सम्मान नव वर्ष की 

हम सब अपने घरों में बैठे, टकटकी लगाए घड़ी देख रहे हैं। 

टीवी से चिपके यों बैठे, आँखें गराये नजारा देख रहे हैं।

एक से एक परियों का थिरकना, जामो से जाम का टकराना। 

बाँहों में बाँहें डाले छोड़े छोड़ियो का, बदन से बदन का सटाना। 

शोर मचाती संगीत का लहराना, बत्तियों का जलना बुझना।

रात के बारह बजने वाले हैं, पुराने साल का जाना नये का आना। 

इसी का इन्तजार था सभी को, पल भर में सालों का बदलना। 

आतिशबाजी से रात को भी, सोते से असमय जगा देना। 

नव वर्ष आ गया है, सड़कों पर जोर जोर लडकों का चिल्लाना।

नयी खुशियाँ, नये सौगात, लेकर हमें जगाने आया है। 

सब कुछ वही पुराना है, पर नया साल तो आया है। 

जैसे हर दिन रात के बाद, नयी सुबह हर रोज आती है।

 लालिमा देख डालों पर बैठ, चिड़ियाँ हमें जगाती है। 

 कुछ नयी करने की,अधुरे कामों को पूरा करने की।

नयी उमंगों के साथ, पुरानी से कुछ नयी करने की।

नये साल में नयी आशा के साथ, सत्कर्म करने की। 

कसम खायें बुराई छोड़ने की, मिलजुलकर साथ रहने की। 

हो आपस में भाईचारा, नहीं हो मजहब की तकरार। 

नहीं हो अपनों में टकराव, सबों से बना रहे ये प्यार। 

यही हो नव वर्ष का उपहार,सुरेश का कहना हो साकार। 

हमें सब देना तुम उपहार,मन में करना सही विचार। 

यही हो नव वर्ष का उपहार।यही हो नव वर्ष का उपहार। 

जयहिंद जयभारत वन्देमातरम। 

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