Monthly Archives: August 2021

रक्षाबंधन का बेहतरीन विश्लेषण

र- रक्षा करना बहनों की
क्षा– क्षमा करना बहनों को
बं— बंधन से मुक्त करना बहनों को
ध– ध्यान रखना बहनों का
न- ना भुलाना बहनों को

रक्षाबंधन एक पवित्र त्यौहार है,

भाई बहनों का अटूट प्यार है।

भारतीय संस्कृति की मिसाल है,

भाई बहनों का सुनहरा संसार है।

ये उम्र भर का एक दूसरे से वादा है,

बहनों का मायके आने का वादा है ।

बचपन की यादों को दुहराना है,

बुढ़ापे में भी बचपन को जीना है ।

भाई बहनों का आपस में मिलना है,

मायके की सलामती बहनों की दुआ है।

रक्षाबंधन भाई बहनों का पवित्र त्यौहार है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

बालम सौतनिया क्यों लाये

बालम सौतनिया क्यों लाये

हम तो तोहरे गले का हाड़ बालम सौतनिया क्यों लाये।
जो हम होती काली कलूटी, जो हम होती काली कलूटी ता लौते सौतनिया ।
हमरी चिकनी चिकनी गाल हमरी लंबी काली बाल बालम सौतनिया क्यों लाये।
हम तो तोहरे गले का हाड़, बालम सौतनिया क्यों लाये।
जो हम होती मोटी नाटी ता लौते सौतनिया, हमारी पतली कमर सुकुमार, जाको मोरनी जैसी चाल बालम सौतनिया क्यों लाये।
जो हम होती लूली लंगडी ता लौते सौतनिया ।
हमरी हिरनी जैसी चाल बालम सौतनिया क्यों लाये।
हम तो तोहरे गले का हार बालम सौतनिया क्यों लाये।
जो हम होती गूँगी बहरी ता लौते सौतनिया, हमरी कोयल जैसी बोली बालम सौतनिया क्यों लाये।
हम तो तोहरे गले का हाड़ बालम सौतनिया क्यों लाये।
जो हम होती अनपढ़ बालम ता लौते सौतनिया ।
हम तो बीए एम ए पास बालम सौतनिया क्यों लाये।
जो हम होती बाझन बालम ता लौते सौतनिया ।
हमरी चौदह पन्द्रह लाल बालम सौतनिया क्यों लाये।
हम तो तोहरे गले का हाड़ बालम सौतनिया क्यों लाये।

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जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

उम्र तो गुजरना ही था

उम्र तो गुजरना ही था

क्या बताएं लौट कर नौकरी से हम क्या लाये हैं ।
घर से जवानी लेकर गये थे बुढ़ापा लेकर लौटे हैं ।
सही कहा है आपने बुढ़ापा लेकर लौटे हैं ।
पर ये भी बतायें और भी साथ क्या क्या लेकर लौटे हैं ।
क्या घर पर रहते तो जवान ही बने रहते, बुढ़ापा नहीं आता ।
बचपन से लडकपन व जवानी तो घर पर ही बीता है ।
टूटी मरैया में रहते थे, कथरी बिछाते और ओढ़ते थे।
आधी पेट खाकर स्कूल जाते और टाट पर बैठकर पढ़ते थे।
घर आकर नमक मिला माड़ भात मज़े से खाते थे ।
पर्व त्यौहार में ही दाल भात सब्जी नसीब होती थी ।
बरसात में मरैया टपकती और रात आँखों में कटती थी ।
पढ़ लिखकर बड़े हुए नौकरी करने परदेश चले गये।
कमा कमा कर मरैया को पक्का मकान बना लिये।
बच्चों को पढ़ा लिखा कर अफ़सर बना दिये ।
शहर में भी अपना महल बनवा लिये ।
माता-पिता को भी बुढ़ापे में सब सुख दिये ।
आज गाँव में भी सुखी हैं और शहर में भी ।
फिर कहते हैं जवानी लेकर गये थे बुढ़ापा लेकर लौटे हैं ।
क्यों अपने को कोसते हैं बुढ़ापा तो एक दिन आना ही था।
गाँव हो या परदेश उम्र तो गुजरना ही था।
बस हमें तो यही कहना था उम्र को गुजरना ही था ।
उम्र को गुजरना ही था ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

भारतीयता


रघुकुल रीति सदा चली आये, प्राण रहे कश्मीर न जाये।
भारत के नक्शे पे युगों से, कश्मीर सदा से रहते आये।
पर कश्मीरीयत चली गयी अब, जब से हिन्दू बेघर हो गये ।
कश्मीरी पंडित की जब ये, मुस्लिम भाई बलि चढाये।
कांग्रेसी नीति के चलते, देश की हालत बुरी हो गयी ।
मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान बना तब , क्यों न भारत हिन्दू बनी।
हिन्दू पाक में खत्म हो गये, भारतीय मुस्लिम बढ़ी तीन गुनी।
नक्शे में कश्मीर हमारा, गाते मुस्लिम गीत पाकिस्तानी ।
हिन्दू अब भी जागो भाई, आखिरी देश बचा लो अपना ।
दुनियाँ में है नहीं ठिकाना, कहाँ कहाँ तुम चल के जाना ।
जाति पांति का भेद भुलाकर, हिल मिलकर सीखो सब रहना।
भारत अपना देश है प्यारा , दुनिया में है नहीं ठिकाना ।
मिलजुलकर सब सीखो रहना, हिन्दू जैन बौद्ध सिक्ख अपना ।
हिन्दू जैन बौद्ध सिक्ख अपना ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।