जवानी का गुरूर

समय सबको समय पर सबकुछ सीखा देता है ।
जवानी में अपने माता-पिता का सम्मान किया है ।
बुढ़ापे में वह सम्मान बच्चे दोगुनी कर लौटा रहा है ।
अपने बुजुर्ग माता-पिता के दिल को दुखाया है ।
उसी का फल आज इस बुढ़ापे में मिल रहा है ।
रोना किस बात पर ,जो बोया वही तो काट रहा है ।
यही तो कर्म फल है, सभी को यहीं भोग जांना है ।
जवानी का गुरूर न कर, ये बुढ़ापा तुम्हें भी आना है

ये बुढ़ापा तुम्हें भी आना है, ये बुढ़ापा तुम्हें भी आना है ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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