चिंता नहीं चिन्तन करें

चिंता नहीं चिन्तन करें, धन जोड़े या घर जोड़े ।
माता-पिता के साथ रहें या उनको छोड़ अकेले रहें ।
बच्चों को कामयाब बनायें या उनको अपने पास रक्खें ।
पढ़ाना है गर उनको दूर तब उनसे रहें ।
अच्छी कमाई वाली नौकरी करानी है तो अकेले रहें ।
जमाना चला गया जो बापदादो की खेती थी।
बड़े बड़े बाग बगीचे और सैकड़ों बीघे जमीन थी।
आज पुस्तैनी खेती बंटकर टुकड़ों में बिखर गया है ।
बाबा के कुनबे अब बीस कुनबो में बंट गया है ।
घर से बाहर नहीं निकले तो खायेंगे क्या ।
पढेंगे लिखेंगे नौकरी करने बाहर जाना ही होगा।
परिवार माता-पिता और नौकरी में तालमेल बैठाना ही होगा।
बच्चों को घर से बाहर रहकर परिवार चलाना ही होगा ।
बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करनी ही होगी ।
बुढ़ापे में उन्हें साथ रखकर सेवा करनी ही होगी ।
समय की मांग है समय के साथ चलनी ही होगी ।
जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

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