हम वो आखिरी पीढ़ी हैं

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो अपने माता-पिता को भगवान की तरह पूजा करते थे और बड़े भाई भाभी को माता-पिता ही समझते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो सुबह शाम लोटे लेकर खेतों पर जाया करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो स्लेट पेनसिल, तख्ती और कलम दवात से लिखते थे।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो स्कूल में जूट के अपने अपने टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो दतवन से सुबह सुबह दाँत साफ करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो खेतों की रखवाली करने रात में अपने खेतों पर ही सोया करते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो छूआ छूत के भेदभाव को अपने आँखो से देखे हैं ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो चने चवेने बड़ी ही चाव से खाते थे ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो सुबह शाम गैया की थन से निकले गरमा गरम दूध ग्लास भर भर के पीते थे ।
हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो दीपक और कुप्पी की रोशनी में पढ़ाई कर, अनपढ़ किसान के बेटे से क्लास वन सर्विस तक पहुंचते थे।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो अपने चाचा चाची, मामा मामी, फूफा फूफी ,मौसा मौसी और आस पड़ोस के घरों को भी अपना ही घर समझते थे।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो फूस की मरैया, मिट्टी के खपरैल घर से निकल कर आलीशान ऐ सी वाले बंगले में आशियाना बना पाये हैं ।

हम वो आखिरी पीढ़ी हैं जो गाँव की कच्ची सड़कों पर कभी-कभी ट्रक के आने पर उसके पीछे लटकने के लिये दौड़ लगाया करते थे और हमारे आखों मुँह धूलो से ढक जाया करते थे, पर क्या मस्ती होती थी , आज की पीढ़ी अनुमान भी नहीं लगा सकती है ।

ऐसे बहुत कुछ और यादें हैं जो हमारी इस आखिरी पीढ़ी के साथ ही चली जायेगी ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

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