Monthly Archives: April 2021

लम्हे

बीत गया पल बीतने वाला, वह लौट नहीं फिर आयेगा ।

पता नहीं आने वाला पल, क्या साथ साथ वह लायेगा।

पल दो पल ये पास हमारा, ये पल भाई अपना है।

इस पल का उपयोग तू कर ले, जीवन सफल हो जायेगा ।

कल वाला पल चला गया है, आने वाले का पता नहीं ।

साथ खड़ा है अपना ये पल , इसका भाई आदर कर।

लम्हे लम्हे बीत रहा है, जीवन का ये अपना पल।

पल पल छन छन निकल रहा है, जीवन का ये अपना पल।

लम्हे लम्हे निकल रहा है, जीवन का ये अपना पल।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

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कितना बेबस इनसान यहाँ है

कितना बेबस इनसान यहाँ है, घर में ही बीमार पड़ा है।

घर वाले परेशान बहुत हैं, अस्पताल सब भरे हुए हैं ।

डाक्टर सब दिन रात लगे हैं , कितने तो बीमार पड़े हैं ।

एक बीमारी ऐसी आयी, सबको सबसे दूर भगा दी।

ऐसी छूआछूत फैलायी, घरवाली भी हुई परायी ।

न बेटा न बेटी अपनी, आस पास नहीं आती उनकी ।

बीमारी का ऐसा आलम, डाक्टर नर्स दिन रात खड़े हैं ।

ऐसी ये महामारी आयी, सबको नानी याद दिला दी ।

मानवता को लज्जित करते, कुछ तो रंगे सियार यहाँ है ।

पैसों के लालच में उसने, बीमारी को बेच रहे हैं ।

लानत हैं उन हैवानो पर, उनके भी बच्चे मरते हैं ।

लानत हैं उन हैवानो पर, उनके भी बच्चे मरते हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

जीवन ज्योति

जीवन की ज्योति भी दीपक की भांति ही है।

जबतक दीपक में तेल बाती भरी हुई होती हैं और वह तेज हवा या आँधी से सुरक्षित होती है, तब तक वह निरंतर जलता प्रकाशित रहता है ।

जैसे जैसे दीपक का तेल और बाती कम होते जाता है ,उसकी लौ कम होने लगती है ।

पुनः पुनः उसमें तेल भरा जाता है तो वह तेज प्रकाश देता है ।

पर एक समय ऐसा आता है कि बाती खतम हो जाती है, तब तेल रहते हुए भी दीपक बुझ जाता है ।

यही हाल हमारे जीवन का भी है, ईश्वर द्वारा इस शरीर को धरा पर भेजने से पहले इसमें प्रचुर मात्रा में जीवन ज्योति भर कर ही भेजी जाती है और जैसे जैसे इसकी जीवन ज्योति घटती जाती है, शरीर कमजोर और बूढ़ा होने लगता है और एक दिन सदा के लिए बुझ जाता है । यही अटल सत्य है ।

अतः जबतक शरीर में जीवन ज्योति है, तबतक अपने को परमात्मा की शरण में रक्खें और परोपकार करते हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

Indian police and liquor

Indian police and liquor having same culture and behaviour in our country.

1 Both are calm and cold when they are preserved in stores and barracks, but are very furious when they are out in glasses and in public.

2 Liquor gives kicks after drinking and police kicks on roads on duties.

3 The cheap country liquors are more toxicated than the high quality branded and foreign liquors. Same way constables and Hawaldars are more inhuman and dangerous to general public than higher up Inspectors, SP, IG and DIG .

4 As the country liquors can be bought paying small amounts but for branded foreign liquors you have to pay heavy amounts, same way Constables and Hawaldars can be managed paying them few hundreds to thousands but the higher up can be satisfied paying thousands and lakhs only.

5 As the country liquors are used by poor labourers and branded one by high society gentlemen, same way Constable and Hawaldars deals with the small cases where and the higher up deals with big cases like murders, dacoities, robberies, corruptions, smuggling, narcotics, land mafia etc.

6 So the characters and behaviours are the same for both Liquors and Indian Police. Neither of them are better for general public, both robbed the hard earned money and health of public for giving relief only for short time.

Morale of this story is — never drink Liquors and avoid unnecessary police intervention to live a healthy and happy life with your family and children.

Jaihind jaibharat vandemataram.

फूलों का जीवन

भाई फूलों का जीवन भी उतना आसान नहीं है ।
कभी तितली तो कभी भौरे उसे चूसते रहते हैं ।
फूलों का खिलना और खूबसूरती बिखेरना ही।
उनकी जान की जानी दुश्मन बन जाती है।
मालिन उसे तोड़कर गजरे बना लेती है ।
उसे अपनी दुकानों पर सजा लेती है ।
फूलों की खूबसूरती चारो ओर महकती है ।
लोगों को लुभाती और खुद मिट जाती है ।
फूल सिर्फ़ दूसरों के लिये ही खिलती है।
खुद तो महकती ही पर दूसरों को भी महकाती है।
फूल बनकर जीना उतना आसान नहीं है ।
खुद को मिटाकर दूसरों को हँसाना आसान नहीं है ।
बहुत ही कम फूल ही भाग्यशाली होते हैं ।
जो देवों के सिर और शहीदों के उपर चढ़ाई जाते हैं ।
ज्यादातर फूल प्रेमिका की बालों में सजते हैं ।
दूसरे ही दिन कचरे की ढेरों पर मिलते हैं ।
फूल ही बनना है तो देवों के शीश की शोभा बनें ।
दूसरों की सेवा में अपना पूरा जीवन लगा दें।
खुद जीयें और दूसरों को भी जीने दें ।
खुद जीयें और दूसरों को भी जीने दें ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मैं भारत की नारी हूँ

मैं सचमुच भारत की नारी हूँ ।
अपनों के लिये मैं माता हूँ ।
दुर्जन के लिये माँ दुर्गा हूँ ।
माँ काली हूँ माँ चंडी हूँ ।
सज्जन के लिये माँ सरस्वती हूँ ।
माँ लक्ष्मी माँ शीतला हूँ ।
नटवर की मैं संगनी हूँ ।
श्रृष्टि की मैं जनम दायनी ।
मैं लीलाधर की लीला हूँ ।
मैं ही भारत की बेटी हूँ ।
मैं ही भारत की नारी हूँ ।
मैं शीतल हूँ, मै ज्वाला हूँ ।
बुरे के लिये मैं बहुत बुरी हूँ ।
भले की उसकी माता हूँ ।
मैं रामायण की सीता हूँ ।
मैं महाभारत की गीता हूँ ।
मैं भारत की बेटी हूँ ।
मैं भारत की नारी हूँ ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

Service for Humanity

It is a very old story but true and encouraging, full of humanity and service to mankind.

There was a big Jamindar in Dhaka in undivided India. One of his son was an advocate and practicing in Calcutta court. Jamindar was suffering from urinal problems, he was unable to pass urine from a week but having no problem, instead of taking complete meals and water all three times a day . His stomach was clear without urinating. He was treated in Dhaka by all the famous doctors but no relief. Those days Calcutta was the biggest hub for hospital and doctors . He moved to Calcutta to his for his treatment and visited the best doctors in the hospitals. He was advised for operation but was told that the survival rate is only 10%. As he was not having any problems witout urinating he refused for operation and rest left it to God.

One fine morning he was sitting in his balcony and enjoying the neighbourhood, infront of his bungalow he saw practicing an old homeopathic Dr. He walked into his chamber and picked up a newspaper to pass his time. Seeing him the old Dr. stared chatting with him and asked why he is gloomy? Jamindar narrated his problems. Listening him the Dr. gave him 06 pudia medicine prepared in glucose powder and asked him to pay twelve Aanas and take this pudia every half an hour, report him back after finishing it.

Jamindar paid him and came back to his bungalow having no belief as he spent thousands of rupees for his treatment, what will happen with this twelve Aanas medicine? Still he took it as per his instructions, after 3rd dose he suddenly felt pressure for urinating and rushed to toilet, he urinated in a bucket nearly two litres and was very comfortable. He called his son and narrated the full story to him.

His son left the court and came rushing to his bungalow, saw his father and was delighted. He immediately gone to the Dr. bowed down on his feet for his great service and offered him a bungalow in Calcutta or ten acres of land there for his service. Dr. smiled and said, dear your father have all ready paid for the medicine, you need not to pay me any more. I don’t accept your offer.

That was the service of Dr. those days, can any one believe today? God bless these types of people who have given their lives for the service of humanity.

Jaihind jaibharat vandemataram.