रिश्ते

रिश्ता वही जो रिश्तों में खुशियाँ भर देती है ।

किसी को खुश रखने वाली रिश्ता दुखदायी होती है।

यह जरूरी नहीं कि रिश्ता खून का ही हो।

पराये अपनों से बेहतर हैं, जो सुख दुःख का साथी हो।

मतलबी रिश्ता तो छनभंगूर होता है ।

मतलब निकल जाने पर आँखें चुरा लेता है ।

रिश्ते रिश्ते में भी बहुत भेद होता है।

कोई आप के लिये ही सोता जगता है ।

और कोई मतलब से रिश्ता निभाता है ।

सुरेश इन रिश्तों को करीब से देखा है ।

मतलबी रिश्तेदारों को खूब समझ पाया है ।

आप अपनों के साथ रिश्ते जरूर निभाते रहें।

पर अपने ज़मीर को जरूर बचा कर रक्खें ।

गाँठ का पैसा और हाथ का हुनर ही काम आता है ।

दूसरों के पास रक्खा धन और शस्त्र भी ।

कभी भी समय पर काम नहीं आता है ।

दानी बने, रिश्ते निभायें, पर मतलबी न बने ।

सुख दुःख का साथी बने देनदार न बने ।

मतलबी रिश्तेदारों से बचकर रहें ।

खुश रहें खुशहाल रहें, खुश रहें खुशहाल रहें ।

जयहिन्द जयभारत वन्देमातरम ।

Advertisement

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: