शालीनता

सैम्यता की है तू मूरत,
शालीनता की तू कसोटी ।
भव्यता के साथ ही तू,
संस्कृति की है तू बेटी।
कौन कहता है कि औरत,
घर से बाहर कुछ नहीं है ।
माँ की ममता से लवालव,
प्यार की देवी हो तुम ।
तुम सा बेटी पाके बापू,
है वो गर्वित भाग्यशाली ।
ये तुम्हारा मुस्कुराना ,
मन लुभावन है सही ।
औरत की मर्यादा तू है,
सरोस्वती की रूप तू।
औरत की मर्यादा तू है,
सरोस्वती की रूप तू।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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