Monthly Archives: December 2019

नववर्ष की शुभकामनाएँ

समय, साधन, सद्व्यवहार,

सदाचार ,सदुपयोग सुविचार,

सामाजिक एकता हमारा परिवार,

बनाये रखें आपस में मेल जोल,

भलाई की भावना है अनमोल ।

सुखी संपन्न गारडेनसीटी परिवार ।

बीते पुराने वर्ष की विदाई ।

नये वर्ष की हार्दिक बधाई ।

सुरेश का शुभ नमस्कार ।

जय हो जय हो गारडेनसीटी परिवार ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

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तू करता गद्दारी है

संभाल के रखना अपने को तुम ,

बोलीवूड में भूखे सियार बैठा है ।

देश के गली गली में भेड़िया है ,

जो तुम्हें नोचने को तैयार बैठा है ।

ये लफ्ज़ लिखने वाले वेहया इनसान ,

देश चलाने वाले माई के लाल बैठा है ।

अरे तू तो उन गद्दारों में से है,

जो सौदा अपने माई का करता है ।

देश तो हमारी दूसरी महतारी है,

तू उसी के साथ गद्दारी करता है ।

और माँ के इस लाल को तू कहता ,

भारत की गद्दी पर बेऔलाद बैठा है ।

गद्दारी तो तुम्हारी नस नस में है,

मक्कारो का तू सरदार बैठा है।

मक्कारो का तू सरदार बैठा है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

बुढ़ापे का दर्द

कहानी सच को दर्शाती है।
पर आज की पीढ़ी इसे नकारती है।
आप का ये फर्ज था, कहकर हमें सुनाती है।
अपना फर्ज वह भूल जाता है।
समय बहुत बलवान है,
उसे नहीं इसका ज्ञान है।
वह भी पछतायेगा, अपने बुढ़ापे में।
जब उसका भी बुरा हाल होगा ।
बच्चे उसे भी तरसायेंगे, रूलायेंगे।
तब अपना कर्म उसे याद आयेगा।
माँ बाप का दिल दुखाना उसे,
अंतिम समय उसकी याद दिलायेगा।
समय अभी भी शेष है,
माँ बाप का आदर करे ,
अपना बुढ़ापा सुखमय करे।
नयी पीढ़ी अभी भी चेत जाये।
माँ बाप की दुआ पाये।

जयहिन्द, जयभारत, वन्देमातरम।

एक है दीया तो दूजा उसकी बाती है ।

कोरे कागज़ की खूबसूरती,

शायरों के कलम से बनती है ।

कोरे कागज़ की खूबसूरती,

पेन्टर की पेन्टिंग से निखरती है ।

कागज़ का मोल चन्द सिक्कों में होता है ।

शायरी और पेन्टिंग अनमोल हो जाता है ।

पिया साथ सजनी बिना सजे ही फबती है।

एक है छत तो दूसरी घर की धुरी है।

एक दूसरे के बिना ये जीवन अधूरी है ।

सजना भी बेजान बिना सजनी के रहता है ।

दोनों का साथ काटों में गुलाब खिलता है ।

एक है दीया तो दूजा उसकी बाती है ।

एक है दीया तो दूजा उसकी बाती है ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

मलिक तेरे अपनों को

मलिक तेरे अपनों को, बाहों में जगह देना।

मलिक तेरे अपनों को, गिरने से बचा लेना ।

गर खता हुई उनसे, मांफी की सज़ा देना।

मालिक तेरे अपनों को, सोये से जगा लेना।

गर भूल हुई उनसे, उनको तू भुला देना ।

तेरे गोद के बालक हैं , गिरने पे उठा लेना ।

मलिक तेरे अपनों को, बाहों में जगह देना ।

मलिक तेरे अपनों को, पापों से बचा लेना ।

मलिक तेरे अपनों को, पैरों में जगह देना ।

दाता तेरे अपनों को, पैरों में जगह देना ।

मालिक तू सदा दाता, दाता ही बने रहना ।

दरबार में तुम अपने, सेवक को बिठा लेना ।

दरबार में तुम अपने, सेवक को बिठा लेना ।

दरबार में तुम अपने, सेवक को बिठा लेना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।