ख़ुशियों की तलाश

हम ढूँढते हैं ख़ुशियाँ को अपने आस पास,उसे पाने के लिये लगे रहते हैं दिन रात

उसे ढूँढने के चक्कर में लग जाती है सारी ज़िन्दगी,पर क्या वह मिल पाती ता ज़िन्दगी 

नहीं क्योंकि हम उसे ढूँढते ही रहते हैं,उसे पाने की नाकाम कोशिश करते ही रहते हैं

ख़ुशियाँ हमारे सामने रहती है दिन रात,हर जगह हर समय हमारे आस पास

कस्तूरी की तरह वह है हमारे आस पास,पर उसे पाने के लिये हम छटपटाते हैं

मृगतृष्णा सी भटकता रहता है मन,अपने ही भ्रमजाल में उलझते जाते हैं हम

ख़ुशियाँ तो अपने मन के अंदर होती है,इसे औरों में बॉटने से बढ़ती  है

यह वह पौध है जो सींचने पर बढ़ता है,फलता फूलता और फल देता ही रहता है

इसे बॉट कर तो देखो,अपने लोगों में,इसे बॉटो अपने आस पास पड़ोसी में

दीन दुखियों में ,गली मुहल्लों में,मीठी बोली प्यारे बोल,तेरी ये ख़ुशियाँ अनमोल

मॉ को मिलती है ख़ुशियाँ ,बच्चों की किलकारी में,मिलती है सुकून ,जब अपना दूध पिलाती है

उसे चलते देख निहाल होती है,तुतलाने पर बलिहारी जाती है

उसके रोने और मचलने पर,उन्हें मनाती है,सारा दुख भुला ,छाती से लगा लेती है

क्या ये ख़ुशियाँ नहीं है? हर्ष पिता को होता है जब अपना बच्चा उसे पापा पापा कहता है

वह भूल जाता है सारा ग़म,जब वह बाँहें फैलाता है,उसे वह गोद में उठाता,बाँहों में झुलाता है

पुचकारता प्यार करता है,जब वह स्कूल जाता है,उसे वह छोड़ने और लाने वहॉ जाता है

उसकी पढ़ाई पर ध्यान देता है,गाड़ी में घुमाता है,उसकी ख़ुशी के लिये ,अपना दुख दर्द भूल जाता है

उसे इन्सान बनाने के लिये, सारी दुनियॉ से लड़ता ह,अपने सारे ग़मों को ख़ुशियों में बदल देता है

यही तो है उनकी सच्ची ख़ुशियाँ है,क्या उसे कहीं ढूँढना पड़ता है

उनकी ख़ुशियाँ उनके पास है,ता उम्र वह उसी के लिये जीता है

पर जब बच्चे बड़े हो जाते हैं,उनकी तमाम ख़ुशियाँ बिखर जाती है

बच्चे ख़ुद तो ख़ुशियाँ मनाते हैं,मॉ बाप को भूल घर छोड़ जाते है

मॉ बाप को बुढ़ापे में ,बेसहारा छोड़ रास्ते से भटक जाते हैं

जो वह कभी बचपन में बोला करता था,मम्मी पापा तुतलाता था
यही ख़ुशियाँ वह क्यों नहीं लौटा देता है,अपनी दो मीठी बोलसे

जो वह कभी बचपन में बोला करता था,पापा मम्मी से चिपकता था

रूठता और ठुनकता था,हँसता कभी रोता था,मॉ की छाती से  लगता था

आज वह बड़ हो गया है,बीती बातें भूल गया है,कल शायद उसे एहसास होगा,

जब उसका भी बच्चा बड़ा होगा,वह भी भूल जायेगा ,जैसे वहअपने मॉ बाप को भूला है

उसकी भी ख़ुशियाँ उससे बिखर जायेगी,तब तक बहुत देर हो जायेगी

अभी समय है चेत जाओ,बूढ़े मॉ बाप की क़दर करो उसे साथ रक्खो

सेवा कर उनके सुख दुख में हाथ बँटाओ ,उनकी दुआएँ लो मान बढ़ाओ 

बच्चे भी तुम से सीख लेंगे ,तुम्हारा बुढ़ापा भी सुखमय होगा

ख़ुशी लुटाओ और ढेर सारी ख़ुशियाँ पाते रहो,ख़ुशियाँ पाते रहो

सुरेशमधु की आशा है ,तुम सब पहल करोगे,सुख से रहोगे

सब सुख से रहोगे ,सब सुख से रहोगे

Advertisement

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: