Monthly Archives: August 2018

My happy friend

One day I visited with my family to one of my senior citizen friend of South India at his residence. He was staying with his family along with his daughter and her children. He welcomed us and was very happy as we were meeting after several years of our togetherness in services. He was staying in good locality in a big flat. His Mrs welcomed us with snacks and tea. We started talking on the table. Our old memorable instances as young and matured person during services. Then about the present time . We narrated every things openly to each other. As he started telling about his present life style, his face become gloomy. I noticed it and asked him politely. Firstly he hesitated to tell but later he narrated.

He has only one problem with his daughter and her children as they are not well mannered to maintain the house. There are Every things in the house, you can say surplus to requirements. But neither available in time nor maintained properly. He took me around his house and shown the computer table, washing machine, show case , all the places I found dirty full of dust and clothes spread on the double bed, books and writing materials were spread all over on the study table. Really it was looking very awkward. I smiled and reminded him our training centre life where we were taught to live with cleanliness and maintain it and arrange our belongings and surroundings. Those was a very tough and disciplined life. Being in defence it was the way of our life. So don’t be unhappy and impose the decepline at home. We are ripened fruits , why be unhappy with them . Play your last innings boldly and happily. Let them learn for their benefits, if not ignore them, don’t create unpleasant situation.

He was lookig me as he was not expecting this from me and just whispered are you the same senior man of our billet and discipline i/c of ETI? I looked at him and laughed, he was so happy to my advice that he still call me weekly and thanking me to change his sadness to happiness.

Jaihind jaibharat vendamatram.


हमारी कोशिश

रोते हुए को हॅसाना कोशिश है मेरी।
गिरे हुए को उठाना कोशिश है मेरी।
अनपढ़ों को पढ़ना कोशिश है मेरी।
भूखों को खिलाना कोशिश है मेरी।
भटकों को राह दिखाना कोशिश है मेरी।
मुर्दों को जगाना कोशिश है मेरी।
देश भारत को बचाना कोशिश है मेरी।
दुश्मनों को बाहर निकालना कोशिश है मेरी।
तिरंगा को लहराते रहना कोशिश है मेरी।
अमन चैन से रहे सभी कोशिश है मेरी।
नफ़रत छोड़ मिलजुल कर रहे सभी।
कोशिश है मेरी।
ये देश अपना है, वतन अपना है।
यही सबको समझाना कोशिश है मेरी।
अनाप सनाप धन कमाना नहीं।
सब यहीं छोड़ कर जाना है।
यही समझना कोशिश है मेरी।
बच्चों को संस्कार और शिक्षा देते रहें।
धन कमाने की होड़ में कहीं भूल न जायें।
समय रूकता नहीं, खुशियाँ लूटें और लुटायें।
यही समझाते रहना कोशिश है मेरी।
प्यार लुटाते रहना ही कोशिश है मेरी।
प्यार लुटाते रहना ही कोशिश है मेरी।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

A little help can change the life

It is very true that a little help by some one in time can change the life of others. I have a memorable instance of one of my those helping hand to others in my life, which gives me pleasure to share it with you all.

I was posted to E T I AFSTATION JALLAHALLI BANGALORE IN 1990S and was working as a WO i/c discipline in 3 Sqn. One day one trainees from 4th sqn. from my own village was recommended discharge from service by CO, as he failed twice in same term. As he was afraid from my discipline attitude, he could not dare to come and tell his discharge. I myself called him and asked about it. He started crying and narrated his pathetic condition of his family. His parents have died and he is married. He could not get any suitable job in civil but was recruited in Airforce. Not knowing about the difficult training and routing back home on poor performance he has taken it lightly. Now what he will do after going back to home? He was totally upset.

After interviewing, I asked him, if he is willing to work hard and improve his performance, If a chance is given to him? He was astonished and promised me to prove himself worthy to Airforce standard.

I gone to his course supervisor and requested him to plead his case to CO. narrating his family poor back ground and assuring his better performance in future. CO was a very gentle person and he recommended his stay back to AOC Airforce station Jalahalli which was granted. He passed out with good marks and became an active Airman.

It is the pleasant part of this instance, today he himself is a WO in I A F and his son is a Commission Officer in Army. What a proud father. I have met him only twice after 1990s. His feelings and respect to me was beyond my expectations. He respect me like his guardian. God bless him and his family.

By sharing this I want to remind everyone of you, pl. keep helping others, when ever you are getting a chance. You can make the difference in some ones lives without loosing any thing. God will help you without your knowledge.

Jaihind jaibharat vendamatram.


कहें न कभी दिल दुखाने वाली बातें किसी से।

अगर ला सकते हैं मुस्कुराहट किसी के ओठों पे।

हज़ार पुण्य होगा तुम्हें किसी को हँसाने पे।

न खर्च होगी पाई, न समय , न परिश्रम भी।

बस जायेंगे उजड़े घर , आप के एक मुस्कुराहट से।
बांटते रहें मुस्कुराहट , कभी कंजूसी न करें ।

बांटते रहें मुस्कुराहट कभी कंजूसी न करें ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

अटल कलाम को शत-शत नमन

अटल कलाम को शत-शत नमन

कौन कहता भाई उनको , नहीं कोई जायदाद है ।
देश पूरा है उन्हीं का, नत मस्तक उन्हें प्रणाम है।
घर घर होती पूजा उनकी, बजते शंख सितार है।
अटल नाम अब अमर हुआ है, दूजा अबुल कलाम है।
इतना प्यार और मान आजतक, दूजा नहीं कोई पाया।
सच्चे पूत भारत के दोनों, हुए अमर इतिहासो में ।
भारत रत्न से सम्मानित वो,भारत भाल के टीका वो।
बंगला गाड़ी सोना चाँदी, हीरा भी सब फीका है।
धन दौलत सब पड़ा यहीं पर, रहता संदूकों में बंद।
मान और सम्मान की दौलत, इन्हें कमाया दोनों संत।
मान और सम्मान की दौलत, इन्हें कमाया दोनों संत।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

अटल बिहारी वाजपेयी

ऑखों से दूर वो ओझल हो गये ,कह अलविदा चले गये।

दूर हो गयी उनकी छाया, काया छोड़ वो चले गये।

थी जिनकी वाणी में गीता, वो गीता गायक चले गये।

इस युग के वो प्रणेता थे, जन जन के वो प्रिय नेता थे।

वो पथ के पथ प्रदर्शक थे, पथ हमें दिखाकर चले गये।

राजनीति के महागुरू वो, जन जन के जन नायक थे।

कवियों के सिरमौर अटलजी, भारत के भाग्य विधाता थे।

जब डूब रही थी नैया अपनी, वो इसके पार लगैया थे।

डूबती नैया को घाट लगाने, वाले वही खिवैया थे।

भारत की शान को दुनियाँ में, पहचान बनाने वाले वो थे।

एक नयी दिशा पहचान नयी दी, न्युक्लीअर बिज्ञान हमें दी।

दुनियाँ भर में नाम नयी दी, भारत को सम्मान नयी दी।

राजनीति के धुव्रतारे वो, चमक रहे वो सारे जग में।

उनकी महिमा उनकी ग्यान, चन्द शब्दों में लिखे भी कौन।

अटल अटल थे राजकाज में, दुश्मन भी रहते थे मौन।

देश और जनता के खातिर, रहे कुवारे जीवन भर वो।

लुटा गये पूरा जीवन वो, जनहित और जनसेवा में।

देश भक्त जननायक तुमको, शत शत नमन हमारा है।

आलोकित कर पूरे देश को, तूने स्वर्ग सिधारा है।

साथ साथ मिलकर रहने का, संदेशा फैलाया है।

पास पड़ोसी देश पराया, सबसे हाथ मिलाया है।

दुश्मन से भी सगे सगे, भाई सा प्यार निभाया है।

हे वीरों के वीर शिरोमणि, शत शत नमन हमारा है।

तुम्हें शत शत नमन हमारा है, तुम्हें शत शत नमन हमारा है।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

दोस्ती टूटी सौ टके की

कई बरस से साथ रहे थे, मिलना जुलना हँसना गाना।

दुख सुख की बातें भी करना, शाम सवेरे घुमना फिरना।

जनम दिवस पर दावत खाना, हॅसी ठिठोली नितदिन करना।

आपस में था प्यार सभी को, नहीं था आपस में व्यापार।

कैसे बिगड़ी बात समझ में , होती नहीं हमें एतबार।

बिन समझे और बिन जाने ही, एक ने कह दी ऐसी बात।

गलत फहमी में बात बढ़ गयी, दोस्ती तो नीलाम हो गयी।

दोस्त बन गये व्यापारी जी, दो सौ में ही दोस्ती बिक गयी।

व्यापारी भी माल बेचता, जो लेने वाला हो तैयार।

कभी न ज़बरन माल वो बेचे, और न करता वो तक़रार।

सुनकर उनकी बातें भैया, दुखी हुआ सारा संसार।

बात नहीं थी सौ टके की, बात बिगाड़ी उनकी बात।

उठा भरोसा उन दोस्तों से, लेन देन की करे जो बात।

लेन देन की करे जो बात। लेन देन की करे जो बात।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

बंद करें मंदिर में दान

बंद करें मंदिर में दान।

सफल दान सबका कल्याण।

दान सफल विद्या मंदिर में।

और दान दे अस्पताल में।

नयी सोच ये नयी पहल हो।

सच में होगा तब कल्याण।

कोई नहीं समझ पायेंगे।

ब्राह्मणों की ये टेढ़ी चाल।

भटकाकर सब जन मानस को।

अपनी झोली भरता चल।

डरा कर और गुमराह कर।

रक्खा सबको भटकाकर।

आशीष सबको ईश्वर देंगे।

ब्राहमण से है श्राप का डर।

कैसे कोई बन्द करेंगे।

मंदिर दान पूजा घर घर।

सोच-समझ कर बात कहें।

लगता नहीं तुम्हें क्या डर।

पढ़ लिख कर बाबू बनकर।

फिर भी अनपढ़ हैं हम सब।

जनम मरन शादी घरवार।

हर काम करें उनसे पूछकर।

उनकी सारी बात निराली।

सब बातों पर पड़ती भारी।

कैसे छोडें ये व्यवहार।

कैसे छोडें ये व्यवहार।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।


समय के चक्र में घूमती रहती है जिंदगी।
अनवरत चलती रहती है बिना थके ये जिंदगी।
रुकना मौत है और चलते रहना है जिन्दगी।
सांसों में समायी पल पल चलती रहती है जिन्दगी।
रूके जब सांस ये अपनी, रूठ जाती है जिन्दगी।
बचपन से लड़कपन और बढ़ती हुई जवानी।
बुढ़ापा के आते आते थम जाती है जिन्दगी।
तमाम कोशिशें बेकार हो जाती हैं।
अपने पराये की दुआएं भी हार जाती हैं।
जब थक हार कर बुढापा जकड़ लेती हैं।
अपनों से दूर कहीं अनंत में ले जाती है जिन्दगी।
किसी के थामे भी तब कहाँ थमती है ये जिंदगी।
जिंदगी हमें मिला है जीने के लिए।
जीवन मिला है उपकार करने के लिए।
इसे भरपूर आनंद के साथ जीते रहें।
खुश रहें औरों को भी खुशियाँ लुटाते रहें।
खुश रहें औरों को भी खुशियाँ लुटाते रहें।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम।

Happy friend ship day

Friend indeed is a God gifts to the humen being.

They are the next to parents in every ones life.

They share their sorrows and happiness to each other.

They are always with each other in their sorrows to share it.

The one real friend in life is more than the hundreds of well wishers, who all are just enjoying their companion.

I wish very very happy friend ship day to my those best friend.

May God bless us with good health and long life to share our experiences and enjoy the life.

Jaihind jaibharat vendamatram