Monthly Archives: May 2020

वक़्त का इन्तजार

वक़्त को वक़्त नहीं लगता गुजरने में।

इनसान को वक़्त नहीं लगता बदलने में।

बच्चों को वक़्त नहीं लगता बढ़ने में।

वक़्त नहीं लगता जवानी से बुढ़ापा आने में।

वक़्त गुजर गया अपना आशियाना बनाने में।

कभी वक़्त ही न मिला माँ बाप की सेवा का।

कभी वक़्त ही न मिला अपनों से मिलने का।

क्योंकि जोड़ता रहा उनके लिये तिनका-तिनका।

और आज वक़्त आ गया उन्हीं से बिछड़ने का ।

आज वही अपनों को वक़्त नहीं है मिलने का।

चार कंधों के इन्तजार में ही वक़्त निकल गया।

वक़्त का क्या पता वह हमसे ऐसे निकल गया।

परलोक के लिये कुछ दान धर्म भी नहीं किया।

वक़्त के इन्तजार में ऐसे ही वक़्त निकल गया।

वक़्त के इन्तजार में ऐसे ही वक़्त निकल गया।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

रामलला का मंदिर

मन मंदिर में बसा राम जी, हर हिन्दू के तनमन में जी ।

घर घर मंदिर गली गली में, राम लला क्यों बेघर जी।

राम लला की जनम भूमी पर, वर्षों ताले लटके जी ।

धन्य हो गये भारत वासी, बी जे पी सरकार से जी।

जनम भूमी आजाद हो गयी, पंतप्रधान हैं मोदी जी।

छब्बीस मई की पुण्य दिवस पर, मंदिर आज से बनने जी ।

सिया राम की धवल प्रतिमा, मंदिर में है सजने जी।

दुनियां भर के सब हिन्दू की, परमधाम है बनने जी।

अयोध्या पुरी है परमधाम जी, रामलला का मंदिर जी।

है रामलला का मंदिर जी, है रामलला का मंदिर जी ।

सुरेश मंडल ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

OLQ VS ALQ pt.2

Local current flowing

It was 1978, when I was posted from 27 Hunter sqn. to 14 Hunter sqn. AF stn.5wing . I was working in DSS in shifts. Those days Hunter A/C was very important for AF. It was a fighter come bomber A/C. having 4 guns of 150 round each total 600 rounds. 18 rockets loaded on each outer wings and 500lbs bomb on each inner wings. During 1965 and 1971 war it has performed tremendously and destroyed many enemies tanks and other targets. Many of their pilots got Virchakra from those Hunter sqn. Our 14 sqn. CO wg.cmdr Kahai was also one among those pilots.

One day I was in after noon duties. Morning shift A/C flown only one detail and there were no snags reported. We were to sign only LFS and placing A/C in side hanger. But not allowed to pack up before 6pm. But if work left we have to finish till late night. So we all tradesmen were chit chatting and gossiping there in DSS.

My senior man i/c electrical trade Cpl Robin asked me, Cpl Mandal let us find out the local current flowing on A462 A/C in side the hanger. I reminded him that this Air craft is under repair and investigation of 1 BRD. He told don’t worry I will take permission from desk i/c WO Ram fitter one. We were permitted . We have collected the required tools and a bunch of thin copper wires to wrap up across the brunt fuse as these fuses were in short supply from UK. and an old news papers.

We reached to the A/C, connected the battery, opened the starting panel. I asked Cpl Robin to sit in the cockpit and switch on the battery.

Nothing happened, then asked him to switch off the battery, he did. I closed the starting panel and asked him to switch on battery and the IPN motor. No sooner he switched on IPN motor electrical supplies were switched off automatically. I asked him to switch off battery and I replaced the fuse in system on supply panel. Opened the starting panel and placed the four fold news papers in between starting panel and A/C structure and secured it. I asked Cpl Robin to switch on the whole system again. He did and nothing abnormal happened. I asked him to get down and confirmed the local current flowing to him. It was nothing but the HT cable of High frequency unit running through the panel was damaged and its broken stands were piercing the electrical cables passing in that area and used to ground it and due to this short circuit fuse used to burnt.

He immediately informed desk i/c WO Ram. Who was surprised to listen that within half an hour the snag was rectified which was beyond the capacity of electrical officer who was a flying officer and had declared it some local current flowing and work order raised for one BRD.

He informed STO in his office in R &SS who came ringing to DSS hanger where we were waiting for him. He asked Cpl Robin, he told sir Cpl Mandal will narrate you in full details as he only had found out the reason for local current flowing. I narrated him the full story and shown him practically. He was very happy and tapped my soldiers saying good job done.

Next day Air craft was taken to R’&SS for further servicing as it was not flown more than 5 months and replacement of HT cables.

That was my first major snag rectification as a Cpl.

Jaihind jaibharat vandemataram.

भारत का अभिमान

सोने की चिड़िया था भारत, कलाकारी का खान रहा है ।
दुनियां में भारत के जैसा, और न कोई देश रहा है ।
गर्वित हैं हम भारतवासी, पूर्वज अपने थे सन्यासी ।

उनलोगों ने काम किये हैं, दुनियाँ भर में नाम किये हैं ।

बना गये कितने मंदिर को, और गुफाएं बना गये हैं ।

आलीशान महल व मंदिर, वेधशालाए बना गये हैं ।

पूल बनाये थे समुद्र पर , अबतक खड़े निशान यहाँ हैं ।

गंगा यमुना रावी सतलुज, ब्रह्मपुत्र नदियों का पानी।

इस धरती को स्वर्ग बनाया, महानदी नर्मदा कावेरी ।

गोदावरी दक्षिण भारत की, गंगा कहलाती है अपनी।

शान हमारी मिट्टी का है, भारत माँ के हम अभिमानी ।

भारत माँ के हम अभिमानी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

स्वार्थ

स्वार्थी संसार में घनेरे होते हैं,

न वो अपने होते हैं न पराये होते हैं।

स्वार्थ संसार का वह विषम रोग है,

जो पैदा जनम के साथ होते हैं।

स्वार्थ रिश्ते ही नहीं घर और देश जलाते हैं,

वही यहाँ जयचन्द तो कहीं मान सिंह बनाते हैं ।

स्वार्थी ही तो आज पूरी दुनियाँ में करोना फैल रहे हैं ।

स्वार्थी आज लाखों मजदूरों को बेघर कर रहे हैं ।

स्वार्थी ही मजहब की आढ में दंगा फैला रहे हैं ।

स्वार्थी समाज का एक घिनौना कोढ़ है,

हमें इस घिनौने कोढ़ को मिटाना है ।

ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना है ।

न उनसे कोई लेनदेन न कोई नाता रखना है ।

इस कोढ़ को समूल मिटाना है ।

इस कोढ़ को समूल मिटाना है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

भूख

संसार में शिशु जनम लते ही रोने लगते हैं, और माँ उन्हें अपना दूध पिलाकर शांत करती है । जन्म लेते ही इनसान के साथ ही भूख का भी जन्म होता है और ये इनसान के मरते दम तक उसका साथ नहीं छोड़ता है । यह भूख हमारे जीवन का अभिन्न अंग है और निरंतर भूख की तृप्ति से ही जीवों का जीवन बना रहता है । अतः भूख हमारा जीवन आधार है ।

जैसे जैसे इनसान बड़ा होता जाता है, उसकी दूसरी भूख का भी जन्म होता है और वह है जिज्ञासा, जानने और समझने की भूख। वह आसपास की चीजों को अपने नन्हे नन्हे हाथों से छूता है , मुँह से पकड़ता है, उसे समझने की कोशिश करता है । हम जो बोलते हैं, हरकतें करते हैं , वह उसे धीरे-धीरे सीखने और समझने की कोशिश करता है । जब वह बोलने और चलने लगता है, तो हर रोज नयी नयी हरकतें करते हुए, वह नयी नयी चीजें सीखता रहता है । पाँच साल से बीस साल की उम्र तक वह एक परिपक्व समझदार और जिम्मेदार नागरिक बन जाता है । इसी बीच उनकी अलग अलग भूख का भी जन्म होता है । ये भूख है स्वाद, गंध, स्पर्श, रूप सौन्दर्य, संगीत, लालच, मद, निन्दा, घृणा, द्वेष, दया, क्षमा, और आत्मज्ञान व आध्यात्मिक चिंतन का ।

जो इनसान लालच, निन्दा, घृणा, द्वेष और मद आदि भूख में उलझ जाता है, उनका जीवन नरक हो जाता है । वह परिवार और समाज के लिये कोढ़ हो जाता है । अपने साथ साथ अपने परिवार को भी नरक में धकेल देता है ।

दूसरी तरफ जिसकी भूख स्वाद गंध स्पर्श और रूप सौन्दर्य में उलझ जाती है, वह संसारिक मोह माया में फँसकर संसारी गृहस्थी की गाड़ी खीचते हुए सारा जीवन बिता देते हैं और यही वो समुदाय है जिसके चलते श्रृष्टि का अनवरत सिलसिला चलता रहता है ।

तीसरी तरफ जिसकी भूख संगीत, दया, क्षमा और आत्मज्ञान व आध्यात्मिक चिंतन की हो जाती है, वह संसार में रहते हुए भी अपने सांसारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए, संसार के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों में से एक हो जाते हैं।

अतः आप अपने भूख पर नियंत्रण कर स्वयं को संसार के लिये समर्पित करें और अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करें ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

अपना पराया

साथ रहे जो दुख में तेरे, खुशी मनाये सुख में ।
दूर रहे या पास रहे वो, बना रहे जो दिल में ।
भाई बहना नाते रिश्ते, मित्र स्नेही सबके ।
सचमुच में जो दुख का साथी, वही है अपना भाई ।
सच में ही वह भाव का भूखा, नहीं वो भूखा धन का।
ऐसे अपने अपने हो तो, वो ही अपना भाई ।
दिल से दिल का रिश्ता जिसका,सचमुच आपना भाई ।
न ढूंढे अपनों को घर में, न ढूंढे अपनों में ।
अपने अपने सभी वो अपने, स्वार्थी हैं सब अपने ।
बिन स्वारथ जो दुख में साथी, वो ही अपना भाई ।
भैया वो ही अपना भाई ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

House hold work

All most 45days passed in lockdown. Every day our routine at home is same. Earlier sleeping and late getting up to kill the time. No job, no work, no commitment for Elders at home in the city but there is no change in the routine of ladies at all. Late night sleeping and early morning getting up, preparing breakfast lunch and dinner, washing utensils, washing clothes in the machine, cleaning and mopping houses. Taking care of Elders and children. They have their work even more than earlier as now no maid servant is coming and helping them.

I am really surprised to see them doing everything without any complain. We Elders are really selfish. May be few of us supporting them in their routine work but most of us are just killing our time,eating sheeting and sleeping. How ungrateful we are? The reality is that we have not learned house hold work in our life time. Only busy making money out side home. It is time we must teach our male children too, for house hold work , so that they can value it and support their partners at home when ever they are idle at home. Cooperating each other in their work.

Jaihind jaibharat vandemataram.

छिचालीसवीं वर्षगाँठ

आज के दिन पाँच मई सन उन्नीस सौ चौहत्तर में हम दोनों का पाणिग्रहण विधि-विधानके साथ टाटानगर जमशेदपुर के बारीगोडा बस्ती में हुआ था । उस दिन से आज तक हम दोनों एक दूसरे के सुख दुःख में साथ साथ हैं । उम्र के इस पड़ाव तक पहुँचने में हमने बहुत ही उतार चढ़ाव देखा है । पर एक दूसरे का हाथ पकड़े हमने सभी बाधाओं को पार करते हुए सुखमय जीवन जीते आ रहे हैं ।

बच्चों की परवरिश में जितना योगदान मेरी धर्म पत्नी का रहा है उतना मेरा नहीं । उसकी दूरदर्शिता और लगन की बदौलत आज बच्चे उस मुकाम पर पहुँचे हुए हैं , जिसपर सभी माता-पिता को गर्व होता है । उनकी हस्तकला का क्या कहना, एक से एक नायाब सूई धागे की कारीगरी घर के दीवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं । आज भी वह अपने सातवीं कक्षा में पढ़ते नाती की ट्यूशन टीचर है।

माँ के हाथों का खाना तो सबों के लिये भगवान का प्रसाद होता है और मैं भी उसका अपवाद नहीं हूँ । पर पिछले 46 वर्षों से पत्नी के हाथों का भोजन करते हुए, किसी भी बड़े से बड़े होटल का खाना आज तक रास नहीं आया है । इनके हाथों में जादू है, जो कोई भी डिश बना दे मन नहीं भरता, पर पेट तो भाई अपना है , उसका ख्याल रखना पड़ता है ।

मुझे आज तक याद नहीं है, कि वह अपने लिये कभी कुछ माँगी हो। जनम दिन हो या शादी की सालगिरह या कोई भी पर्व त्यौहार । और मैं भी आजतक उसे कोई उपहार नहीं दे पाया हूँ । पर मैंने हर वो चीज़ उसे समय से पहले ही दिया, जिसकी उसे जरूरत और चाह होती है । अब इस उम्र में उपहार का क्या, हम एक दूसरे को अपने अपने प्यार और सहयोग का उपहार देते आ रहे हैं और आज भी उसी उपहार के साथ हम दोनों अपने 46 वी सालगिरह बंगलौर के अपने फ्लैट पर मना रहे हैं । आशा करते हैं कि हम दोनों अपनी साठवी सालगिरह भी ऐसे ही मना पायेंगे । आपलोगों से शुभकामनाओं की आशा रखते हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

Importance of mandir

I am a Sanatani, I follow Sanatan Dharma. Hindu is not a Dharma but is the way of living life. From birth to death it teaches us to live like human beings. All the KARMA and Process it teaches is only to keep balance with the nature. We depend on the nature for our every needs. All those things essential for our life is free for everyone in the nature. The Sunlight, Air, Water, Salt, Plants all these are free for every one and available every where in sufficient quantities but few of us controlling them and exploiting more than their needs. Due to that the nature is imbalanced and it responses its own Bay to balance it self. And we get a Tsunami, Earthquake, Numerous Diseases, Floods, Droughts , wildfires etc. We pray to God, we worship in the Temples, Churches, Mosks , Gurudwaras and various places to protect us from these miseries. Some times our prayers are heard but most of the time it is not.

Here is the principle behind this, God is only one and He is every where, He is neither hiding in Temples nor resting in the Churches. He is with us and those believe it their prayers are heard any where and not only in a big Mandir or Church. Take the today’s example in the whole world, every one is afraid of Carona and praying every where in small and big Temples and Churches but the prayers are not heard. Daily thousands of people are dying and suffering from Carona. If the God is there in those places why He is not having pity on us?

Answer is simple God is not there resting inside, it is a great lesson for us to desist us from those places and stop donating there. It will be worth to donate money for the welfare of humanities. Work for Humanity and service for Humanity. Trillions and trillions money and kept in vault or Banks of all these trusts and nothing is used for the upliftment of poor people of the country, neither it is utilised for Carona campaign.

There are few trusts they have their own colleges universities and hospitals but they are only few in numbers. Most of our donations are misused by trustees for their own welfare and development of their families businesses. They have misguided us till date, now it is time for us to give our thoughts for Humanity.

God is definitely there as I believe and narrated, without Him this creation is not possible. His administration is such wonderful that neither any one can bring any things in the world on their birth nor they can take any things from here on their deaths. That to there is not a single security guard appointed by almighty. We must understand and believe in His existence in the world at all the places and all the time. He is within us only we have to obey His order to live like human beings and love His creation.

With this I pray to Him to give us wisdom and courage to live as per His instructions.

Jaihind jaibharat vandemataram.