अधूरा

अधूरा

जीवन अधूरा है ग्यान के बिना ।
गुरु अधूरा है शिष्य के बिना ।
आँगन सूनी है संतान के बिना ।
घर सूना है घरवाली के बिना ।
दिल सूना है संगीत के बिना ।
दिन अधूरा है दिनमान के बिना ।
रात अंधेरी है चाँद के बिना ।
बगिया सूनी है बागवान के बिना ।
ताल तलैया सूखी है बारिश के बिना ।
मीन प्यासी है नीर के बिना ।
जंगल बीरान है पेड़ के बिना ।
स्कूल खाली है छात्र के बिना ।
सड़कें सूनी है मुसाफ़िर के बिना ।
बैठक सूना है दोस्त के बिना ।
महफिल सूनी है श्रोता के बिना ।
राजमहल सूना है राजा के बिना ।
खजाना खाली है सोना के बिना ।
सेज सूनी है सैयां के बिना ।
गोद सूनी है बालक के बिना ।
मंदिर सूना है भगत के बिना ।
भोजन फ़ीका है नमक के बिना ।
हम मायूस हैं दोस्त के बिना ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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