भी कभी दुःख दर्द होता है ।
पर नहीं माँ तो ईश्वर का रूप होती है,
उसे न कभी दुःख न पीड़ा होती है ।
बच्चों के सुख के लिये ही वह जीती है,
सभी बच्चों की माँ कल्पवृक्ष होती है ।
माँ तो बस एक माँ होती है ।
माँ तो बस एक माँ होती है
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

कौन है असली किसान

किसान के पास है उसका खेत और बाग।
उसके पास है उसकी भैंस और गाय।
उसके पास है उसकी भेड़ बकरियों का झुण्ड ।
किसान के पास है मुर्गियों का मुर्गी खाना ।
कहो कैसे ये सब छोड़ करे वो दिल्ली में धरना ।
कौन डालेगा खेतों में पानी और तोड़ेगा फल और भाजी।
कौन चरायेगा इन भेड़ बकरियों को रोज रोज ।
कौन उठायेगा मुर्गियोंके अंडे और कौन डालेगा इन्हें चारा।
धरने पर बैठे तो नकली किसान हैं, दिहारी के मजदूर हैं ।
धरने पर बैठे नकली किसान ये देश के गद्दार हैं ।
धरने पर बैठे नकली किसान ये टुकड़े टुकड़े गैंग वाले हैं ।
धरने पर बैठे नकली किसान खालिस्तानी आतंकी हैं ।
गनीमत है ये बीजेपी की मोदी सरकार है ।
अगर ये होती कांग्रेस की अपनी सरकार ,
तो कब के किया होता गोलियों से स्वागत ।
जब उसने पार्लियामेंट पर साधुओं को नहीं छोड़ा ।
एक इन्दिरा के बदले हजारों सिक्खों को मरवा डाला ।
इमरजेन्सी में लाखों हिन्दुओं का नसबन्दी करवा डाला ।
मुंबई हमले के बाद हिन्दुओं को ही गुनाहगार बता दिया ।
ये बीजेपी सरकार देश की जनता की आमनत है।
मोदी मोदी नहीं सौ करोड़ जनता की आत्मा है ।
हमें हमारे प्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी पर गर्व है ।
जिसने अभी तक धैर्य से काम करता आ रहा है ।
उकसाने पर भी गोलियाँ नहीं चलवाई है ।
शांति वार्ता से उन्हें समझाने की कोशिश कर रही है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

इनसान मदारी का खिलौना है

बदलते रहना ही जिंदगी है, रूक जाना मौत है।
आइना भी झूठ बोलता है, दायें को बायाँ और बायें को दायां कहता है ।
इनसान भी क्या चीज है, रात में जागता और आधा दिन तक सोता है ।
सुख से जीने के लिए दिन-रात भागता रहता है ।
महल अटारी बंगला गाड़ी , सोने चांदी से भरी तिजौरी ।
सब कुछ तो यहीं छोड़ जाता है ।
बुढ़ापे और बीमारी में ये कोई काम नहीं आता है ।
खुद दुःख भोगता है और औरों को भी दुःखी करता है ।
पाई पाई जोड़कर आखिर में सब यहीं छोड़ जाता है ।
इनसान भी क्या चीज है, जो खुद न समझा वो दुनियाँ को समझाता रहता है ।
मिट्टी से बना है मिट्टी में ही मिलना है, फिर काहे कि ये शोर शराबा है।
आज यहाँ है कल कहाँ जायेगा, ये भी तो पता नहीं है ।
इनसान सचमुच में आज इनसान नहीं, वो तो मदारी का खिलौना है ।
सचमुच इनसान मदारी का खिलौना है ।
वह मदारी का खिलौना है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम