Monthly Archives: May 2019

आप सुखी तो जग सुखियारा

घर बदला लिबास भी बदला,

बदले दोस्त और रिश्ते ।

बदल न पाया खुद को अपना,

रहते परेशान फ़रिश्ते ।

अपना अवगुण ढूंढ न पाया,

दोषी परिजन नाते रिश्ते,

काला चश्मा चढ़ा हुआ था,

सब कुछ दीखता काला।

चश्मा जब उतार कर देखा,

सतरंगी संसार निराला ।

सोच समझकर देखा मैंने,

खुद को खोटा पाया मैंने ।

बदला जिस दिन से अपने को,

दुनियां बदला पाया मैंने ।

सभी जगह रौनकता पायी,

देखा जग का रूप बदलते,

दुखी न पाया तब मैं जग को,

पाया सबको हँसते गाते ।

आप सुखी तो जग सुखीयारा,

मूल मंत्र को पाया मैंने ।

आप सुखी तो जग सुखीयारा ,

मूल मंत्र को पाया मैंने ।

मूल मंत्र को पाया मैंने ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

Advertisement

अब राम भजन कोई अर्थ नहीं

भूखे जब काँटे बन सूख गये ।

तब उसे खिलाना दूध भात,

रह जता कोई अर्थ नहीं।

जो तरसे जीवन भर कपड़ों से,

उसे कफन ओढाना कोई अर्थ नहीं ।

फसल चर गये जंगली जानवर,

तब बार लगाना कोई अर्थ नहीं ।

प्यासे प्राणी जब तड़प रहे,

तब कूप खुदाना कोई अर्थ नहीं ।

बच्चों के छोड़ चले जाने पर,

माँ तड़प तड़प कर मर जाये,

तब अर्थी पर फूल चढ़ाने का,

लोगों को भोज खिलौने का,

सचमुच में कोई अर्थ नहीं ।

जीवन भर पाप किया तुमने,

अपने बाबा को छला तुमने ।

अब राम भजन कोई अर्थ नहीं ।

अब राम भजन कोई अर्थ नहीं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

पत्नी भक्त

पप्पू भी पत्नी वाला है ,

दो बच्चों का बाप है।

इंग्लैड में रहती वह बाला,

पप्पू उसको नहीं है भूला।

कैसे वह छोड़े बाला को,

करना जो है बड़ा घोटाला।

घोटाले के वह सरताज,

मूरख है जनता भी आज ।

सात दशक से जिस जनता को,

लूटा और है मूर्ख बनाया ।

वही आज तक आश लगाये,

बैठी नेहरू गाँधी दरवार ।

कब खुलेंगी आँखे उनकी,

कब समझेगी उसकी घात।

सोने की चिड़िया था भारत,

जिसे वो लूटा दिन व रात ।

मालामाल हो गया है वो छैला,

नेहरू गाँधी का परिवार ।

भूखा नंगा देश हो गया,

इनके शासन काल में ।

धोखा खाती बार बार,

पर नहीं समझ है उनको यार।

आँख मूँदकर वोट वो देती,

ऐसे आदम खोर को।

देश द्रोही परिवार है उनका,

इनको अब तो छोड़ दो ।

इनको अब तो छोड़ दो ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

भारत मोदी मय हो गया

पाँच साल में मोदी जी ने,

देश को आगे ले आये ।

बिजली पानी रोड बना कर,

घर घर कुकिंग गैस दिये।

कृषक मजदूर को राहत देकर,

सेना को सम्मान दिये।

देश विदेश में मान बढ़ाकर,

मस्तक भारत का उठा दिये।

माँ का लाल पत्नी का प्यारा,

अपने को देश पर लुटा दिये।

उनको फिर प्रधान बनाकर,

भारत वासी धन्य हो गये।

भारत वासी धन्य हो गये ।

भारत वासी धन्य हो गये ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मुसाफ़िर आते जाते ही रहेंगे

सूर्योदय के बाद दीपक भी बुझा दी जाती है ।

सूर्यास्त के बाद वही दीपक उजाला लाती है ।

बरसात में पोखर तालाब भरकर छलछला जाते हैं ।

गर्मी आते आते तक वही तालाब सूख जाते हैं ।

जिंदगी भी एक पहेली है, कल तक घर भरा भरा था।

बच्चों की किलकारी से घर गुलज़ार था।

आज वही घर उनके बिना सुनसान और वीरान है।

कल तक हम घरों में उलझे हुए सपने बुना करते थे।

आज हैरान और परेशान हैं, अकेले कैसे रह पायेंगे।

पर सही कहें न कल हम परेशान थे, न आज परेशान हैं।

अपनी खुशियों से यों ही अनजान थे।

न कल हमें कोई जानता था, न आज जानने वाले हैं ।

हम किसी गफलत में जी रहे थे, आज ही जान पाया हूँ ।

मन की उदासी को आज सचमुच निकाल पाया हूँ ।

न दुनिया कल हमारी थी न आज है,

हम कल भी थे यहीं और आज भी हैं।

यहीं कुछ परिचित जरूर ही मिले थे।

कुछ छोड़ गये हैं, और कुछ साथ साथ हैं।

हॅसते गुनगुनाते समय बिताते रहेंगे,

ये सराय है मुसाफिर आते जाते ही रहेंगे ।

मुसाफ़िर आते जाते ही रहेंगे ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

सनडे होती है खुशियाँ मनाने के लिये

सनडे तो भाई एक बहाना है,

मिलना मिलाना कह कहे लगाना।

आज इस दोस्त के साथ,

फिर दूसरे सनडे दूसरे के साथ।

छः दिनों तक पीसते रहने के बाद।

मस्ती में दिन गुजारने के लिये।

खट्टी मीठी यादों को बाँटने के लिये।

कुछ पुरानी यादोंको भूलने के लिये।

कुछ नयी नयी सोच सोचने के लिये।

नयी जगह नये लोगों से मिलने के लिये।

नये नये व्यंजन नयी स्वाद चखने के लिये।

बच्चों के संग संग दिन बिताने के लिये।

पत्नी की शिकायत मिटाने के लिये।

ये सनडे ही तो है हमें सूकून देने के लिये।

हमें तरो ताजा करने के लिये।

फिर से अगले सप्ताह काम पर जुट जाने के लिये।

यार क्या बताऊँ ये सनडे ही होती है।

जीवन में सदा खुशियाँ भरने के लिये।

आओ हम सब मिलकर सनडे मनाये,

इस सनडे को कुछ नयी बनाये।

इस सनडे को कुछ नयी बनाये।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

Be a true worshipper

Happiness doesn’t come with wealth,

Real happiness is the healthy body and healthy mind .

Lesser talking and more listening makes a man calm and peaceful.

Donners are always at higher place than receivers.

Prayers are for expressing gratitude to our God and Elders and not for begging from them.

God doesn’t need our wealth and gifts, they need our devotion to their creation.

Father, Mothers, Elders and Gurus are the representative of God.

A home having Father and Mother is a temple of God, respect and worship them at home.

Ignoring parents at home and visiting famous temples in seach of God and peace is wasting time, wealth and health.

Be a true worshipper and well wishers of man kind, love them, help them in needs and live happily with your family at home.

Jaihind jaibharat vandemataram.

पेड़ और हम

पेड़ से डाल अलग होते ही सूख जाते है ।

पर कुछ पेड़ पौधे ऐसे भी यहाँ होते हैं ।

अलग होने पर भी जमीन पर अपना जड़ जमा लेते हैं ।

उसे हम जुही, गुलाब के फूल कहते हैं ।

ऐसे और भी बहुत सारे पौधे भी होते हैं ।

जो भी अपनी-अपनी जड़ जमा लेते हैं ।

हमारे बच्चे भी साथ साथ रहते और पलते हैं।

माँ बाप की नजरों में कभी बड़े नहीं हो पाते हैं ।

माँ बाप साथ रहने पर कभी बूढ़े नहीं होते हैं ।

पर बच्चे अलग होते ही बड़े हो जाते हैं ।

और माँ बाप धीरे-धीरे बूढ़े होने लगते हैं ।

पेड़ और हम में यही फरक होता है ।

डाली कटने पर भी पेड़ बढ़ता रहता है ।

और औलाद अलग होते ही हम मुरझा जाते हैं ।

औलाद अलग होते ही हम मुरझा जाते हैं ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

दहेज का विरोध

लाखों माँग कर लुटाते हैं दूल्हा पक्ष,
बरबादी का आलम होता है ।
बेटी वाले लड़के खरीद लेते हैं,
बेटा वाला अपना बेटा बेचता है ।
श्रम हया नहीं है बेटे वालों को,
अपनी बेटी के व्याह पर खुद रोता है ।
आज बेटा वाला बनकर अकड़ता है,
बेटी की शादी पर खुद पैर पकड़ता है ।
ये झूठी शान, झूठा दिखावा क्यों ,
लड़के लड़की को बेचना खरीदना क्यों ।
आओ सब मिलकर कसम लते हैं,
न हम दहेज लेकर शादी करेंगे ।
न लड़की को दहेज देकर बिदा करेंगे,
दहेज मंगाने और देने का विरोध करते रहेंगे ।
दहेज मंगाने और देने का विरोध करते रहेंगे ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

माँ का मोल

माँ की ममता माँ का प्यार, है अनमोल खजाना यार ।

उसकी प्यारी डांट फटकार, ये है उनका प्यार दुलार ।

बच्चों के संग संग में माँ, हँसती गाती रहती माँ ।

उसके दुःख में दिन व रात, घुलती रहती प्यारी माँ ।

खेल खेल में बच्चों को, क्या क्या नहीं सिखाती माँ ।

धूप में छाया बनकर माँ, चलती उसके साथ ही माँ ।

साथ साथ साया बनकर , रहती उसके साथ ही माँ ।

खुद भूखा तो रहती माँ, बच्चों को रोज खिलाती माँ ।

साये की तरह वो संग संग में, सदा साथ में रहती माँ ।

छोटी मोटी हर दुखों में , हमें याद ही आती माँ ।

बच्चे कभी बड़े न होते ,जिसके संग में रहती माँ ।

होती हैं भगवान ही माँ, घर मंदिर में रहती माँ।

माँ होती हैं लक्ष्मी माँ, विद्या दायनी सरोस्वती माँ ।

माँ की दुआ वो सर पे हाथ, घर घर की खुशियाँ हैं माँ।

माँ की ममता माँ का प्यार, है अनमोल खजाना यार ।

माँ की ममता माँ का प्यार, है अनमोल खजाना यार ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।