पाप और पश्चाताप

आज सत्तर साल की राधिका अपने घर में अकेली सोच रही थी । बेटे की चाह में जब उसने दो दो बार अपना गर्भपात करवाया था। वही बेटा बुढ़ापे में उसे अकेला छोड़कर मोटी कमाई के लिये परदेश चला गया । काश बेटियों को गर्भ में नहीं मारती । पर अब पछताने से क्या फायदा । तभी उसका बेल बजा , दरवाजे पर दो जवान लड़की मुस्कुराती हुई हाथ जोड़ कर नमस्ते की और शालीनता से बोली । आंटी जी हम दोनों सहेलियां यहीं आपके शहर में बैंक में काम करती हैं । मुझे पता चला है कि आप इतने बड़े घर में अकेली रहती हैं, क्या हम दोनों आपकी बेटी की तरह आपके साथ रह सकते हैं । हमें माँ का दुलार मिलेगा और आपको बेटी का प्यार । राधिका को लगा कि उसकी अपनी बेटी लौट आयी है । उसने कहा रूको अभी आती हूँ और घर के अंदर जाकर आरती की थाली सजा कर दरवाजे पर आकर दोनों की आरती उतार उसे स्नेह से घर के अंदर ले जाती है । वर्षों बाद आज राधिका का पश्चाताप सफल हो गया । तीनों माँ बेटी की तरह खुशी खुशी जीवन जीते रहे ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम

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